अमेरिकी नौसेना इन दिनों एक नई एयर-टू-एयर मिसाइल का परीक्षण कर रही है, जिसकी मारक क्षमता 465 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है। यह मिसाइल लंबी दूरी से दुश्मन के विमानों या अन्य हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए विकसित की जा रही है।
AIM-424 Malice Missile: अमेरिका लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल तकनीक को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। अमेरिकी नौसेना से जुड़ी नई जानकारी के अनुसार, रेथियॉन द्वारा विकसित AIM-424 Malice का परीक्षण किया जा रहा है। इस मिसाइल की संभावित मारक क्षमता 465 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है। यदि इसकी क्षमता और परिचालन प्रदर्शन अपेक्षाओं के अनुरूप रहता है, तो यह लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की श्रेणी में एक महत्वपूर्ण प्रणाली बन सकती है।
इस नए हथियार के सामने आने से अमेरिका की लंबी दूरी की हवाई युद्ध क्षमता और विशेष रूप से चीन के बढ़ते एयर और मिसाइल खतरे के संदर्भ में इसकी रणनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या है AIM-424 Malice?
AIM-424 Malice को RTX की सहायक कंपनी Raytheon द्वारा विकसित किया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, मिसाइल का डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि इसका आकार मौजूदा पीढ़ी की AIM-120 AMRAAM मिसाइल के करीब रहे। कॉम्पैक्ट डिजाइन का सबसे बड़ा फायदा स्टेल्थ लड़ाकू विमानों के लिए हो सकता है। छोटे आकार के कारण इसे ऐसे विमान के आंतरिक हथियार कक्ष में रखने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे विमान की कम दिखाई देने वाली विशेषताओं को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
F-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर के लिए यह क्षमता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि हथियारों को बाहरी रूप से लटकाने की जरूरत कम होने पर विमान का रडार सिग्नेचर नियंत्रित रखा जा सकता है।
465 किलोमीटर से ज्यादा रेंज क्यों महत्वपूर्ण?
लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों का उद्देश्य केवल दुश्मन के लड़ाकू विमानों को निशाना बनाना नहीं होता। ऐसी प्रणालियां दुश्मन के महत्वपूर्ण सपोर्ट एयरक्राफ्ट को भी खतरे में डाल सकती हैं। इनमें एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमान, एयरबोर्न कमांड एंड कंट्रोल प्लेटफॉर्म और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर शामिल हैं। ये विमान किसी भी आधुनिक वायुसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इनके जरिए निगरानी, कमांड, संचार और लंबी दूरी के अभियानों को समर्थन मिलता है।
यदि कोई लड़ाकू विमान इन महत्वपूर्ण लक्ष्यों को अपेक्षाकृत सुरक्षित दूरी से निशाना बनाने की क्षमता हासिल करता है, तो दुश्मन के पूरे एयर ऑपरेशन पर असर पड़ सकता है।
चीन के संदर्भ में क्यों अहम है यह मिसाइल?

AIM-424 की चर्चा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और चीन के बीच एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। चीन के पास लंबी दूरी के हथियारों से लैस लड़ाकू विमान और बमवर्षक प्लेटफॉर्म मौजूद हैं, जो अमेरिकी नौसैनिक बलों के लिए संभावित खतरा माने जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल अमेरिकी नौसेना के लिए अपने विमानवाहक पोतों और अन्य नौसैनिक संसाधनों की हवाई सुरक्षा मजबूत करने में उपयोगी हो सकती है।
विशेष रूप से ऐसे चीनी बमवर्षक और विमान जो लंबी दूरी की एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों के जरिए अमेरिकी नौसैनिक बेड़े को निशाना बना सकते हैं, उनके खिलाफ लंबी दूरी की इंटरसेप्शन क्षमता रणनीतिक महत्व रखती है।
लंबी दूरी की मिसाइल बनाना आसान नहीं
465 किलोमीटर से अधिक की संभावित रेंज अपने आप में प्रभावशाली आंकड़ा है, लेकिन इतनी दूरी पर लक्ष्य को सफलतापूर्वक निशाना बनाना बेहद जटिल तकनीकी चुनौती है। मिसाइल को लक्ष्य की स्थिति के बारे में लगातार अपडेट चाहिए। इसके लिए लड़ाकू विमान के सेंसर, रडार, नेटवर्क और मिसाइल के गाइडेंस सिस्टम के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होता है।
दूसरी ओर, लक्ष्य भी अपनी दिशा बदल सकता है, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का इस्तेमाल कर सकता है या मिसाइल से बचने के लिए अन्य रणनीति अपना सकता है।इसलिए किसी मिसाइल की अधिकतम रेंज और वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में प्रभावी रेंज को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
अमेरिका पहले से भी विकसित कर रहा है लंबी दूरी के हथियार
AIM-424 अमेरिका का एकमात्र लंबी दूरी का एयर-टू-एयर हथियार कार्यक्रम नहीं है। अमेरिकी रक्षा क्षेत्र में AIM-260 JATM जैसे कार्यक्रम पर भी काम जारी है। इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना के पास AIM-174B जैसी लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली भी है। अतीत में अमेरिका ने F-14 Tomcat के साथ AIM-54 Phoenix जैसी लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल का इस्तेमाल किया था। हालांकि, वह प्रणाली अब सेवा से बाहर हो चुकी है।












