काशी में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: इस्कॉन मंदिर के बाहर 1KM लंबी लाइन, भजनों पर झूम रहे भक्त; कान्हा का होगा महाभिषेक

वाराणसी में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इस्कॉन मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतार लगी है। भजन-कीर्तन के बीच कान्हा का महाभिषेक और विशेष पूजा होगी।
काशी में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: इस्कॉन मंदिर के बाहर 1KM लंबी लाइन, भजनों पर झूम रहे भक्त; कान्हा का होगा महाभिषेक
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वाराणसी में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव भक्तिभाव और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। काशी के मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर इस्कॉन मंदिर में विशेष तैयारियां की गई हैं। मंदिर के बाहर करीब एक किलोमीटर लंबी कतार लग गई है। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते हुए भजन-कीर्तन में शामिल हो रहे हैं। मंदिर परिसर और आसपास का पूरा वातावरण ‘हरे कृष्ण, हरे राम’ के जयघोष से भक्तिमय नजर आ रहा है।

जन्माष्टमी के अवसर पर इस्कॉन मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। सुबह से ही श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना शुरू हो गया था। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, भीड़ बढ़ती चली गई और मंदिर के बाहर कतार काफी लंबी हो गई। श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराने के लिए स्वयंसेवक और सुरक्षाकर्मी व्यवस्था संभाल रहे हैं।

मंदिर के बाहर इंतजार कर रहे भक्तों के बीच उत्साह कम नहीं हुआ है। कतार में खड़े श्रद्धालु भजन गा रहे हैं और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगा रहे हैं। कई भक्त हाथों में पूजा सामग्री और फूल लेकर पहुंचे हैं। बच्चों को भी राधा-कृष्ण के स्वरूप में सजाकर मंदिर लाया गया है। कई परिवारों ने जन्माष्टमी के लिए विशेष व्रत रखा है और रात में भगवान के जन्म के समय पूजा-अर्चना करने की तैयारी की है।

जन्माष्टमी का सबसे प्रमुख आकर्षण रात में होने वाला भगवान श्रीकृष्ण का महाभिषेक रहेगा। धार्मिक परंपरा के अनुसार मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक किया जाएगा। इसके लिए मंदिर में विशेष व्यवस्था की गई है। महाभिषेक के दौरान भगवान को विभिन्न पवित्र द्रव्यों से स्नान कराया जाएगा और इसके बाद उनका विशेष श्रृंगार किया जाएगा। भक्तों के लिए यह क्षण बेहद खास होता है, क्योंकि इसी समय भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव चरम पर पहुंचता है।

इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी का आयोजन सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं रहता। दिनभर भजन, कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलता है। श्रद्धालु सामूहिक रूप से हरिनाम संकीर्तन में शामिल होते हैं। मंदिर परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों को भी आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। भक्ति संगीत के बीच श्रद्धालु झूमते हुए नजर आ रहे हैं।

काशी में जन्माष्टमी के मौके पर इस्कॉन मंदिर के अलावा अन्य प्रमुख कृष्ण मंदिरों में भी विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। मंदिरों को फूलों, रंगीन रोशनी और आकर्षक सजावट से सजाया गया है। भगवान कृष्ण और राधा की झांकियां तैयार की गई हैं। कई मंदिरों में बाल गोपाल को झूला झुलाने की परंपरा निभाई जा रही है। श्रद्धालु भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

वाराणसी की धार्मिक पहचान को देखते हुए जन्माष्टमी के दिन शहर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद रहती है। काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र से लेकर अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक भक्तों की आवाजाही बनी हुई है। इस्कॉन मंदिर में भीड़ को देखते हुए प्रवेश और निकास के लिए व्यवस्था की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। लंबी कतार के बावजूद भक्तों में दर्शन को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है।

जन्माष्टमी के इस उत्सव में युवा और बुजुर्गों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। कई श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। कुछ लोग कतार में ही कृष्ण भजन कर रहे हैं तो कुछ मोबाइल फोन से मंदिर की सजावट और धार्मिक कार्यक्रमों के दृश्य रिकॉर्ड कर रहे हैं। भक्तों का कहना है कि जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करना उनके लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव है।

मंदिर परिसर में रात के कार्यक्रम को लेकर भी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। भगवान के जन्म के समय शंख, घंटी और जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठेगा। मध्यरात्रि में जन्मोत्सव के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा और श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाएंगे। महाभिषेक के बाद आरती और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम भी होगा।

काशी में जन्माष्टमी के दौरान सिर्फ मंदिर ही नहीं, बल्कि घरों में भी विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। लोगों ने घरों में बाल गोपाल के लिए झूले सजाए हैं। कई परिवारों ने भगवान श्रीकृष्ण की छोटी-छोटी झांकियां तैयार की हैं। बाजारों में भी कान्हा की पोशाक, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और पूजा सामग्री की खरीदारी को लेकर चहल-पहल बनी हुई है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर काशी का माहौल पूरी तरह धार्मिक रंग में रंग गया है। मंदिरों में लगातार भजन-कीर्तन हो रहे हैं और श्रद्धालु भगवान कृष्ण की भक्ति में डूबे हुए हैं। इस्कॉन मंदिर के बाहर लगी लंबी कतार इस बात का संकेत है कि जन्माष्टमी को लेकर लोगों में कितना उत्साह है। भक्तों के लिए घंटों इंतजार भी भगवान के दर्शन की इच्छा के सामने छोटा लग रहा है।

रात में जैसे ही घड़ी मध्यरात्रि के करीब पहुंचेगी, श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की घोषणा के साथ मंदिर में जयकारे गूंजेंगे। भक्त एक-दूसरे को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देंगे और भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन करेंगे। इसके बाद महाभिषेक और विशेष आरती के साथ जन्मोत्सव का मुख्य धार्मिक अनुष्ठान पूरा होगा।

फिलहाल काशी में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर भक्तों की भीड़ लगातार बनी हुई है। इस्कॉन मंदिर के बाहर करीब एक किलोमीटर लंबी लाइन और भजनों पर झूमते श्रद्धालु जन्माष्टमी की भव्यता को दर्शा रहे हैं। भगवान श्रीकृष्ण के महाभिषेक और मध्यरात्रि जन्मोत्सव को लेकर भक्तों में खास उत्साह है। काशी की गलियों से लेकर मंदिरों तक आज भक्ति और उत्सव का माहौल दिखाई दे रहा है।

 

 
 

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