पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर विवाद जारी है। जमीयत उलेमा हिंद और मुस्लिम संगठनों ने कोलकाता में रैली निकालकर मतदाता सूची से जुड़े मामलों के लिए जिला स्तर पर ट्रिब्यूनल और समयबद्ध निपटारे की मांग की। सुप्रीम कोर्ट मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को करेगा।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विवाद विधानसभा चुनाव के बाद भी जारी है। मंगलवार को जमीयत उलेमा हिंद के नेताओं और विभिन्न मुस्लिम संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कोलकाता की सड़कों पर रैली निकालकर मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और नाम दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। संगठन ने चुनाव आयोग से प्रत्येक जिले में ट्रिब्यूनल की व्यवस्था करने और मतदाता सूची से जुड़े विवादों का समयबद्ध तरीके से निपटारा करने की मांग की।
रैली के दौरान पश्चिम बंगाल जमीयत उलेमा हिंद के अध्यक्ष सिद्दीकुल्ला चौधरी ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम सूची से हट गए हैं, वे उन्हें दोबारा जुड़वाने के लिए ट्रिब्यूनल के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कई मामलों में उन्हें समय पर राहत नहीं मिल रही है।
हालांकि, मतदाता सूची में नामों को लेकर उठाए गए आरोपों और दावों पर अंतिम स्थिति संबंधित चुनावी रिकॉर्ड तथा निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के आधार पर स्पष्ट होगी।
राजाबाजार से मौलाली तक निकली रैली
जमीयत उलेमा हिंद और अन्य संगठनों की रैली को लेकर पहले ही कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई थी। कलकत्ता हाई कोर्ट ने सोमवार को संगठन को निर्धारित शर्तों के साथ प्रदर्शन की अनुमति दी थी।
अदालत की अनुमति के अनुसार रैली मंगलवार को सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच राजाबाजार से मौलाली इलाके तक निकाली जानी थी। रैली में अधिकतम 750 लोगों के शामिल होने की सीमा तय की गई थी।
अदालत ने प्रदर्शन के दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई थी। आयोजकों को केवल हाथ में पकड़े जाने वाले माइक के इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी। अदालत की इन शर्तों का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और आम लोगों की आवाजाही को प्रभावित होने से रोकना था।
सिद्दीकुल्ला चौधरी ने उठाई ट्रिब्यूनल की मांग
रैली को संबोधित करते हुए सिद्दीकुल्ला चौधरी ने कहा कि मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटे हैं, उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने और नाम वापस जुड़वाने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था मिलनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि पश्चिम बंगाल के प्रत्येक जिले में SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल का कार्यालय होना चाहिए। उनके मुताबिक, लोगों को एक जिले से दूसरे जिले या दूर-दराज के कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि मतदाता सूची से जुड़े विवादों का निपटारा तय समय सीमा के भीतर किया जाए। उनका कहना था कि यदि चुनाव आयोग इन मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं करता है तो इस मुद्दे को लेकर विरोध आगे भी जारी रह सकता है।
SIR को लेकर क्यों है विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विस्तृत समीक्षा की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, पात्र मतदाताओं का रिकॉर्ड सुनिश्चित करना और अपात्र या गलत प्रविष्टियों की पहचान करना होता है।
लेकिन पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद सामने आया है। विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने आशंका जताई है कि प्रक्रिया के दौरान वास्तविक मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं।
दूसरी ओर, निर्वाचन प्रक्रिया में मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। SIR को लेकर विभिन्न दावों और आपत्तियों का निपटारा निर्धारित कानूनी और चुनावी प्रक्रिया के तहत किया जाना है।
इसी वजह से मतदाता सूची में नाम हटने या नाम शामिल न होने से जुड़े विवादों को लेकर ट्रिब्यूनल और अदालतों में मामले पहुंच रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा SIR का मामला
पश्चिम बंगाल में SIR से संबंधित विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दे को लेकर शीर्ष अदालत का रुख किया है।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से इस प्रक्रिया और ट्रिब्यूनल से जुड़े मामलों की स्थिति पर विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि संबंधित ट्रिब्यूनल ने अब तक कितने मामलों का निपटारा किया है और लंबित मामलों के समाधान की गति बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि SIR से जुड़े विवाद अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि न्यायिक समीक्षा का हिस्सा भी बन चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं, ने मामले पर सुनवाई की।
अदालत ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए उससे विस्तृत जानकारी मांगी है। विशेष रूप से ट्रिब्यूनल में लंबित मामलों और उनके निपटारे की स्थिति को लेकर जानकारी मांगी गई है।
अदालत ने यह भी जानने की कोशिश की है कि मतदाता सूची से जुड़े विवादों के समाधान में तेजी लाने के लिए निर्वाचन आयोग ने क्या व्यवस्था की है।
मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को निर्धारित की गई है। इससे पहले चुनाव आयोग को अदालत के समक्ष अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।
अधीर रंजन चौधरी को न्याय की उम्मीद
SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख सामने आने के बाद अधीर रंजन चौधरी ने न्याय मिलने की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि अदालत के हस्तक्षेप से उन लोगों के लिए रास्ता खुल सकता है जो मतदाता सूची से संबंधित विवादों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
हालांकि, अदालत की ओर से अभी मामले के अंतिम गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं दिया गया है। फिलहाल चुनाव आयोग से जवाब मांगा गया है और अगली सुनवाई में मामले की स्थिति पर आगे चर्चा होगी।
राजनीतिक दलों के बीच भी बढ़ सकता है तनाव
पश्चिम बंगाल में SIR पहले से ही राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। मतदाता सूची में नामों को लेकर उठे सवालों ने सत्तापक्ष, विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप को बढ़ाया है।
जमीयत उलेमा हिंद की रैली के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। संगठन का कहना है कि मतदाता सूची में नाम से जुड़े मामलों में आम लोगों को आसानी से न्याय मिलना चाहिए।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग की भूमिका इस प्रक्रिया को नियमों के अनुसार पूरा करने और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर 25 अगस्त को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। चुनाव आयोग के जवाब से यह स्पष्ट हो सकता है कि SIR से संबंधित मामलों में अब तक कितने विवाद सामने आए हैं, कितने मामलों का निपटारा हुआ है और लंबित मामलों को तेजी से सुलझाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
इधर, पश्चिम बंगाल में जमीयत उलेमा हिंद और अन्य संगठनों की ओर से मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी गई है।
SIR को लेकर चल रहा विवाद आने वाले दिनों में कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना रह सकता है। फिलहाल रैली, अदालत की कार्यवाही और चुनाव आयोग से मांगे गए जवाब ने इस मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।












