ग्वालियर हाईकोर्ट ने माइनिंग अफसर से पूछा, ₹51 हजार सैलरी में बेटे की ₹9 लाख फीस कैसे?

ग्वालियर हाईकोर्ट ने माइनिंग अधिकारी से ₹51 हजार सैलरी और बेटे की ₹9 लाख सालाना फीस पर सवाल किया। कोर्ट ने अवैध खनन पर प्रशासन से जवाब मांगा।

ग्वालियर में अवैध खनन मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रभारी खनिज अधिकारी की ₹51 हजार मासिक सैलरी और बेटे की ₹9 लाख सालाना स्कूल फीस पर सवाल उठाया। कोर्ट ने खनन व्यवस्था को लेकर प्रशासन से भी जवाब मांगा।

ग्वालियर: बिलौआ में अवैध खनन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासन और खनिज विभाग के कामकाज पर कड़े सवाल उठाए। कोर्ट ने प्रभारी खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा से उनकी सैलरी और बेटे की स्कूल फीस के बीच अंतर को लेकर सवाल किया। साथ ही अवैध खनन रोकने और खनिज की निगरानी व्यवस्था पर कलेक्टर से जवाब मांगा।

बिलौआ में अवैध खनन को लेकर हाईकोर्ट ने प्रशासन से मांगा जवाब

ग्वालियर के बिलौआ क्षेत्र में अवैध खनन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए। कोर्ट के सामने खनन क्षेत्र से जुड़े ड्रोन वीडियो भी रखे गए, जिनसे क्षेत्र में अवैध गतिविधियों को लेकर प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े हुए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान से पूछा कि खदानों से निकलने वाले ट्रक और डंपर की निगरानी के लिए रास्तों पर क्या व्यवस्था है। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि खदानों से बाहर जाने वाले खनिज की मात्रा का रिकॉर्ड किस तरह रखा जाता है और उसकी जांच के लिए मौके पर पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं है।

कलेक्टर से खनन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल

सुनवाई के दौरान कलेक्टर मामले से जुड़े कुछ सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे सकीं। इस पर कोर्ट ने उन्हें अगली सुनवाई तक पूरे मामले की जानकारी जुटाने और सटीक जवाब देने के निर्देश दिए। कोर्ट ने खनन पट्टे और उससे निकाले जाने वाले खनिज की मात्रा को लेकर भी सवाल किया।

अदालत ने उदाहरण देते हुए पूछा कि अगर किसी व्यक्ति को किसी खदान की 10 साल की लीज मिली है और वह सिर्फ एक साल में ही पूरा खनिज निकाल लेता है, तो बाकी अवधि में क्या किया जाएगा। कोर्ट की टिप्पणी का मकसद खनन की निगरानी और लीज की शर्तों के पालन की व्यवस्था को लेकर प्रशासन से जवाब लेना था।

कोर्ट ने कलेक्टर को मामले से संबंधित ड्रोन वीडियो देखने के लिए भी कहा, ताकि मौके की वास्तविक स्थिति और प्रशासन की रिपोर्ट के बीच अंतर को समझा जा सके।

माइनिंग अधिकारी से सैलरी और बेटे की फीस पर सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रभारी खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा से भी सीधे सवाल किए। अदालत ने उनके बेटे की स्कूल फीस के बारे में जानकारी मांगी। अधिकारी ने बताया कि उनके बेटे की सिंधिया स्कूल की सालाना फीस करीब ₹9 लाख है।

इसके बाद कोर्ट ने अधिकारी से उनकी सैलरी के बारे में पूछा। जवाब में उन्होंने बताया कि उनकी मासिक सैलरी करीब ₹51 हजार है। इस पर अदालत ने दोनों रकम के बीच अंतर को लेकर सवाल उठाया और जानना चाहा कि इतनी फीस का भुगतान किस तरह किया जाता है।

सवाल किए जाने पर माइनिंग अधिकारी ने बताया कि उनके बेटे की पढ़ाई का खर्च उनकी पत्नी के मामा उठाते हैं। कोर्ट ने इस जवाब पर भी सवाल किए और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जानकारी ली।

ईमानदार और सक्षम माइनिंग अधिकारी की पोस्टिंग के निर्देश

ग्वालियर के खनिज विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर अदालत पहले भी सवाल उठा चुकी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जिले में तत्काल एक ईमानदार और सक्षम खनिज अधिकारी की पोस्टिंग की जाए। जब तक ऐसा अधिकारी नियुक्त नहीं होता, तब तक खनिज विभाग की जिम्मेदारी कलेक्टर को संभालने के निर्देश दिए गए।

अदालत की इस कार्रवाई से साफ है कि बिलौआ क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही पर कोर्ट गंभीर है। अब प्रशासन को अगली सुनवाई में खनन की निगरानी, खनिज की मात्रा के रिकॉर्ड और अवैध गतिविधियों को रोकने की व्यवस्था से जुड़े सवालों के स्पष्ट जवाब देने होंगे।

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