वाराणसी के निर्यातकों की नई रणनीति, अमेरिका पर निर्भरता घटाकर रूस, यूरोप और खाड़ी बाजारों पर नजर

वाराणसी के निर्यातक अमेरिका पर निर्भरता घटाकर रूस, यूरोप, ब्रिटेन और खाड़ी बाजारों में विस्तार की तैयारी कर रहे हैं।

वाराणसी के निर्यातक एक या सीमित देशों पर निर्भरता कम करने के लिए रूस-मध्य एशिया, ब्रिटेन, यूरोप, पश्चिम एशिया और MENA बाजारों में विस्तार की तैयारी कर रहे हैं। बनारसी सिल्क, हथकरघा, हस्तशिल्प और खाद्य उत्पादों पर फोकस रहेगा।

वाराणसी: वैश्विक व्यापार में बदलते हालात के बीच वाराणसी के निर्यातक अपने कारोबार को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं। भारतीय निर्यातक महासंघ (FIEO) ने एक या सीमित देशों पर निर्भरता घटाने के लिए रूस-मध्य एशिया, ब्रिटेन, यूरोप, पश्चिम एशिया और मध्य-पूर्व एवं उत्तरी अफ्रीका के बाजारों में संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया है।

रूस और मध्य एशिया में नए अवसरों की तलाश

वाराणसी के निर्यात कारोबार में बनारसी सिल्क, हथकरघा, हस्तशिल्प, कालीन, घरेलू वस्त्र और मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका है। FIEO का मानना है कि इन उत्पादों के लिए अलग-अलग देशों की मांग और बाजार की जरूरत के अनुसार निर्यात रणनीति तैयार करने की जरूरत है।

रूस और मध्य एशिया के बाजारों में कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, अजरबैजान और आर्मेनिया जैसे देशों को संभावित बाजार के रूप में देखा जा रहा है। इन देशों में भारतीय वस्त्र, घरेलू सज्जा सामग्री, कालीन और हस्तशिल्प के लिए संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया जा रहा है।

वैश्विक व्यापार और परिवहन व्यवस्था में बदलाव के बीच निर्यातकों के लिए नए खरीदारों के साथ संपर्क और मजबूत वितरण नेटवर्क तैयार करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे वाराणसी के पारंपरिक उत्पादों को नए ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

ब्रिटेन और यूरोप में बढ़ेगा कारोबारी संपर्क

भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू होने के बाद ब्रिटेन के बाजार को लेकर निर्यातकों की दिलचस्पी बढ़ी है। वाराणसी के सिल्क, हथकरघा, कालीन और भौगोलिक संकेतक वाले उत्पादों के लिए ब्रिटेन में नए कारोबारी अवसर तलाशे जा रहे हैं।

ब्रिटेन के अलावा जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, इटली और स्पेन जैसे यूरोपीय बाजारों में भी विदेशी खरीदारों के साथ सीधे कारोबारी संपर्क बढ़ाने की जरूरत बताई गई है। निर्यातकों के लिए उत्पाद की गुणवत्ता, बाजार की मांग और संबंधित देशों की आवश्यकताओं के अनुरूप रणनीति तैयार करने पर जोर है।

खाड़ी और पश्चिम एशिया में विस्तार की तैयारी

बाजार विस्तार की योजना में संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ओमान, कतर, कुवैत और बहरीन के साथ मिस्र, मोरक्को और जॉर्डन को भी शामिल किया जा सकता है। संयुक्त अरब अमीरात को क्षेत्रीय व्यापार और पुनर्निर्यात केंद्र के रूप में इस्तेमाल करके वाराणसी के उत्पादों को दूसरे खाड़ी देशों तक पहुंचाने की रणनीति पर भी विचार किया जा रहा है।

ओमान को खाद्य उत्पादों के लिए उभरते बाजार के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। जून 2026 में वाराणसी से ओमान को 40 मीट्रिक टन बिस्कुट की पहली खेप भेजी गई थी। FIEO इसे वाराणसी के प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए नए बाजार की संभावनाओं के उदाहरण के रूप में देख रहा है।

उत्पाद के अनुसार तय होगा बाजार

FIEO के अनुसार सिल्क साड़ी और फैशन वस्त्रों के लिए ब्रिटेन, यूरोप, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और रूस-मध्य एशिया के बाजारों पर ध्यान दिया जा सकता है। घरेलू वस्त्र और हस्तशिल्प के लिए यूरोप और खाड़ी देशों में संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं।

कालीन के लिए ब्रिटेन, यूरोप, रूस-मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के बाजार महत्वपूर्ण हो सकते हैं। वहीं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए खाड़ी देशों, ओमान, ब्रिटेन और चुनिंदा यूरोपीय बाजारों को लक्ष्य बनाया जा सकता है।

इस रणनीति का उद्देश्य वाराणसी के निर्यात कारोबार को अधिक विविध बाजारों तक पहुंचाना और किसी एक या सीमित बाजार पर निर्भरता कम करना है।

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