UP Rajya Sabha Election 2026: सुभासपा के विधायक क्यों बन सकते हैं अहम, 10वीं सीट पर दिलचस्प होगा मुकाबला

UP Rajya Sabha Election 2026: उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में 10वीं सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। सुभासपा के विधायकों समेत छोटे दलों और

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव का ऐलान हो चुका है। विधायकों की मौजूदा संख्या के आधार पर बीजेपी के आठ और समाजवादी पार्टी के दो उम्मीदवारों के जीतने की संभावना बताई जा रही है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इन सीटों पर 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा और इसी दिन मतगणना भी की जाएगी। 

मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए आठ सीटों पर दावा मजबूत माना जा रहा है, जबकि समाजवादी पार्टी (SP) के लिए दो सीटों का गणित बनता है। हालांकि, अतिरिक्त उम्मीदवार उतारे जाने की स्थिति में 10वीं सीट का मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।

397 विधायकों के बीच 37 वोट का गणित

राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता सीधे मतदान नहीं करती। राज्य के निर्वाचित विधायक आनुपातिक प्रतिनिधित्व और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली के तहत राज्यसभा सदस्यों का चुनाव करते हैं। फिलहाल 403 सदस्यीय विधानसभा में छह सीटें खाली होने के कारण प्रभावी संख्या 397 विधायक है। मौजूदा गणित में एक राज्यसभा सीट के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत है।

इस हिसाब से सात सीटों के लिए 259 वोट पर्याप्त होते हैं। बीजेपी के पास अकेले 259 विधायक बताए जा रहे हैं। वहीं उसके सहयोगी दलों को जोड़ने पर NDA की संख्या इससे अधिक हो जाती है। यही वजह है कि बीजेपी गठबंधन के लिए आठवीं सीट हासिल करने की स्थिति भी महत्वपूर्ण हो जाती है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं। इस संख्या के आधार पर वह दो उम्मीदवारों के लिए जरूरी 74 वोट जुटाने की स्थिति में है। बची हुई सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना किसी भी पक्ष के लिए मुख्य चुनौती बन सकता है।

सुभासपा के विधायकों पर क्यों है नजर?

इस चुनाव में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के छह विधायक भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन इन विधायकों को अपने संख्या बल का हिस्सा मानता है, लेकिन उम्मीदवारों की संख्या बढ़ने पर हर विधायक का वोट महत्व रखेगा। सुभासपा के छह विधायकों में मऊ सदर से अब्बास अंसारी का नाम पहले से ही राजनीतिक चर्चाओं में रहा है। ऐसे में यदि राज्यसभा चुनाव में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं, तो गठबंधन के भीतर सभी विधायकों का समर्थन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

हालांकि, किसी विधायक के क्रॉस-वोटिंग करने या किसी खास उम्मीदवार को समर्थन देने की बात अभी निश्चित रूप से नहीं कही जा सकती। इसलिए मौजूदा स्थिति को संभावित चुनावी गणित के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

10वीं सीट पर क्यों फंस सकता है पेंच?

राज्यसभा की 10 सीटों में मौजूदा संख्या बल से बीजेपी गठबंधन के आठ और सपा के दो उम्मीदवारों के चुने जाने का गणित सामने आ रहा है। लेकिन यदि किसी दल ने अतिरिक्त उम्मीदवार उतारा, तो उसे जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट जुटाने होंगे। यही स्थिति चुनाव को प्रतिस्पर्धी बना सकती है। ऐसे में छोटे दलों और गठबंधन के सहयोगी विधायकों की भूमिका बढ़ सकती है। 

2024 के राज्यसभा चुनाव में भी उत्तर प्रदेश में क्रॉस-वोटिंग के कारण अपेक्षित परिणामों में बदलाव देखने को मिला था। इस बार भी अतिरिक्त उम्मीदवार आने की स्थिति में इसी तरह की स्थिति पर नजर रहेगी।

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