वोटर सरकार चुनता था, अब सरकार वोटर चुनती है: अभिजीत दीपके ने CJP के भविष्य पर बताई रणनीति

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि संगठन को फिलहाल राजनीतिक पार्टी नहीं बनाया जाएगा। सितंबर से ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान के जरिए देशभर में जनता से संवाद होगा।

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि संगठन फिलहाल राजनीतिक पार्टी नहीं बनेगा। सितंबर से ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान शुरू कर जनता की समस्याएं सुनी जाएंगी। उन्होंने मतदाता सूची, लोकतंत्र, युवाओं की भूमिका और सरकार की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए।

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पिछले कुछ महीनों से अपने आंदोलनों और सरकार से जुड़े मुद्दों पर मुखर रुख के कारण चर्चा में हैं। जंतर-मंतर पर आंदोलन के बाद अब वह संगठन की आगे की रणनीति, कोर कमेटी के विस्तार और देशव्यापी जनसंपर्क अभियान की तैयारी में जुटे हैं। एक विशेष बातचीत में दीपके ने स्पष्ट किया कि फिलहाल CJP को राजनीतिक पार्टी में बदलने की कोई योजना नहीं है। उनका कहना है कि लोकतंत्र केवल चुनाव और राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जनता, सिविल सोसायटी, मीडिया, न्यायपालिका और दबाव समूहों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

फिलहाल राजनीतिक पार्टी नहीं बनेगा CJP

अभिजीत दीपके के अनुसार, CJP को राजनीतिक पार्टी बनाने के मुद्दे पर कोर कमेटी में चर्चा जरूर हुई है, लेकिन अभी संगठन को चुनावी राजनीति में उतारना जल्दबाजी होगी। उनका तर्क है कि देश में पहले से मौजूद कई बड़ी राजनीतिक पार्टियां भी अपने अस्तित्व और राजनीतिक प्रभाव को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

दीपके का कहना है कि लोकतंत्र को केवल चुनाव लड़ने और सरकार बनाने की प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, जनता की सक्रिय भागीदारी, नागरिक संगठन, मीडिया, न्यायपालिका और विभिन्न दबाव समूह भी लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी सोच के तहत CJP फिलहाल जन आंदोलनों और जनता से सीधे संवाद पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है।

राजनीतिक दलों से दूरी बनाए रखने का दावा

जब दीपके से पूछा गया कि क्या किसी राजनीतिक दल ने CJP को अपने साथ जोड़ने या संगठन को समर्थन देने का प्रस्ताव दिया है, तो उन्होंने इससे इनकार किया। उनका कहना है कि विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोग आंदोलन की सफलता पर उन्हें बधाई देने पहुंचे हैं, लेकिन किसी पार्टी की ओर से संगठन में शामिल होने का औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि वह इस बात का सम्मान करते हैं कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के लोगों ने CJP के आंदोलन की स्वतंत्र पहचान को समझा है। दीपके के मुताबिक, संगठन की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उसका राजनीतिक दलों से स्वतंत्र रहना जरूरी है।

कांग्रेस और राहुल गांधी को लेकर क्या बोले दीपके?

कांग्रेस से संपर्क को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपके ने बताया कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा उनसे मिले थे। उनके अनुसार, खेड़ा ने कहा था कि वह कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से आंदोलन के मुद्दों को समझने और समर्थन जताने के लिए आए हैं।

दीपके ने कहा कि उनकी राहुल गांधी से अभी बातचीत नहीं हुई है। हालांकि, अगर भविष्य में मुलाकात का अवसर मिलता है तो वह उनसे मिलने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भाजपा से जुड़े लोग उनसे मिलना चाहते हैं तो वह उनसे भी बातचीत के लिए तैयार हैं।

उनका कहना है कि किसी राजनीतिक दल के नेता से मुलाकात का अर्थ राजनीतिक गठबंधन या समर्थन नहीं माना जाना चाहिए। CJP अपने मुद्दों और आंदोलन की स्वतंत्रता को बनाए रखना चाहता है।

'केजरीवाल पार्ट-2' कहे जाने पर दिया जवाब

दीपके को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की तुलना की जा रही है। कुछ लोग उन्हें आम आदमी पार्टी के शुरुआती दौर से जोड़ते हैं, जबकि कुछ लोग उनके आंदोलन को आरएसएस या भाजपा के नजरिए से देखते हैं।

इस पर दीपके ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि कुछ लोग उन्हें आम आदमी पार्टी से जोड़ते हैं और कुछ आरएसएस-भाजपा से। उन्होंने कहा कि आलोचकों को पहले यह तय करना चाहिए कि उन्हें किसकी बी-टीम बताया जाए।

दीपके का कहना है कि उनका संगठन किसी राजनीतिक दल की विचारधारा या रणनीति के तहत काम नहीं कर रहा है। उनका जोर जनता के मुद्दों को उठाने और सरकार से जवाबदेही मांगने पर है।

कोर कमेटी में दोस्तों को शामिल करने के आरोप पर सफाई

CJP की कोर कमेटी में कुछ लोगों को शामिल किए जाने को लेकर भी सवाल उठे हैं। आरोप लगाए गए कि दीपके ने अपने करीबी लोगों या दोस्तों को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं।

इन आरोपों को खारिज करते हुए दीपके ने कहा कि कोर कमेटी में ऐसे लोगों को जगह दी गई है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में काम किया है। उन्होंने बताया कि टीम में कानूनी मामलों और पत्रकारिता से जुड़े लोग, पेपर लीक के मुद्दे पर काम करने वाले लोग, नीति और बजट से जुड़े लोग तथा किसान आंदोलन में सक्रिय रहे लोग शामिल हैं।

दीपके ने कहा कि इनमें से कई लोगों को वह पहले से व्यक्तिगत रूप से जानते तक नहीं थे। उन्होंने तर्क दिया कि अगर उन्हें केवल दोस्तों को पद देना होता तो वह अपने स्कूल और बचपन के दोस्तों को भी टीम में शामिल कर सकते थे।

अहंकार के आरोपों पर भी दिया जवाब

दीपके पर यह आरोप भी लगा कि आंदोलन के बाद उनके व्यवहार में अहंकार आ गया है। उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि उनके खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोगों से भी उनकी टीम ने बातचीत की है।

उनके अनुसार, टीम के सदस्यों ने विरोध कर रहे लोगों के साथ कई घंटे चर्चा की। उनकी मांग थी कि उन्हें भी कोर कमेटी में शामिल किया जाए, लेकिन संगठन में हर व्यक्ति को शीर्ष टीम का हिस्सा बनाना संभव नहीं है।

दीपके ने कहा कि भविष्य में संगठन का विस्तार होने पर अधिक लोगों को जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति को दबाव या मजबूरी में कोर कमेटी में शामिल नहीं किया जाएगा।

वोटर लिस्ट और चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल

चुनाव प्रक्रिया और ईवीएम को लेकर दीपके ने कहा कि उनका मानना है कि 2024 के आम चुनाव के बाद मतदाता सूची से जुड़े सवाल गंभीर हुए हैं। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि पहले मतदाता सरकार चुनता था, लेकिन अब उन्हें लगता है कि सरकार यह तय करने की स्थिति में आ रही है कि मतदाता कौन होगा।

उन्होंने पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर मतदाता सूची से जुड़े विवाद का उल्लेख किया और दावा किया कि बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं को लेकर सवाल उठे हैं। दीपके के अनुसार, लोकतंत्र के लिए समस्या केवल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।

हालांकि, चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े ऐसे दावों को संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और चुनावी संस्थाओं के स्पष्टीकरण के संदर्भ में देखना जरूरी है।

सितंबर से 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान

CJP की भविष्य की योजनाओं में सबसे प्रमुख 'क्या बोलती पब्लिक' कार्यक्रम है। दीपके के मुताबिक, सितंबर से संगठन देश के अलग-अलग राज्यों में जाकर लोगों से सीधे बातचीत करेगा।

इस अभियान के तहत स्थानीय लोगों की समस्याओं, उनकी प्राथमिकताओं और सरकार से अपेक्षाओं को समझने की कोशिश की जाएगी। दीपके का कहना है कि इन बातचीत से सामने आने वाले मुद्दों को एकत्र कर एक मॉडल एजेंडा तैयार किया जाएगा।

उनके अनुसार, यह एजेंडा जनता की वास्तविक समस्याओं पर आधारित होगा और इसमें रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे तथा अन्य सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को प्राथमिकता दी जा सकती है।

धर्म की राजनीति के बजाय विकास पर जोर

धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति पर दीपके ने कहा कि देश के राजनीतिक विमर्श का केंद्र बदलने की जरूरत है। उनका मानना है कि चुनावों में धर्म आधारित बयानबाजी के बजाय राजनीतिक दलों से शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को लेकर स्पष्ट योजनाओं पर सवाल होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नेताओं को यह बताना चाहिए कि सत्ता में आने के बाद वे देश के लिए क्या करेंगे। AI और तकनीकी बदलावों का जिक्र करते हुए दीपके ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कुछ नौकरियों पर असर पड़ सकता है, लेकिन इससे नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

भारत में रहकर CJP को पूरा समय देने की बात

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भविष्य में अमेरिका लौटेंगे, तो दीपके ने कहा कि वह भारत में ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह फिलहाल पूरा समय भारत में रहकर CJP के काम को आगे बढ़ाएंगे।

उन्होंने युवा आंदोलन की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। दीपके के अनुसार, आंदोलन की सबसे बड़ी सफलता किसी व्यक्ति का इस्तीफा नहीं, बल्कि युवाओं का डर खत्म होना है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में नागरिकों को सरकार से सवाल पूछने और जवाबदेही मांगने से डरना नहीं चाहिए।

समर्थकों से कहा- किसी व्यक्ति को हीरो न बनाएं

अपने समर्थकों के लिए दीपके ने खास संदेश देते हुए कहा कि आंदोलन को सफल बनाने में जनता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों का समर्थन करने के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन साथ ही कहा कि किसी व्यक्ति को रातों-रात हीरो नहीं बनाया जाना चाहिए।

दीपके का कहना है कि लोकतंत्र में किसी एक व्यक्ति को देश, संविधान या लोकतांत्रिक संस्थाओं से बड़ा नहीं बनाया जा सकता। उनके मुताबिक, किसी आंदोलन की असली ताकत व्यक्ति नहीं बल्कि जनता की भागीदारी और संस्थागत जवाबदेही है।

सरकार ने वादे पूरे नहीं किए तो फिर आंदोलन

सरकार द्वारा कथित तौर पर वादों से पीछे हटने की स्थिति में अगले कदम को लेकर दीपके ने कहा कि CJP फिर से आंदोलन का रास्ता अपना सकता है। उन्होंने कहा कि सरकारों को यह नहीं मानना चाहिए कि छात्रों और युवाओं का गुस्सा खत्म हो गया है।

उनके मुताबिक, यदि मूल समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो युवा दोबारा सड़कों पर उतर सकते हैं। फिलहाल संगठन का लक्ष्य आंदोलन के साथ-साथ देशभर में जनता से संवाद बढ़ाना है।

16 साल की उम्र में वोटिंग का मुद्दा फिलहाल एजेंडे में नहीं

मतदान की उम्र 18 से घटाकर 16 वर्ष करने के सवाल पर दीपके ने स्पष्ट किया कि फिलहाल CJP के एजेंडे में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन अभी इस विषय पर विचार नहीं कर रहा है।

विदेश नीति पर उन्होंने कहा कि भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए। अमेरिका के साथ व्यापार और टैरिफ संबंधी बातचीत तथा रूस से तेल खरीदने के मुद्दे का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अपने हितों के लिए भारत पर दबाव डालता रहा है।

मीडिया को लेकर भी उठाए सवाल

दीपके ने भारतीय मीडिया के एक बड़े हिस्से की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि अधिकांश मीडिया संस्थानों ने अपना-अपना प्रोपेगंडा तय कर रखा है। उनके मुताबिक, स्वतंत्र पत्रकारिता और निष्पक्ष सूचना लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी हैं।

CJP अब खुद को राजनीतिक पार्टी बनाने के बजाय जन आंदोलन और नागरिक भागीदारी के मंच के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सितंबर से प्रस्तावित 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान के जरिए संगठन जनता की समस्याओं को सीधे सुनने और उन्हें एक व्यापक एजेंडे में बदलने की कोशिश करेगा। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CJP अपने आंदोलन को कितने राज्यों तक पहुंचा पाता है और उसकी राजनीतिक स्वतंत्रता को लेकर किए गए दावे व्यवहार में कितने प्रभावी साबित होते हैं।

Leave a comment