वेनेजुएला में विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो की सुरक्षित वापसी और राष्ट्रपति चुनाव की मांग को लेकर कराकस समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए। मचाडो की टीम के अनुसार, इस साल उन्हें देश लौटने से रोकने के कम से कम सात प्रयास विफल हुए हैं।
कराकस: वेनेजुएला में विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरीना मचाडो की सुरक्षित वापसी और राष्ट्रपति चुनाव कराने की मांग को लेकर समर्थक सड़कों पर उतर आए। राजधानी कराकस समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने देश में लोकतांत्रिक बदलाव और स्वतंत्र राजनीतिक प्रक्रिया की मांग की।
कराकस समेत कई शहरों में प्रदर्शन
रविवार को कराकस में सैकड़ों विपक्षी समर्थक हल्के नीले रंग की शर्ट पहनकर सड़कों पर निकले। यह रंग मचाडो की पार्टी Vente Venezuela से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने मोटरसाइकिलों और कारों के जरिए शहर के प्रमुख मार्गों पर रैली निकाली। इस दौरान वे हॉर्न बजाते, वेनेजुएला के झंडे लहराते और मचाडो की वापसी की मांग करते नजर आए।
कराकस के अलावा वालेंसिया, माराकाइबो और मेरिडा सहित कई राज्य राजधानियों में भी इसी तरह के प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि मचाडो को सुरक्षित रूप से देश लौटने दिया जाए और राष्ट्रपति चुनाव कराए जाएं, ताकि वेनेजुएला में लोकतांत्रिक संक्रमण की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
Vente Venezuela के कार्यकर्ता फ्लावियो वैलेंटिनी ने कराकस में प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह किसी पार्टी या राजनीति का मुद्दा नहीं है, बल्कि जनता का और जनता के लिए आंदोलन है।
पार्टी के एक अन्य नेता एंथनी रोमेरो ने कहा कि वे चाहते हैं कि संक्रमण की प्रक्रिया राष्ट्रपति चुनाव तक पहुंचे और एक स्वतंत्र तथा लोकतांत्रिक देश का निर्माण हो।
मचाडो की वापसी क्यों बनी बड़ा मुद्दा?
मारिया कोरीना मचाडो पिछले करीब नौ महीने से निर्वासन में हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्हें कई बार वेनेजुएला लौटने से रोका गया है। हालांकि, वेनेजुएला के अधिकारियों ने इस आरोप से इनकार किया है।
मचाडो की टीम के अनुसार, उन्होंने हाल के दिनों में देश लौटने के लिए कई प्रयास किए। सितंबर के तीसरे सप्ताह में केवल 24 घंटे के भीतर तीन प्रयास विफल होने की जानकारी सामने आई। इन प्रयासों में समुद्र और हवाई मार्ग दोनों शामिल थे। उनकी टीम के मुताबिक, इस साल अब तक वेनेजुएला लौटने की उनकी असफल कोशिशों की संख्या कम से कम सात हो चुकी है।
रॉयटर्स के अनुसार, हालिया घटनाक्रम उस समय सामने आया जब अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच न्यूयॉर्क में मुलाकात हुई।
समुद्र और हवाई मार्ग से लौटने की कोशिश
मचाडो की टीम के अनुसार, हालिया प्रयासों में एक बार उन्होंने पनामा से समुद्री रास्ते से वेनेजुएला पहुंचने की कोशिश की। जिस नाव को चार्टर किया गया था, उसके संचालक ने यात्रा रद्द कर दी और पोत को नौवहन के लिए अनुपयुक्त बताया।
इसके बाद मचाडो ने वेनेजुएला के करीब स्थित कैरेबियाई द्वीपों के रास्ते से लौटने की कोशिश की। उनकी टीम ने बताया कि क्यूरासाओ और अन्य स्थानों के लिए उड़ानों से जुड़ी योजनाएं भी आगे नहीं बढ़ सकीं। EFE के अनुसार, उनकी टीम ने कहा कि नए प्रयासों के बाद कुल असफल वापसी प्रयासों की संख्या कम से कम सात हो गई है।
इन घटनाओं को लेकर यह सवाल भी उठा है कि क्या अमेरिका की भूमिका मचाडो की वापसी में किसी तरह की बाधा से जुड़ी है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें वेनेजुएला लौटने से रोकने की नीति नहीं है, हालांकि कुछ मौकों पर सुरक्षा कारणों से उन्हें वापसी टालने की सलाह दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
अमेरिका का क्या कहना है?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पहले कहा था कि मचाडो को जब भी अपने देश लौटना हो, उन्हें ऐसा करने का अधिकार है। हालिया प्रयासों के बारे में रुबियो ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।
अमेरिकी प्रशासन वेनेजुएला में राजनीतिक बदलाव की प्रक्रिया के दौरान स्थिरता और संस्थागत पुनर्निर्माण पर जोर देता रहा है। रुबियो के अनुसार, नए चुनाव कराने से पहले देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और न्यायपालिका तथा चुनावी परिषद जैसी संस्थाओं के पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।

रॉयटर्स ने सितंबर में रिपोर्ट किया था कि ट्रंप प्रशासन मचाडो की वापसी को लेकर सतर्क रहा है और अमेरिकी अधिकारियों ने कुछ मौकों पर उन्हें लौटने की योजना टालने की सलाह दी थी।
2024 के चुनाव से जुड़ा विवाद
वेनेजुएला में मौजूदा राजनीतिक संकट की जड़ें 2024 के राष्ट्रपति चुनाव तक जाती हैं। मचाडो को उस चुनाव में उम्मीदवार बनने से रोक दिया गया था। इसके बाद विपक्ष ने उनके स्थान पर एडमंडो गोंजालेज उरुतिया को उम्मीदवार बनाया।
विपक्ष का दावा रहा कि उसके उम्मीदवार ने चुनाव जीता था, जबकि निकोलस मादुरो ने जीत का दावा किया। चुनाव परिणामों को लेकर व्यापक विवाद और विरोध प्रदर्शन हुए। मादुरो सरकार पर विपक्षी नेताओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आरोप लगे, जिसके बाद मचाडो समेत कई विपक्षी नेताओं को भूमिगत होना पड़ा।
मचाडो बाद में देश से बाहर चली गईं। EFE और रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने दिसंबर 2025 में वेनेजुएला से बाहर निकलने के बाद निर्वासन में समय बिताया और इसके बाद लगातार देश लौटने की कोशिश करती रही हैं।
जनवरी में बदली वेनेजुएला की सत्ता
जनवरी 2026 में अमेरिकी सैन्य अभियान के बाद निकोलस मादुरो को सत्ता से हटा दिया गया। इसके बाद डेल्सी रोड्रिगेज ने अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में सरकार संभाली। रोड्रिगेज मादुरो की सहयोगी रही हैं, लेकिन अब उनकी सरकार अमेरिका के साथ भी काम कर रही है।
रोड्रिगेज ने हाल में संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि वेनेजुएला संक्रमण प्रक्रिया के तहत चुनाव कराएगा और देश को पूर्ण लोकतंत्र की दिशा में ले जाया जाएगा। हालांकि, उन्होंने चुनाव की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की।
इस बीच उनकी सरकार ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में विदेशी निवेश के लिए रास्ता खोला है और ट्रंप प्रशासन के साथ संबंधों को आगे बढ़ाया है।
विपक्ष की मांग- जल्द हों राष्ट्रपति चुनाव
विपक्षी प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राजनीतिक संक्रमण को स्पष्ट चुनावी प्रक्रिया में बदलना जरूरी है। EFE के अनुसार, विपक्षी समर्थकों ने मचाडो की सुरक्षित वापसी के साथ 2027 में राष्ट्रपति चुनाव कराने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि मचाडो को स्वतंत्र रूप से राजनीति करने और चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए।
मचाडो की वापसी का मुद्दा अब वेनेजुएला के राजनीतिक संक्रमण का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। एक तरफ अंतरिम सरकार अमेरिका के साथ संबंध सुधारने और संस्थागत बदलाव की बात कर रही है, वहीं विपक्ष देश में स्वतंत्र राजनीतिक गतिविधियों और चुनाव की मांग कर रहा है।
आने वाले समय में चुनाव की तारीख, मचाडो की देश वापसी और विपक्ष की राजनीतिक भागीदारी वेनेजुएला के संक्रमण की दिशा तय करने वाले प्रमुख मुद्दे होंगे। फिलहाल सड़कों पर हुए प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट किया है कि विपक्षी समर्थक लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनाव को लेकर अपनी मांग सार्वजनिक रूप से लगातार उठा रहे हैं।











