स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई है, जिसमें शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट ने दावा किया है कि बुकमाईशो ने कुणाल कामरा को अपनी प्लेटफॉर्म की कलाकारों की सूची से हटा दिया है।
कुणाल कामरा विवाद: शिवसेना ने शनिवार को दावा किया कि बुकमाईशो (BookMyShow) ने स्टैंड-अप कॉमेडियन (stand-up comedian) कुणाल कामरा को अपने प्लेटफॉर्म और कलाकारों की सूची से हटा दिया है। यह दावा पार्टी के पदाधिकारी राहुल कनाल ने किया, जो वही राहुल कनाल हैं, जिन्हें हैबिटेट स्टूडियो में तोड़फोड़ करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। यही वह हैबिटेट स्टूडियो है, जहां कुणाल कामरा का शो शूट हुआ था।
बुकमाईशो की कार्रवाई पर कुणाल कामरा
शिवसेना के सोशल मीडिया प्रभारी राहुल कनाल ने शनिवार को इस बात का ऐलान किया और बुकमाईशो के सीईओ आशीष हेमराजानी का धन्यवाद किया। कनाल ने कहा कि बुकमाईशो ने प्लेटफॉर्म पर ऐसे कलाकारों को हटाकर मनोरंजन की शुद्धता को बनाए रखने का काम किया। उन्होंने आशीष हेमराजानी का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस कदम से कंपनी ने शांति बनाए रखने और सार्वजनिक भावनाओं का सम्मान किया है।
विवाद और कानूनी परिणाम
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कुणाल कामरा ने एक कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Maharashtra's Deputy Chief Minister) के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। कामरा ने अपने शो में एक पैरोडी गाई, जिसमें शिंदे और शिवसेना में विभाजन पर कटाक्ष किया गया था। इसके बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं ने उस स्टूडियो में तोड़फोड़ की जहां कामरा का शो शूट किया गया था।
मुंबई पुलिस ने इस मामले में तीन समन जारी किए थे, लेकिन कामरा ने एक भी समन का पालन नहीं किया। तीसरी बार, 5 अप्रैल को जारी समन पर भी कामरा पुलिस के सामने पेश नहीं हुए। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बयान देने की मांग की थी, जिसे पुलिस ने खारिज कर दिया।
पुलिस कार्रवाई और कानूनी अपडेट
कामरा, जो वर्तमान में पुडुचेरी में हैं, ने अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांगने से इनकार कर दिया है। पुलिस ने उनके खिलाफ नासिक, जलगांव और नंदगांव में दर्ज मामलों को मुंबई के खार पुलिस थाने में ट्रांसफर कर दिया है। मद्रास उच्च न्यायालय ने कामरा को 7 अप्रैल तक अंतरिम अग्रिम जमानत दी है, क्योंकि वह तमिलनाडु के स्थायी निवासी हैं।
वैश्विक ध्यान और प्रभाव
यह घटना व्यक्तिगत अभिव्यक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन पर महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे रही है। कामरा का पुलिस समन का पालन न करना और उनकी टिप्पणियों को लेकर उठे विवाद ने कला के क्षेत्र में स्वतंत्रता और राजनीतिक संवेदनशीलता के बीच के टकराव को उजागर किया है। जैसे-जैसे यह मामला आगे बढ़ेगा, यह देखना होगा कि क्या कामरा को और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
उनके सोशल मीडिया पर किए गए विवादास्पद टिप्पणियों और बुकमाईशो से उनकी हटाई गई सूची ने इस बात को और अधिक प्रमुख बना दिया है कि आज के डिजिटल युग में सृजनात्मक स्वतंत्रता और राजनीतिक संवेदनशीलता के बीच संघर्ष बढ़ रहा है।