व्लादिमीर पुतिन ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की सराहना की, बोले- भरोसे और सम्मान पर टिकी है साझेदारी

व्लादिमीर पुतिन ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की प्रशंसा करते हुए कहा कि रूस-भारत संबंध भरोसे और आपसी सम्मान पर आधारित हैं। जानें उनके बयान की अहम बातें।

रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने एक कार्यक्रम के दौरान भारत की विदेश नीति और स्वतंत्र रुख की सराहना की। पुतिन ने कहा कि भारत ऐसा देश है जिसने अपने इतिहास में कभी भी बाहरी शक्तियों या बड़े देशों के निर्देशों का अंधानुकरण नहीं किया।

World News: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति, तकनीकी क्षमता और वैश्विक भूमिका की सराहना करते हुए कहा है कि भारत हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेने वाला देश रहा है। उन्होंने रूस और भारत के संबंधों को भरोसे, आपसी सम्मान और दीर्घकालिक सहयोग पर आधारित बताते हुए भविष्य में दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की उम्मीद जताई।

पुतिन ने यह टिप्पणी रूस के सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF 2026) के दौरान की, जहां उन्होंने वैश्विक राजनीति, आर्थिक सहयोग और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर अपने विचार साझा किए।

भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना

अपने संबोधन में पुतिन ने कहा कि भारत ने हमेशा अपनी संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता को प्राथमिकता दी है। उनके अनुसार, नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने निर्णय स्वतंत्र रूप से लिए हैं और बाहरी दबावों के बजाय राष्ट्रीय हितों को महत्व दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र का अपने फैसले स्वयं लेने का अधिकार अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है। पुतिन ने भारत के साथ चीन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों ने स्वतंत्र नीति निर्माण की क्षमता का परिचय दिया है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच विभिन्न देशों के रणनीतिक संबंधों पर व्यापक चर्चा हो रही है।

भारत की तकनीकी क्षमता और प्रतिभा की प्रशंसा

रूसी राष्ट्रपति ने भारतीय कार्यबल, विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और डिजिटल क्षेत्र में काम कर रहे पेशेवरों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय विशेषज्ञों ने वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन किया है। पुतिन के अनुसार, भारत की शिक्षा व्यवस्था और तकनीकी क्षमता ने उसे दुनिया की प्रमुख नवाचार और प्रौद्योगिकी अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाया है। 

उन्होंने विशेष रूप से भारतीय आईटी पेशेवरों और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के वैश्विक योगदान की प्रशंसा की। रूस का मानना है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।

रूस-भारत संबंधों को बताया विशेष

पुतिन ने भारत और रूस के रिश्तों को लंबे समय से चले आ रहे भरोसेमंद और मैत्रीपूर्ण संबंधों का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग केवल आर्थिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा, रक्षा, विज्ञान, शिक्षा और प्रौद्योगिकी सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने भारत को रूस का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों ने दशकों से आपसी विश्वास और सम्मान के आधार पर संबंधों को मजबूत किया है।

रूसी राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और विस्तार देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है। पुतिन ने कहा कि वर्तमान व्यापारिक सहयोग को नई परियोजनाओं, निवेश और तकनीकी साझेदारी के माध्यम से और मजबूत किया जा सकता है। ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, कृषि, डिजिटल अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों को भविष्य के सहयोग के प्रमुख स्तंभ बताया गया।

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