हाइड्रा कारोबारी दिलीप यादव हत्याकांड में आरोपी अनुराग यादव जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुका है, जबकि उसके पिता अब भी फरार हैं। गांव सियापुर में आरोपी के घर पर सन्नाटा पसरा हुआ हैं।
मैनपुरी: हाइड्रा कारोबारी दिलीप यादव हत्याकांड में आरोपी अनुराग यादव जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुका है, जबकि उसके पिता अब भी फरार हैं। गांव सियापुर में आरोपी के घर पर सन्नाटा पसरा हुआ है। अनुराग की गिरफ्तारी और पिता की फरारी से पूरा परिवार सदमे में है, वहीं उसकी छोटी बहन पप्पी किसी से बातचीत करने को तैयार नहीं है। गांव में चर्चाओं का दौर जारी है कि अनुराग अपराधी किस्म के लोगों के संपर्क में था।
प्रगति के जेवर और रुपये सुरक्षितहत्याकांड में शामिल दिलीप की पत्नी प्रगति के बड़े भाई आलोक यादव ने दावा किया है कि शादी के दौरान मिली नकदी और जेवर सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि मुंह दिखाई में प्रगति को 32 हजार रुपये मिले थे, जिसमें से 25 हजार रुपये अब भी सुरक्षित हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर प्रगति ने शूटरों को सुपारी दी, तो रकम कहां से आई? परिवार ने अनुराग से किसी भी प्रकार के संबंध होने से इनकार किया और बताया कि उनकी बहन की शादी में अनुराग के परिवार को न्योता तक नहीं दिया गया था।
गांव में पसरा सन्नाटा, मीडिया का जमावड़ा
हत्याकांड के बाद से सियापुर गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीण घरों से बाहर निकलने में हिचकिचा रहे हैं और मीडिया से बचने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रगति का परिवार सीधा-साधा था, जबकि आरोपी अनुराग दबंग प्रवृत्ति का था और उसके आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों से संबंध थे।सुपारी के पैसे कहां से आए?पुलिस अभी तक इस सवाल का जवाब तलाश रही है कि शूटरों को सुपारी देने के लिए प्रगति ने पैसे कहां से जुटाए।
गांव वालों का कहना है कि अगर उसके पास शादी में मिले पैसे और जेवर सुरक्षित हैं, तो फिर उसने हत्यारों को भुगतान कैसे किया? पुलिस इस पहलू की गहराई से जांच कर रही हैं।
परिवार का प्रगति से नाता टूटा, बहन बोली- मिले फांसी
दिलीप की हत्या के बाद प्रगति के अपने ही परिवार ने उससे नाता तोड़ लिया है। उसकी बहन पारुल, जिसकी शादी दिलीप के बड़े भाई संदीप से हुई थी, ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसकी बहन ने जैसा अपराध किया है, उसे फांसी की सजा मिलनी चाहिए। परिवार में कोई भी अब उसका चेहरा तक देखना नहीं चाहता।
खौफनाक साजिश का अंजामहत्या की साजिश 19 मार्च को कन्नौज के उमर्दा में रची गई थी। दिलीप को शूटरों ने पहले पीटा और फिर सिर के पिछले हिस्से में गोली मारकर खेत में फेंक दिया। अस्पताल में 21 मार्च को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
व्यवसायिक प्रतिद्वंद्विता या प्रेम प्रसंग?
दिलीप के परिवार का हाइड्रा और क्रेन का बड़ा कारोबार है। पुलिस सभी संभावित एंगल्स पर जांच कर रही है कि कहीं इस हत्या के पीछे व्यवसायिक प्रतिद्वंद्विता भी तो नहीं थी? हालांकि, अब तक की जांच में प्रगति और अनुराग के प्रेम संबंधों के चलते हत्या की पुष्टि हुई है। हालांकि, पुलिस ने हत्यारोपी पत्नी, प्रेमी अनुराग और एक शूटर को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस केस में कई अहम सवाल अब भी अनसुलझे हैं। क्या इसमें कोई और भी शामिल था? सुपारी का असली स्रोत क्या था? पुलिस हर पहलू को खंगाल रही है और जल्द ही पूरे सच का खुलासा होने की उम्मीद हैं।