ભાગલપુરમાં ભાજપ નેતા પપ્પુ તાંતી હત્યા કેસમાં ત્રણ લાખ રૂપિયાની સોપારીનો પોલીસનો દાવો

ભાગલપુરમાં ભાજપ નેતા પપ્પુ તાંતીની હત્યા કેસમાં પોલીસે મુખ્ય શૂટર અક્ષય યાદવ અને કથિત લાઇનર સુમન કુમારની ધરપકડ કરી છે. પોલીસના જણાવ્યા અનુસાર હત્યા માટે ત્રણ લાખ રૂપિયાની સોપારી નક્કી કરવામાં આવી હતી અને શશિ મોદીને કથિત મુખ્ય કાવતરાખોર તરીકે દર્શાવવામાં આવ્યો છે.
ભાગલપુરમાં ભાજપ નેતા પપ્પુ તાંતી હત્યા કેસમાં ત્રણ લાખ રૂપિયાની સોપારીનો પોલીસનો દાવો
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भागलपुर में भाजपा नेता उमा भूषण तांती उर्फ पप्पू तांती की हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य शूटर अक्षय यादव और कथित लाइनर सुमन कुमार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, श्रीनारायण साह मंडल के मंडल अध्यक्ष पप्पू तांती की हत्या के लिए तीन लाख रुपये की सुपारी तय की गई थी। पुलिस ने मामले में पूर्व पार्षद और भाजपा नेता शशि मोदी को कथित मुख्य साजिशकर्ता बताया है।

पुलिस के मुताबिक, पप्पू तांती की हत्या 11 सितंबर 2026 को बबरगंज थाना क्षेत्र के कुतूबगंज कुम्हार टोली के पास सुबह करीब 10 बजे की गई थी। पप्पू बाइक से जा रहे थे, तभी बाइक सवार हमलावरों ने उन्हें रोककर गोली मार दी। गोली लगने के बाद उन्हें इलाज के लिए जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल, मायागंज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

दिनदहाड़े हुई घटना के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश की स्थिति बनी थी। पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया और आसपास के सीसीटीवी फुटेज तथा तकनीकी सर्विलांस के जरिए आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास शुरू किया।

जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य शूटर अक्षय यादव को मुंगेर के सीताकुंड इलाके से गिरफ्तार किया, जबकि कथित लाइनर सुमन कुमार को कुतूबगंज से पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, सुमन के पास से वह मोबाइल फोन भी बरामद किया गया, जिसके जरिए कथित तौर पर घटना के समय शूटरों को पप्पू तांती की गतिविधियों और लोकेशन की जानकारी दी जा रही थी।

पुलिस ने शूटर के पास से हथियार बरामद होने की भी जानकारी दी है। हथियारों की फोरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि उनका इस्तेमाल वारदात में हुआ था या नहीं।

पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर यह सामने आया कि पप्पू तांती की हत्या के लिए तीन लाख रुपये में सुपारी तय की गई थी। पुलिस के मुताबिक, हत्या की साजिश लंबे समय से चल रही थी और पप्पू को रास्ते से हटाने के लिए पहले भी कोशिशें की गई थीं।

पुलिस जांच में करीब दो साल से साजिश चलने और करीब तीन बार प्रयास किए जाने की बात सामने आने का दावा किया गया है। इन प्रयासों की परिस्थितियों और उनमें शामिल लोगों की विस्तृत पुष्टि पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई से होगी।

पुलिस के अनुसार, मामले की पृष्ठभूमि में पुरानी राजनीतिक रंजिश और स्थानीय स्तर पर वर्चस्व का विवाद प्रमुख कारणों में शामिल हैं। पप्पू तांती और शशि मोदी दोनों भाजपा से जुड़े रहे थे। शशि मोदी पहले भाजपा मंडल अध्यक्ष रह चुका था। बाद में सरकारी नौकरी लगने के बाद उसे मंडल अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ा और इसके बाद पप्पू तांती को मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली।

पुलिस जांच में इस राजनीतिक पृष्ठभूमि को भी हत्याकांड से जोड़कर देखा जा रहा है।

मामले में कुतूबगंज स्थित काली मंदिर निर्माण और समिति के नियंत्रण को लेकर विवाद की बात भी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, मंदिर के निर्माण और प्रबंधन में वर्चस्व को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनातनी थी।

पप्पू तांती मंदिर निर्माण समिति से जुड़े हुए थे और इलाके में उनकी राजनीतिक तथा सामाजिक सक्रियता बढ़ रही थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मंदिर समिति से जुड़े विवाद और राजनीतिक मतभेद किस तरह हत्या की साजिश तक पहुंचे।

मामले में पूर्व पार्षद और भाजपा नेता शशि मोदी को पुलिस ने कथित मुख्य साजिशकर्ता बताया है। शशि मोदी ने 15 सितंबर को भागलपुर न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। इससे पहले उसकी पत्नी दीपिका कुमारी को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

शशि मोदी के भांजे कृष्णा मोदी की तलाश अभी जारी बताई गई है। पुलिस उसके और अन्य संभावित सहयोगियों के ठिकानों पर कार्रवाई कर रही है।

घटना के शुरुआती दिनों में पुलिस ने कई संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच शुरू की थी। परिवार के बयान के आधार पर पूर्व पार्षद शशि मोदी, उसके भांजे कृष्णा मोदी और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

पुलिस ने खगड़िया, मुंगेर और बेगूसराय समेत कई इलाकों में संभावित ठिकानों पर छापेमारी की। तकनीकी सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज की मदद से हमलावरों की गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया गया।

पप्पू तांती की हत्या के बाद पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। फोरेंसिक टीम ने मौके से जरूरी नमूने और अन्य साक्ष्य एकत्र किए। आसपास के रास्तों और घटनास्थल के आसपास लगे कैमरों की फुटेज खंगाली गई।

पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही थी कि हमलावर किस रास्ते से आए और गोली चलाने के बाद किस दिशा में भागे। इसी जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर शूटरों और उनके मददगारों के बारे में सुराग मिला।

घटना के बाद मृतक के परिवार ने भी हत्या के पीछे पुरानी रंजिश का आरोप लगाया था। परिवार की ओर से शशि मोदी और कृष्णा मोदी समेत अन्य लोगों पर संदेह जताते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

उस समय पुलिस ने कहा था कि किसी करीबी की साजिश के संबंध में तत्काल कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। बाद में जांच आगे बढ़ने के साथ नामजद आरोपियों और कथित शूटरों की भूमिका को लेकर कार्रवाई की गई।

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हत्या की सुपारी देने और उसे अंजाम तक पहुंचाने के बीच किन-किन लोगों ने भूमिका निभाई। तीन लाख रुपये की कथित सुपारी का भुगतान किस तरीके से किया गया, रकम किसे दी गई और हत्या की योजना के दौरान आरोपियों के बीच कितनी बार संपर्क हुआ, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन और डिजिटल साक्ष्य इस कड़ी को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पुलिस के अनुसार, लाइनर की भूमिका भी जांच में महत्वपूर्ण है। इस मामले में पुलिस ने सुमन कुमार के पास से मोबाइल बरामद करने की बात कही है और दावा किया है कि इसी माध्यम से घटना के समय शूटरों को पप्पू तांती की गतिविधियों और लोकेशन की जानकारी दी जा रही थी।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सुमन को किसने निर्देश दिए और वह किसके संपर्क में था।

हत्याकांड में हथियारों की बरामदगी भी जांच का हिस्सा है। पुलिस ने शूटर के पास से पिस्तौल और अन्य हथियार बरामद होने की जानकारी दी है। इन हथियारों की फोरेंसिक जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि उनका इस्तेमाल वारदात में हुआ था या नहीं।

घटनास्थल से मिले फोरेंसिक साक्ष्यों और बरामद हथियारों का मिलान भी जांच का हिस्सा हो सकता है।

पप्पू तांती की हत्या के बाद भाजपा समेत कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने घटना की निंदा की थी। पप्पू तांती लंबे समय से पार्टी की गतिविधियों से जुड़े कार्यकर्ता बताए गए हैं। वह श्रीनारायण साह मंडल के अध्यक्ष थे और इससे पहले भी भाजपा के संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहे थे।

पुलिस अब कथित साजिश की पूरी कड़ी को जोड़ने का प्रयास कर रही है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि हत्या की योजना कब बनी, इसमें कितने लोग शामिल थे, शूटरों से संपर्क किसने कराया, लाइनर की भूमिका किसने तय की और कथित तीन लाख रुपये की सुपारी का लेन-देन कैसे हुआ।

मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है और आरोपियों के खिलाफ अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। किसी आरोपी की भूमिका को अंतिम रूप से अदालत के निर्णय के आधार पर ही तय किया जाएगा।

फिलहाल पुलिस के दावों के अनुसार, शशि मोदी को कथित मुख्य साजिशकर्ता, अक्षय यादव को मुख्य शूटर और सुमन कुमार को कथित लाइनर बताया गया है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को साजिश से जुड़े और विवरण मिलने की उम्मीद है।

पुलिस के अनुसार, तीन लाख रुपये की कथित सुपारी, लंबे समय से चल रही साजिश, पहले किए गए प्रयास और 11 सितंबर की गोलीबारी इस हत्याकांड की जांच की प्रमुख कड़ियां हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। पोस्टमार्टम, फोरेंसिक, सीसीटीवी, मोबाइल डेटा और आरोपियों से पूछताछ से मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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