अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए, जबकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों व सहयोगी देशों पर जवाबी हमले करने का दावा किया है।
ईरान/अमेरिका वॉर: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। हालिया घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए, जबकि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अगले आदेश तक बंद करने की घोषणा की। साथ ही ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उसके सहयोगी देशों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले करने का दावा किया है। यह घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है।
अमेरिका ने क्यों किए नए हवाई हमले?
अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरानी बलों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक व्यावसायिक जहाज को निशाना बनाया, जिससे जहाज को गंभीर नुकसान पहुंचा। इसके बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के सैन्य ढांचे पर व्यापक हवाई हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य मिसाइल लॉन्चिंग साइट, ड्रोन बेस, संचार नेटवर्क और तटीय निगरानी केंद्रों को निष्क्रिय करना था ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
140 सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई का दावा
अमेरिकी रक्षा विभाग के मुताबिक, हालिया अभियान में लगभग 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें मिसाइल लॉन्चर, ड्रोन सुविधाएं, कम्युनिकेशन नेटवर्क और तटीय रक्षा प्रणाली शामिल थीं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को चुनौती दी, जिसके जवाब में यह सैन्य कार्रवाई की गई।
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने की घोषणा की
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अगले आदेश तक बंद करने का ऐलान किया। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अब केवल उनके द्वारा निर्धारित समुद्री मार्ग का उपयोग सुरक्षित माना जाएगा। ईरान ने चेतावनी दी कि यदि कोई देश उसकी सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी करेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जवाबी हमलों का दावा
आईआरजीसी ने कहा कि जवाबी कार्रवाई के पहले चरण में जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी एयर बेस को निशाना बनाया गया। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और बहरीन की दिशा में भी मिसाइल एवं ड्रोन हमले किए जाने का दावा किया गया। हालांकि इन दावों से जुड़े नुकसान या हताहतों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह संकरा जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के बड़े ऊर्जा उत्पादक देशों का कच्चा तेल और एलएनजी इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा कीमतों और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है।

व्यावसायिक जहाजों पर हमलों से बढ़ी चिंता
इस सप्ताह की शुरुआत में तीन व्यावसायिक तेल टैंकरों पर हमले की घटनाएं सामने आई थीं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान समर्थित बलों ने इन जहाजों को निशाना बनाया, जबकि ईरान का कहना है कि केवल उसके द्वारा निर्धारित मार्ग ही सुरक्षित है। हालिया घटना में भी एक व्यापारिक जहाज के इंजन कक्ष को गंभीर नुकसान पहुंचने की सूचना है। जहाज का चालक दल सुरक्षा कारणों से लाइफबोट के जरिए बाहर निकाला गया।
संघर्ष से पहले भी बढ़ चुका था तनाव
पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के बीच कई दौर की सैन्य कार्रवाई हो चुकी है। ईरान के अनुसार, पहले हुए अमेरिकी हमलों में कई लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। इसके बाद ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की। इस लगातार बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
राजनयिक प्रयास जारी
तनाव बढ़ने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता की संभावनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ दोनों देशों के बीच संवाद बहाल कराने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करे कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खुला रहेगा और व्यावसायिक जहाजों पर हमले नहीं होंगे। दूसरी ओर ईरानी नेतृत्व का आरोप है कि अमेरिका ने पहले हुए समझौतों का पालन नहीं किया।
ईरान के नए सर्वोच्च नेता का सख्त संदेश
हाल ही में ईरान के नए सर्वोच्च नेता आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने राष्ट्र के नाम संदेश में कहा कि देश अपने नेताओं और नागरिकों की मौत का जवाब देगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उनके बयान के बाद ईरान में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन और अमेरिका विरोधी नारे भी देखने को मिले।
वैश्विक बाजारों पर असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बाधित रहता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री माल ढुलाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। ऊर्जा आयात पर निर्भर कई देशों के लिए यह स्थिति आर्थिक चुनौतियां पैदा कर सकती है। निवेशक भी इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ता दबाव
मध्य पूर्व में पहले से मौजूद अस्थिरता के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई जारी रखते हैं तो क्षेत्रीय संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है। ऐसे में कूटनीतिक समाधान और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।











