प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से 75 मिनट का भाषण दिया। विश्लेषण के मुताबिक, उन्होंने भारत शब्द 111 बार, दुनिया 62 बार और युवाओं से जुड़े शब्द 52 बार इस्तेमाल किए। देशवासियो संबोधन भी 40 बार दोहराया।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली के लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। करीब 75 मिनट के उनके भाषण में भारत, युवाओं, विकास, तकनीक, गरीबी, नक्सलवाद और आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिखाई दिया। भाषण के शब्दों और संबोधनों के विश्लेषण से यह भी सामने आया कि प्रधानमंत्री ने देश, दुनिया और युवाओं से जुड़े शब्दों का बार-बार इस्तेमाल किया।
भाषण में सबसे ज्यादा ‘भारत’ का जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस साल के स्वतंत्रता दिवस भाषण में ‘भारत’ शब्द सबसे अधिक बार इस्तेमाल हुआ। उपलब्ध भाषण विश्लेषण के मुताबिक, करीब 75 मिनट की स्पीच के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘भारत’ का 111 बार उल्लेख किया। इसके बाद ‘दुनिया’ शब्द का 62 बार इस्तेमाल हुआ।
शब्दों के इस इस्तेमाल से भाषण में भारत की वैश्विक भूमिका, देश के विकास और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलती स्थिति पर प्रधानमंत्री के जोर का अंदाजा लगाया जा सकता है। स्वतंत्रता दिवस के भाषण में राष्ट्रीय उपलब्धियों के साथ भविष्य के लक्ष्यों और वैश्विक चुनौतियों को भी प्रमुखता दी गई।
युवाओं से जुड़े शब्दों का 52 बार इस्तेमाल
इस भाषण की एक खास बात युवाओं पर प्रधानमंत्री का विशेष जोर रहा। ‘युवा’, ‘नौजवान’, ‘युवा शक्ति’ और युवाओं से संबंधित अन्य संबोधनों को मिलाकर प्रधानमंत्री ने करीब 52 बार युवाओं का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री के भाषणों में युवाओं को देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया जाता रहा है। इस बार भी युवा शक्ति, नई पीढ़ी की क्षमता, रोजगार, तकनीक और भारत के भविष्य से जुड़े विषय भाषण के प्रमुख हिस्सों में शामिल रहे।
‘मेरे प्यारे युवाओं’ का संबोधन भी भाषण में इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा ‘देश सेवक’ और ‘भाई-बहनों’ जैसे संबोधन भी एक-एक बार सुनाई दिए। इससे यह स्पष्ट होता है कि भाषण में अलग-अलग सामाजिक समूहों से सीधे संवाद स्थापित करने की कोशिश की गई।
‘मेरे प्यारे देशवासियो’ 40 बार बोला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में ‘मेरे प्यारे देशवासियो’ संबोधन का इस्तेमाल करीब 40 बार किया। यह संबोधन लंबे समय से उनके स्वतंत्रता दिवस भाषणों का प्रमुख हिस्सा रहा है।
स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री का यह अंदाज सीधे देश की जनता से संवाद स्थापित करने वाला माना जाता है। इसके जरिए वह अलग-अलग राज्यों, क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों को एक साझा राष्ट्रीय संबोधन के तहत जोड़ने की कोशिश करते हैं।
वहीं ‘साथियो’ शब्द का इस्तेमाल करीब 10 बार किया गया। ‘मेरे प्यारे युवाओं’, ‘देश सेवक’ और ‘भाई-बहनों’ जैसे संबोधनों का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम हुआ।
‘देशवासियो’ पीएम मोदी का पसंदीदा संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषणों में ‘देशवासियो’ शब्द लगातार प्रमुखता से दिखाई देता है। पिछले वर्षों के भाषणों के उपलब्ध विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2025 में उन्होंने इसका इस्तेमाल करीब 50 बार किया था।
वर्ष 2024 में ‘देशवासियो’ करीब 30 बार, 2023 में लगभग 15 बार और 2022 में 40 से अधिक बार इस्तेमाल हुआ था। इससे पता चलता है कि प्रधानमंत्री के सार्वजनिक भाषणों में यह संबोधन लंबे समय से संवाद की एक स्थायी शैली का हिस्सा रहा है।
यह संबोधन प्रधानमंत्री और जनता के बीच सीधे जुड़ाव का भाव पैदा करता है। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर इसका इस्तेमाल भाषण को अधिक जन-केंद्रित बनाने में भी मदद करता है।
‘परिवारजनों’ भी रहा खास संबोधन
‘परिवारजनों’ शब्द भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों में एक महत्वपूर्ण संबोधन के रूप में उभरा है। वर्ष 2023 में यह उनके सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले संबोधनों में शामिल था और उस दौरान उन्होंने इसे करीब 50 बार कहा था।
प्रधानमंत्री के भाषणों में इस तरह के संबोधनों का इस्तेमाल केवल भाषाई शैली नहीं, बल्कि जनता के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने के तरीके के तौर पर भी देखा जाता है। ‘परिवारजनों’ शब्द के जरिए नागरिकों को एक बड़े राष्ट्रीय परिवार के हिस्से के रूप में संबोधित करने का प्रयास दिखाई देता है।

‘साथियो’ के इस्तेमाल में भी बदलाव
‘साथियो’ भी प्रधानमंत्री के भाषणों में लगातार इस्तेमाल होने वाला संबोधन है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में इसका इस्तेमाल करीब 35 बार हुआ था। 2024 में करीब 30 बार, 2023 में लगभग पांच बार और 2022 में करीब आठ बार ‘साथियो’ कहा गया।
इस साल के भाषण में इसका इस्तेमाल लगभग 10 बार रहा। इससे भाषण की शैली में सीधे संवाद और सामूहिक भागीदारी का भाव नजर आता है।
नक्सलवाद, गरीबी और डिजिटल जैसे मुद्दे भी चर्चा में
प्रधानमंत्री के भाषण में केवल संबोधनों पर ही जोर नहीं रहा। नीतिगत और सामाजिक मुद्दों से जुड़े कई शब्द भी बार-बार इस्तेमाल किए गए। नक्सलवाद से जुड़े शब्दों का कुल इस्तेमाल करीब 15 बार हुआ।
इसी तरह गरीबी और गरीब से संबंधित शब्दों का करीब सात बार उल्लेख किया गया। प्रधानमंत्री ने ‘लाल किला’ शब्द का 11 बार और ‘डिजिटल’ का करीब 10 बार इस्तेमाल किया।
इन शब्दों की आवृत्ति से भाषण के प्रमुख विषयों की तस्वीर सामने आती है। सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के साथ गरीबी उन्मूलन, डिजिटल तकनीक और भारत के विकास मॉडल पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
डिजिटल भारत और नई तकनीक पर जोर
डिजिटल शब्द का 10 बार इस्तेमाल इस बात की ओर संकेत करता है कि तकनीक और डिजिटल परिवर्तन भाषण के महत्वपूर्ण विषयों में रहे। पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान, डिजिटल सार्वजनिक ढांचा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी नवाचार भारत की विकास नीति के प्रमुख हिस्से बने हैं।
युवा आबादी और तकनीकी बदलाव के बीच संबंध को देखते हुए प्रधानमंत्री के भाषण में युवाओं और डिजिटल भारत का एक साथ उल्लेख भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। नई तकनीक को रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक विकास से जोड़ने की दिशा में सरकार लगातार जोर देती रही है।
लाल किले से पीएम मोदी का लगातार 13वां भाषण
15 अगस्त 2026 का संबोधन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाल किले से लगातार 13वां स्वतंत्रता दिवस भाषण रहा। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से वह हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते रहे हैं।
हालांकि लाल किले से सबसे अधिक स्वतंत्रता दिवस भाषण देने का रिकॉर्ड अभी भी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम है। नेहरू ने कुल 17 बार लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश को संबोधित किया था।
इस लिहाज से प्रधानमंत्री मोदी के 13 लगातार भाषण उन्हें इस सूची में एक महत्वपूर्ण स्थान पर रखते हैं। आने वाले वर्षों में उनके भाषणों की संख्या बढ़ने के साथ यह अंतर और कम हो सकता है।
भाषण के शब्द बताते हैं सरकार की प्राथमिकताएं
किसी राजनीतिक भाषण में शब्दों की आवृत्ति का विश्लेषण सरकार की प्राथमिकताओं और वक्ता के संदेश की दिशा को समझने का एक उपयोगी तरीका हो सकता है। इस भाषण में ‘भारत’ का 111 बार उल्लेख राष्ट्रीय पहचान और देश-केंद्रित संदेश को दर्शाता है।
इसी तरह युवाओं का 52 बार उल्लेख नई पीढ़ी को विकास की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भागीदार बनाने के संदेश को सामने रखता है। ‘दुनिया’ का 62 बार जिक्र भारत की वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय संदर्भ की ओर संकेत करता है।
नक्सलवाद, गरीबी, डिजिटल तकनीक और लाल किले जैसे शब्दों की आवृत्ति भाषण के दूसरे प्रमुख विषयों को रेखांकित करती है। कुल मिलाकर 75 मिनट के इस संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश की वर्तमान स्थिति, विकास की दिशा और भविष्य की चुनौतियों को अलग-अलग मुद्दों के जरिए सामने रखा।
75 मिनट की स्पीच में देश, युवा और विकास केंद्र में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2026 का स्वतंत्रता दिवस भाषण शब्दों के स्तर पर भी काफी व्यापक रहा। ‘भारत’ और ‘दुनिया’ जैसे शब्दों के लगातार इस्तेमाल के साथ युवाओं को विशेष रूप से संबोधित किया गया। वहीं गरीबी, नक्सलवाद और डिजिटल तकनीक जैसे मुद्दों ने भाषण के नीतिगत पक्ष को मजबूत किया।
भाषण का विश्लेषण यह भी दिखाता है कि प्रधानमंत्री ने जनता से संवाद के लिए पारंपरिक संबोधनों का इस्तेमाल जारी रखा। ‘मेरे प्यारे देशवासियो’, ‘साथियो’ और ‘परिवारजनों’ जैसे शब्द उनकी भाषण शैली का अहम हिस्सा बने हुए हैं। लाल किले से लगातार 13वें संबोधन के साथ यह भाषण भी प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संदेशों की लंबी राजनीतिक परंपरा में जुड़ गया है।









