उत्तराखंड हाई कोर्ट ने देहरादून में रह रहे पाकिस्तानी सिख परिवार को देश छोड़ने के आदेश पर सुनवाई करते हुए सरकार से स्पष्ट रुख मांगा है। अदालत ने कहा कि यदि परिवार से सुरक्षा खतरा है तो उसे पाकिस्तान भेजा जाए, अन्यथा उचित निर्णय लेकर जवाब प्रस्तुत किया जाए।
Nainital: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने देहरादून में लंबे समय से रह रहे एक पाकिस्तानी सिख परिवार से जुड़े मामले में राज्य और केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब तलब किया है। अदालत ने कहा कि यदि परिवार वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है तो उसे वापस पाकिस्तान भेजा जा सकता है, लेकिन इस संबंध में सरकार को ठोस आधार के साथ अपना पक्ष रखना होगा।
देश छोड़ने के आदेश को परिवार ने दी चुनौती

देहरादून के बसंत विहार क्षेत्र में वर्ष 2019 से दीर्घावधि वीजा पर रह रहे एक पाकिस्तानी सिख परिवार ने राज्य सरकार के उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 24 घंटे के भीतर भारत छोड़ने के लिए कहा गया था। परिवार का कहना है कि उनका वीजा अभी वैध है और निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले उन्हें देश छोड़ने का निर्देश देना उचित नहीं है।
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की एकलपीठ ने केंद्र और राज्य सरकार से इस संबंध में स्पष्ट निर्णय लेकर अदालत के समक्ष जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 15 जून की तारीख तय की है।
2019 में परिवार के साथ भारत आया था याचिकाकर्ता
याचिका के अनुसार, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र का निवासी मनजीत अपने परिवार के साथ वर्ष 2019 में दीर्घावधि वीजा पर भारत आया था। बाद में उसने अपने वीजा की अवधि भी बढ़वाई। परिवार पिछले कई वर्षों से देहरादून में रह रहा है और उसके बच्चे यहां शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
याचिका में बताया गया कि परिवार की बड़ी बेटी बीटेक की पढ़ाई कर रही है, दूसरी बेटी बीडीएस की छात्रा है, जबकि बेटा अभी छोटा है। परिवार ने अदालत से अनुरोध किया है कि वीजा की वैध अवधि पूरी होने तक उन्हें भारत में रहने की अनुमति दी जाए।
अदालत ने सरकार से मांगा स्पष्ट रुख
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार के पक्ष को भी सुना। राज्य की ओर से कहा गया कि जिस क्षेत्र में यह परिवार रह रहा है, वहां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) का मुख्यालय भी स्थित है। सरकार ने आशंका जताई कि इस कारण सुरक्षा संबंधी चिंताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इस पर अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि परिवार वास्तव में देश की सुरक्षा के लिए खतरा है तो उसे उसके मूल देश पाकिस्तान वापस भेजा जा सकता है। लेकिन यदि ऐसा नहीं है तो सरकार को उचित निर्णय लेकर अदालत को स्पष्ट जवाब देना होगा।
वीजा और सुरक्षा दोनों पहलुओं पर होगी सुनवाई
मामले में अब दो प्रमुख बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है। पहला, परिवार के वीजा की वैधता और उसके अधिकारों से जुड़ा है। दूसरा, सरकार द्वारा उठाई गई सुरक्षा संबंधी चिंताओं का आधार क्या है और क्या उसके समर्थन में पर्याप्त तथ्य मौजूद हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत इस मामले में मानवीय पहलुओं और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश कर रही है। परिवार के बच्चों की शिक्षा और लंबे समय से भारत में निवास जैसे पहलुओं को भी अदालत गंभीरता से देख सकती है।
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब इस मामले में सभी की नजर अगली सुनवाई पर है। अदालत ने सरकार को सोमवार तक अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। इसके बाद ही यह तय हो सकेगा कि परिवार को भारत में रहने की अनुमति मिलेगी या उसे देश छोड़ना होगा।
यह मामला न केवल वीजा नियमों बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, मानवीय अधिकारों और प्रशासनिक निर्णयों के संतुलन से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है, इसलिए आने वाले दिनों में इस पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।










