सोलापुर के शरण कांबले ने बेहद कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई जारी रखी। पिता मजदूरी करते थे और वह मां के साथ सब्जी बेचते थे। BTech के बाद 20 लाख की नौकरी छोड़ UPSC की तैयारी की और IPS बने।
UPSC Success Story: शरण कांबले की सफलता की कहानी संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। सोलापुर के साधारण परिवार में पले-बढ़े शरण के पिता मजदूरी करते थे, जबकि वह पढ़ाई के साथ मां की सब्जी बेचने में मदद करते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने स्कॉलरशिप से BTech पूरी की, क्लास में टॉप किया और अच्छी नौकरी का ऑफर छोड़कर सिविल सर्विस की तैयारी शुरू की।
सोलापुर के साधारण परिवार से शुरू हुआ सफर
शरण कांबले का बचपन महाराष्ट्र के सोलापुर में बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं भी आसानी से उपलब्ध नहीं थीं। उनके परिवार का घर कच्चा था और कई बार उन्हें स्कूल पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।

शरण ने एक इंटरव्यू में अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके घर में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं थी। पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कभी वह पैदल स्कूल जाते थे तो कभी बस की छत पर सफर करके पढ़ाई के लिए पहुंचते थे।
इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपने जीवन से अलग नहीं होने दिया। कठिन हालात ने उन्हें कमजोर करने के बजाय आगे बढ़ने का हौसला दिया।
पिता करते थे मजदूरी, मां के साथ बेचते थे सब्जी
शरण के पिता गटर खोदने और मजदूरी जैसे काम करते थे। परिवार की आमदनी सीमित थी और घर का खर्च चलाना भी आसान नहीं था। ऐसे में उनकी मां ने खेतों से सब्जियां लाकर बेचने का काम शुरू किया।
शरण भी पढ़ाई के साथ अपनी मां की मदद करते थे। वह समय निकालकर उनके साथ सब्जी बेचने जाते थे। एक तरफ उन्हें परिवार की आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ता था, तो दूसरी तरफ पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती थी।
यही संघर्ष आगे चलकर उनके व्यक्तित्व की ताकत बना। उन्होंने परिस्थितियों को अपनी कमजोरी मानने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाया।
Scholarship से BTech पूरी की और बने क्लास टॉपर
आर्थिक मुश्किलों के बावजूद शरण ने उच्च शिक्षा का सपना नहीं छोड़ा। अपनी मेहनत और प्रदर्शन के दम पर उन्होंने स्कॉलरशिप हासिल की और BTech की पढ़ाई पूरी की।
कॉलेज के शुरुआती दिनों में उन्हें दूसरे छात्रों के मुकाबले संसाधनों और अंग्रेजी भाषा को लेकर अंतर महसूस होता था। इसके बावजूद उन्होंने खुद को कमतर नहीं समझा। लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया और अपनी क्लास के टॉप छात्रों में जगह बनाई।
BTech के दौरान उनका आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया। इसी दौर में उन्होंने महसूस किया कि सीमित संसाधन सफलता की राह में स्थायी बाधा नहीं हैं।
20 लाख का पैकेज छोड़ा, चुनी UPSC की राह
BTech पूरी करने के बाद शरण के सामने एक बड़ा अवसर आया। उन्हें एक प्रतिष्ठित कंपनी से करीब 20 लाख रुपये के पैकेज वाली नौकरी का ऑफर मिला। परिवार और आसपास के लोगों के लिए यह आर्थिक स्थिति बदलने वाला बड़ा मौका था।
हालांकि शरण ने नौकरी के बजाय सिविल सर्विस में जाने का फैसला किया। उन्होंने देश सेवा के अपने लक्ष्य को प्राथमिकता दी और UPSC की तैयारी शुरू कर दी।
यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि एक ओर अच्छी नौकरी और आर्थिक सुरक्षा थी, जबकि दूसरी तरफ UPSC जैसी कठिन परीक्षा की अनिश्चित तैयारी। शरण ने जोखिम उठाया और सिविल सर्विस की राह पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया।
CAPF में हासिल की AIR 8, फिर बने IPS
शरण कांबले ने अपनी तैयारी के दौरान UPSC CAPF परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया। वर्ष 2019 में उन्होंने CAPF परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल की।
इसके बाद वर्ष 2020 में उन्होंने UPSC Civil Services Examination पास की और 542वीं रैंक हासिल की। इस सफलता के साथ उनका IPS अधिकारी बनने का सपना पूरा हुआ।
उनकी UPSC यात्रा में कई प्रयास और इंटरव्यू भी शामिल रहे। उन्होंने लगातार प्रयास जारी रखा और आखिरकार सिविल सेवा में अपनी जगह बनाई।
शरण कांबले की कहानी बताती है कि आर्थिक परेशानियां, सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति के लक्ष्य को रोक नहीं सकतीं। अगर मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता बनी रहे तो बेहद साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।











