पश्चिम बंगाल सरकार ने 14 श्रेणियों के कर्मचारियों और संविदाकर्मियों के पारिश्रमिक में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इस फैसले से एक लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा और राज्य पर सालाना 390 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने कर्मचारियों और संविदा आधार पर काम करने वाले कर्मियों के पारिश्रमिक में बढ़ोतरी का फैसला किया है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 14 श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए पारिश्रमिक बढ़ाने को मंजूरी दी गई। सरकार के मुताबिक, इस निर्णय से एक लाख से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को कोलकाता में मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मीडिया को फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन कर्मचारियों की पारिश्रमिक बढ़ोतरी को 2026-27 के राज्य बजट में शामिल नहीं किया गया था। अब सरकार ने उनकी मांगों और कार्य की प्रकृति को देखते हुए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान करने का निर्णय लिया है।
सरकार पर सालाना ₹390 करोड़ का अतिरिक्त खर्च
मुख्यमंत्री ने बताया कि 14 श्रेणियों के कर्मचारियों और संविदाकर्मियों के पारिश्रमिक में संशोधन से राज्य सरकार पर हर साल करीब 390 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। इस फैसले से एक लाख से अधिक कर्मचारियों और संबंधित कर्मियों को सीधा लाभ मिलने की बात कही गई है।
सरकार के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से पारिश्रमिक बढ़ाने की मांग की जा रही थी। मंत्रिमंडल ने इन मांगों को उचित मानते हुए बढ़ोतरी का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और उनकी मांगों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला कर रही है। पारिश्रमिक वृद्धि अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग-अलग प्रभावी तारीखों से लागू होगी।
वन विभाग के कर्मचारियों का बढ़ा पारिश्रमिक
सरकार के फैसले के तहत वन विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को भी राहत दी गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, डिप्टी रेंजर से लेकर वन रक्षकों तक वन विभाग के कर्मचारियों के पारिश्रमिक में 5,000 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
यह वृद्धि 1 अक्टूबर से प्रभावी होगी। सरकार के इस फैसले से वन विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों की आय में सीधा इजाफा होगा।
मुख्यमंत्री ने वन स्वयंसेवकों के लिए भी पारिश्रमिक बढ़ाने की घोषणा की। राज्य में करीब 1,500 वन स्वयंसेवकों के मानदेय में हर महीने 2,000 रुपये की बढ़ोतरी की जाएगी।
वन विभाग से जुड़े कर्मचारियों और स्वयंसेवकों के लिए यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में वन संरक्षण और जमीनी स्तर पर वन प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों में कर्मचारियों और स्वयंसेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।
पूर्व विधायकों के मेडिकल भत्ते में भी बढ़ोतरी
कैबिनेट के फैसलों में पूर्व विधायकों के मेडिकल भत्ते में संशोधन भी शामिल है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पूर्व विधायकों को मिलने वाला चिकित्सा भत्ता 6,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है।
यह बढ़ोतरी 1 अगस्त से प्रभावी होगी। इस फैसले के तहत पूर्व विधायकों को पहले की तुलना में 4,000 रुपये अधिक चिकित्सा भत्ता मिलेगा।
सरकार ने इसे पूर्व विधायकों से जुड़े कल्याणकारी प्रावधानों में संशोधन के रूप में पेश किया है।
विधायकों को नेेताजी सेवा केंद्र के लिए ₹30,000
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के वे विधायक जिन्होंने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में ‘नेताजी सेवा केंद्र’ शुरू किए हैं, उन्हें इनके संचालन के लिए हर महीने 30,000 रुपये मिलेंगे।
इन सार्वजनिक सेवा केंद्रों का नाम स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रीय नेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर रखा गया है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में विधायकों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में ऐसे सार्वजनिक सेवा केंद्र स्थापित करने का निर्देश दिया था।
इन केंद्रों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर लोगों तक सार्वजनिक सेवाओं और सहायता से जुड़े कार्यों को पहुंचाने में मदद करना है। केंद्रों के संचालन के लिए मिलने वाली राशि का उपयोग संबंधित गतिविधियों के प्रबंधन में किया जाएगा।
पैरा टीचर्स और शिक्षा बंधुओं को भी लाभ
राज्य सरकार ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर कार्यरत पैरा शिक्षकों और ‘शिक्षा बंधुओं’ के लिए भी पारिश्रमिक बढ़ाने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, कुल 20,343 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल स्तर के पैरा शिक्षकों तथा ‘शिक्षा बंधुओं’ के मासिक पारिश्रमिक में 5,000 रुपये की बढ़ोतरी की जाएगी। यह वृद्धि 1 नवंबर से प्रभावी होगी।
शिक्षा क्षेत्र में संविदा या वैकल्पिक व्यवस्था के तहत काम करने वाले इन कर्मियों के लिए यह वृद्धि महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों और उनकी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए पारिश्रमिक में यह संशोधन किया गया है।
विश्वविद्यालय कर्मचारियों के तबादले के लिए विधेयक
कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों के पारिश्रमिक से अलग एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर भी जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विश्वविद्यालयों के शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बीच अंतर-विश्वविद्यालय तबादले की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एक विधेयक विधानसभा में पेश करेगी।
यह विधेयक 10 सितंबर को होने वाले विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में पेश किया जाएगा। प्रस्ताव का उद्देश्य राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में तबादले की व्यवस्था को सुविधाजनक बनाना है।
हालांकि, तबादले की विस्तृत प्रक्रिया और पात्रता से जुड़े प्रावधानों की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
अलग-अलग तारीखों से लागू होंगे फैसले
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से घोषित विभिन्न पारिश्रमिक और भत्ता बढ़ोतरी अलग-अलग तारीखों से प्रभावी होगी। वन विभाग के कर्मचारियों के लिए 5,000 रुपये की वृद्धि 1 अक्टूबर से लागू होगी, जबकि वन स्वयंसेवकों के मानदेय में 2,000 रुपये की वृद्धि की जाएगी।
पूर्व विधायकों का चिकित्सा भत्ता 1 अगस्त से बढ़कर 10,000 रुपये होगा। वहीं, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के 20,343 पैरा शिक्षकों तथा ‘शिक्षा बंधुओं’ के पारिश्रमिक में 5,000 रुपये की वृद्धि 1 नवंबर से प्रभावी होगी।
सरकार पर बढ़ेगा वित्तीय दबाव
एक लाख से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाने वाला यह फैसला राज्य सरकार के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रतिबद्धता भी लेकर आया है। सरकार के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों के पारिश्रमिक में बढ़ोतरी के कारण हर साल करीब 390 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च होगा।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब राज्य सरकार को कर्मचारियों और संविदाकर्मियों की मांगों के साथ-साथ सार्वजनिक खर्च और राजस्व के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का भी सामना करना पड़ता है।
कर्मचारियों और शिक्षा क्षेत्र पर असर
14 श्रेणियों के कर्मचारियों के पारिश्रमिक में संशोधन से सरकारी विभागों और विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े कर्मियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। वन विभाग के कर्मचारियों और स्वयंसेवकों के साथ-साथ स्कूल स्तर पर काम कर रहे पैरा शिक्षकों और ‘शिक्षा बंधुओं’ को भी इसका लाभ मिलेगा।
दूसरी ओर, अंतर-विश्वविद्यालय तबादले से संबंधित प्रस्तावित विधेयक विश्वविद्यालयों के शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सेवा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। 10 सितंबर के विशेष विधानसभा सत्र में विधेयक पेश होने के बाद इसके प्रावधानों की विस्तृत तस्वीर सामने आएगी।
पश्चिम बंगाल कैबिनेट के इन फैसलों में कर्मचारियों के पारिश्रमिक संशोधन, पूर्व विधायकों के चिकित्सा भत्ते और विधायकों के नेताजी सेवा केंद्रों के संचालन के लिए वित्तीय सहायता के साथ विश्वविद्यालय कर्मचारियों के तबादले की प्रस्तावित व्यवस्था शामिल है। सरकार के मुताबिक, पारिश्रमिक बढ़ोतरी का सबसे बड़ा लाभ एक लाख से अधिक लोगों को मिलेगा।










