चंडीगढ़ के मास्टर प्लान 2031 समेत कई प्रस्तावों पर अमित शाह की अध्यक्षता में आज बैठक

चंडीगढ़ के मास्टर प्लान-2031 में संशोधन, लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने, पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटियों को मालिकाना हक और मेयर का कार्यकाल ढाई वर्ष करने के प्रस्तावों पर आज दिल्ली में बैठक होगी।

चंडीगढ़ के विकास और प्रशासन से जुड़े कई प्रस्तावों पर आज दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बैठक होगी। बैठक में मास्टर प्लान-2031 में संशोधन, लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने, पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटियों को स्थायी मालिकाना हक देने और मेयर का कार्यकाल एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष करने पर चर्चा होगी।

प्रशासन ने मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित संशोधनों का ड्राफ्ट अधिसूचित कर लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित बदलावों में चिन्हित परिधीय और फेज-3 क्षेत्रों में एफएआर बढ़ाकर 3.0 करने का प्रावधान है। चयनित बाहरी सेक्टरों, फेज-3 और औद्योगिक क्षेत्रों में 30 मीटर तक ऊंची इमारतों को मंजूरी देने का भी प्रस्ताव है।

औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और फेज-2 में बड़े प्लाटों को विभाजित करने तथा फेज-1 से बाहर स्कूल-कॉलेज और सांस्कृतिक संस्थानों के लिए एफएआर और ऊंचाई सीमा में बदलाव का प्रस्ताव है। चिन्हित क्षेत्रों में हाईराइज और मिश्रित भू-उपयोग के जरिए आवासीय जरूरतों को पूरा करने की योजना है।

गृह मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित संशोधनों को हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत मास्टर प्लान में बदलाव की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

चंडीगढ़ के मास्टर प्लान 2031 समेत कई प्रस्तावों पर अमित शाह की अध्यक्षता में आज बैठक

बैठक में व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड करने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इससे शहर में करोड़ों रुपये की संपत्तियां अनलॉक हो सकती हैं। इससे संपत्ति मालिकों को राहत मिलने के साथ प्रशासन का राजस्व बढ़ने और कारोबार को आसान बनाने की उम्मीद है।

यूटी प्रशासन ने मई में इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर गृह मंत्रालय को भेजा था। अब इस पर गृह मंत्रालय की ओर से आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।

पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटियों को स्थायी मालिकाना हक देने का प्रस्ताव भी लंबे समय से लंबित है। प्रशासन ने इस संबंध में गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है। मंजूरी मिलने पर हजारों परिवारों की संपत्तियों से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

मेयर का कार्यकाल एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष करने के प्रस्ताव पर भी बैठक में चर्चा होगी। नगर निगम के मौजूदा सदन का कार्यकाल समाप्त होने की ओर है और आने वाले महीनों में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। ऐसे में मेयर के कार्यकाल में बदलाव का असर नगर निगम के कामकाज और आगामी राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

यूटी प्रशासन की ओर से गृह सचिव रामनदीप बराड़, मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद, वित्त सचिव दीपर्वा लाकरा और उपायुक्त निशांत कुमार यादव के बैठक में शामिल होने की संभावना है। अधिकारी प्रस्तावों पर प्रस्तुति देंगे। सैद्धांतिक मंजूरी के साथ बैठक में प्रस्तावों में बदलाव या नए सुझाव भी दिए जा सकते हैं।

 

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