हाथरस में करोड़ों रुपये की जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में पूर्व विधायक, पूर्व चेयरमैन और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ कर जमीन की स्थिति बदलने का प्रयास किया गया।
हाथरस: उत्तर प्रदेश के हाथरस में जमीन से जुड़े एक बड़े विवाद ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। पूर्व एमएलसी एवं पूर्व राज्यमंत्री मुकुल उपाध्याय की शिकायत पर करोड़ों रुपये की भूमि से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर जमीन का स्वरूप बदलने और एक पक्ष को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
जमीन विवाद ने पकड़ा कानूनी और राजनीतिक रंग
हाथरस में सामने आए इस मामले की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई जमीन खरीद से जुड़ी बताई जा रही है। शिकायतकर्ता मुकुल उपाध्याय के अनुसार उनकी पत्नी रितु उपाध्याय ने सितंबर 2009 में एक भूमि खरीदी थी, जिसका कब्जा भी उसी समय उन्हें दे दिया गया था। इसके बाद जमीन पर बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया गया और कई वर्षों तक उस पर कृषि गतिविधियां भी होती रहीं।
बाद में भूमि को आवासीय उपयोग के लिए परिवर्तित कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। शिकायत के अनुसार संबंधित राजस्व अधिकारियों ने नियमों के तहत जांच और रिपोर्ट तैयार कर भूमि को अकृषक एवं आवासीय घोषित करने की कार्रवाई पूरी की थी। इस दौरान तैयार किए गए नक्शे और राजस्व दस्तावेजों पर संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर भी मौजूद थे।
हालांकि बाद के वर्षों में इसी जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों ने भूमि से जुड़े दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों में बदलाव कर जमीन की वास्तविक स्थिति और सीमाओं को बदलने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता का दावा है कि इससे करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्ति पर प्रभाव पड़ सकता था।
राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोप
मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020 में कुछ व्यक्तियों द्वारा संबंधित भूमि और उससे जुड़ी अन्य जमीनों के इकरारनामे और बैनामे कराए गए। इसके बाद एक सिविल वाद के दौरान कथित रूप से भूमि का विवरण और नक्शा बदलकर प्रस्तुत किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी जमीन को मुख्य मार्ग से हटाकर दूसरी दिशा में दर्शाने का प्रयास किया गया, जिससे भूमि की स्थिति और मूल्य दोनों प्रभावित हो सकते थे।
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ राजस्व कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से अभिलेखों में छेड़छाड़ की गई। शिकायतकर्ता ने इसे सुनियोजित कूटरचना बताते हुए मुख्यमंत्री, राजस्व परिषद और अन्य उच्च अधिकारियों से शिकायत की थी।
इसके बाद मामले की जांच विभिन्न स्तरों पर कराई गई। जांच के दौरान कुछ दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठे और अधिकारियों ने रिकॉर्ड की विस्तृत समीक्षा की। प्रारंभिक जांच रिपोर्टों में कुछ अभिलेखों के संदिग्ध होने की संभावना भी व्यक्त की गई।
जांच रिपोर्ट के बाद दर्ज हुआ मुकदमा
शिकायत के आधार पर राजस्व परिषद ने मामले की जांच कराई। बाद में अलीगढ़ मंडल स्तर पर भी रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें कुछ दस्तावेजों के फर्जी होने की संभावना जताई गई। इसके बाद राजस्व परिषद ने जिलाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी द्वारा गठित त्रिसदस्यीय समिति ने भी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में राजकीय अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ की आशंका व्यक्त की। समिति ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका तय करने की आवश्यकता बताई।
इसी आधार पर पुलिस ने पूर्व विधायक, पूर्व नगरपालिका चेयरमैन, अन्य नामजद व्यक्तियों तथा कुछ राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस संबंधित दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड तथा अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामला करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि और राजस्व अभिलेखों से जुड़ा होने के कारण प्रशासन भी इसे गंभीरता से देख रहा है।











