अमेरिका ने ईरान में फिर सैन्य कार्रवाई की, जिसके बाद तेहरान ने अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमलों का दावा किया। ईरानी पक्ष ने अमेरिकी हमलों में 19 मौतों और 68 घायलों की बात कही है, जबकि अमेरिका ने नागरिकों को निशाना बनाने से इनकार किया।
ईरान/अमेरिका वॉर: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान में नई हवाई कार्रवाई की, जिसके बाद तेहरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों को निशाना बनाकर जवाबी हमले करने का दावा किया। ईरानी पक्ष के अनुसार, अमेरिकी हमलों में कम से कम 19 लोगों की मौत हुई और 68 लोग घायल हुए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों और कुछ हमलों की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं।
ईरान में अमेरिकी हमलों से कई इलाकों में तबाही
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए नई कार्रवाई की। रिपोर्टों में दक्षिणी ईरान के सिरिक और कुहेस्तक क्षेत्र, खुजस्तान प्रांत, क़ेश्म द्वीप तथा बंदर अब्बास के आसपास सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमलों का उल्लेख किया गया है।
ईरानी मीडिया और अधिकारियों ने दावा किया कि इन हमलों में सैन्य कर्मियों के अलावा आम नागरिक भी प्रभावित हुए। अलग-अलग ईरानी रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 19 तक बताई गई। दूसरी ओर, कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, जिससे स्पष्ट है कि शुरुआती हताहतों की संख्या अभी पूरी तरह स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुई है।
अमेरिका ने नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने के आरोप को खारिज किया है। CENTCOM का कहना है कि उसकी कार्रवाई ईरानी सैन्य क्षमताओं और उन ठिकानों के खिलाफ थी जिन्हें अमेरिकी पक्ष क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री यातायात के लिए खतरा मानता है।
शादी समारोह पर मिसाइल गिरने का ईरान का दावा
इस सैन्य कार्रवाई का सबसे विवादित पहलू सिरिक या कुहेस्तक क्षेत्र में एक शादी समारोह के दौरान हुए विस्फोट से जुड़ा है। ईरानी पक्ष का आरोप है कि अमेरिकी हमले के दौरान एक मिसाइल शादी समारोह के नजदीक गिरी, जिससे कई नागरिकों की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए।
ईरानी मीडिया में मृतकों में बच्चों के शामिल होने की बात कही गई है। कुछ रिपोर्टों में चार लोगों की मौत और 68 लोगों के घायल होने का उल्लेख है, जबकि अन्य ईरानी दावों में मृतकों की संख्या पांच बताई गई। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इस घटना को लेकर रिपोर्टिंग की है, लेकिन हमले की सटीक परिस्थितियों और जिम्मेदारी को लेकर अमेरिका तथा ईरान के दावे अलग-अलग हैं।
अमेरिकी पक्ष ने नागरिकों को निशाना बनाए जाने से इनकार किया है। इसी वजह से यह घटना आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय जांच और राजनीतिक विवाद का बड़ा मुद्दा बन सकती है।
ईरान ने जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला किया
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू करने का दावा किया। ईरानी बलों ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और अमेरिका के सहयोगी देशों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही।
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की ओर से जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और इराक सहित क्षेत्र में मिसाइल तथा ड्रोन हमले किए गए। जॉर्डन और अन्य देशों ने अपनी हवाई सुरक्षा प्रणालियों को सक्रिय किया। कई मिसाइलों को हवा में ही रोकने का दावा भी किया गया है।
इस घटनाक्रम ने संघर्ष को ईरान और अमेरिका के सीधे टकराव से आगे बढ़ाकर पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए सुरक्षा चुनौती बना दिया है। बहरीन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहां अमेरिकी नौसेना का क्षेत्रीय संचालन ढांचा मौजूद है।
होर्मुज स्ट्रेट बना संघर्ष का सबसे संवेदनशील मोर्चा
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव का एक बड़ा केंद्र होर्मुज स्ट्रेट है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां किसी भी बड़े सैन्य व्यवधान का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो तेल टैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आ गए। ईरानी पक्ष के अनुसार, दोनों जहाज क्षतिग्रस्त हुए और उनके चालक दल को बाहर निकालना पड़ा। IRGC ने यह भी आरोप लगाया कि जहाज ऐसे मार्ग से गुजर रहे थे जिसे ईरान ने अधिकृत नहीं किया था। हालांकि, जहाजों की पहचान, झंडे और घटना की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल उपलब्ध नहीं थी।
अमेरिकी कार्रवाई का एक प्रमुख उद्देश्य ईरानी समुद्री गतिविधियों से जुड़े खतरे को कम करना बताया गया है। दूसरी ओर, ईरान होर्मुज में अपनी सैन्य क्षमता और समुद्री नियंत्रण का इस्तेमाल अमेरिकी दबाव का जवाब देने के लिए कर रहा है।
![]()
अमेरिकी टैंकर कार्रवाई से भी बढ़ा तनाव
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े दो टैंकरों को भी निशाना बनाया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने ईरानी समुद्री गतिविधियों के खिलाफ अपना दबाव बढ़ाया है।
इससे पहले अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास लारक द्वीप क्षेत्र में ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच समुद्री टकराव का खतरा और बढ़ गया।
यदि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो इसका असर कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और वैश्विक शिपिंग लागत पर पड़ सकता है। यही कारण है कि पश्चिम एशिया में चल रही यह सैन्य गतिविधि केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं रह गई है।
चीन ने पश्चिम एशिया में बाहरी दखल रोकने की अपील की
बढ़ते सैन्य तनाव के बीच चीन ने पश्चिम एशिया के मामलों में बाहरी हस्तक्षेप रोकने की अपील की है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के साथ बातचीत के दौरान क्षेत्रीय मामलों में बाहरी दखल के खिलाफ रुख दोहराया।
चीन की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के साथ-साथ क्षेत्रीय देशों पर भी दबाव बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संघर्ष को और फैलने से रोकना है।
ईरान की कड़ी चेतावनी, अमेरिका ने भी दबाव बढ़ाया
अमेरिकी हमलों के बाद ईरानी सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने अमेरिका के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान सैन्य कार्रवाई के साथ कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चों पर भी नई रणनीति अपनाएगा।
ईरान के शीर्ष अधिकारियों ने लगातार संकेत दिया है कि अमेरिकी हमलों का जवाब केवल ईरान की सीमा तक सीमित नहीं रहेगा। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन ने भी ईरान की सैन्य और समुद्री गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने के संकेत दिए हैं।
इस स्थिति में किसी भी नई मिसाइल या ड्रोन कार्रवाई से संघर्ष और व्यापक होने का खतरा बना हुआ है। खासकर जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और इराक जैसे देशों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के कारण ईरान-अमेरिका संघर्ष का असर कई देशों पर पड़ सकता है।
USS Abraham Lincoln लंबे मिशन के बाद थाईलैंड पहुंचा
इसी बीच अमेरिकी नौसेना का विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln थाईलैंड के लाम चाबांग बंदरगाह पहुंचा है। अमेरिकी नौसेना के अनुसार, कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के जहाज 2 सितंबर को निर्धारित पोर्ट विजिट के लिए थाईलैंड पहुंचे।
इस विमानवाहक पोत पर लगभग 5,000 नौसैनिक और मरीन तैनात हैं। रिपोर्टों के अनुसार, जहाज करीब 286 दिनों तक समुद्र में रहा और ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। लंबे समय तक समुद्र में रहने के कारण चालक दल की थकान, मानसिक स्वास्थ्य और सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं।
संघर्ष का अगला चरण कितना खतरनाक?
अमेरिका और ईरान के बीच ताजा हमले बताते हैं कि दोनों देशों के बीच तनाव अब एक नए और अधिक खतरनाक चरण में पहुंच गया है। ईरान के भीतर सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी हमले, जवाबी मिसाइल और ड्रोन कार्रवाई, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को लेकर विवाद और क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों पर खतरा एक साथ बढ़ रहे हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि संघर्ष यदि खाड़ी के दूसरे देशों तक व्यापक रूप से फैलता है तो इसका असर ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने सैन्य कदमों को सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियां तनाव कम करने की अपील कर रही हैं।








