Mayawati के नेतृत्व वाली Bahujan Samaj Party (बसपा) में बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिला है। पार्टी अध्यक्ष ने तीन वरिष्ठ नेताओं को निष्कासित कर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले Bahujan Samaj Party (बसपा) के भीतर हलचल तेज हो गई है। पार्टी नेतृत्व द्वारा तीन वरिष्ठ नेताओं के निष्कासन के बाद संगठन में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है, जिसका असर जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। बसपा सुप्रीमो Mayawati द्वारा लिए गए इस फैसले को पार्टी के अंदर एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, जहां इन नेताओं का मजबूत प्रभाव रहा है।
निष्कासन से बढ़ा असंतोष
पार्टी से निष्कासित किए गए प्रमुख नेताओं में Dharmveer Ashok, Jaiprakash और Sarfaraz Rain शामिल हैं। ये तीनों लंबे समय से पार्टी संगठन का अहम हिस्सा रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। विशेष रूप से धर्मवीर अशोक को पार्टी संस्थापक Kanshi Ram के करीबी सहयोगियों में गिना जाता रहा है। उन्हें कई राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिससे उनकी संगठनात्मक पकड़ और मजबूत हुई।
उनका अचानक निष्कासन कार्यकर्ताओं के बीच असमंजस और असंतोष का कारण बन गया है। कई स्थानीय कार्यकर्ता इसे पार्टी के लिए नुकसानदायक कदम मान रहे हैं।
पश्चिमी यूपी में असर की आशंका

जयप्रकाश की बात करें तो वे लंबे समय बाद पार्टी में लौटे थे और खासकर युवाओं को बसपा से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। उन्हें केरल जैसे राज्य की चुनावी जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी, जो उनके प्रति नेतृत्व के भरोसे को दर्शाता है। हालांकि, पार्टी सूत्रों के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संगठनात्मक मामलों में हस्तक्षेप की शिकायतों के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
इस घटनाक्रम के पीछे आंतरिक गुटबाजी और नेतृत्व स्तर पर असहमति की भी चर्चा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इन नेताओं की सक्रियता को देखते हुए, उनके निष्कासन से पार्टी के चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
टिकट वितरण पर पड़ेगा असर
बसपा ने आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अन्य दलों से पहले ही टिकट वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। कई जिलों में प्रभारियों की नियुक्ति भी हो चुकी है, जिन्हें बाद में उम्मीदवार घोषित किया जाना है। धर्मवीर अशोक, जयप्रकाश और सरफराज राईन जैसे नेताओं की टिकट वितरण में अहम भूमिका थी।
ऐसे में उनके बाहर होने से पार्टी के रणनीतिक फैसलों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, बसपा द्वारा पुराने और अनुभवी नेताओं को फिर से पार्टी में शामिल करने की जो मुहिम चलाई जा रही थी, उसे भी इस फैसले से झटका लगा है।









