19 मार्च को श्रीराम यंत्र की स्थापना, राम मंदिर कार्यक्रम में होंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

19 मार्च 2026 को अयोध्या राम मंदिर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा श्रीराम यंत्र की स्थापना। हजारों श्रद्धालु और संत समारोह में होंगे शामिल।

अयोध्या के राम मंदिर में 19 मार्च को श्रीराम यंत्र की विधिवत स्थापना की जाएगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि होंगी। दो वर्ष पूर्व भेजा गया यह यंत्र वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों के आधार पर तैयार किया गया है और इसे सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु और संत शामिल होंगे।

Ayodhya Ram Mandir: 19 मार्च को अयोध्या के राम मंदिर में श्रीराम यंत्र की विधिवत स्थापना होगी, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। यह आयोजन चैत्र नवरात्र के पहले दिन यानी हिंदू नववर्ष के अवसर पर हो रहा है। दो वर्ष पूर्व जगद्गुरु विजयेंद्र सरस्वती द्वारा भेजा गया यह यंत्र वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों के अनुसार तैयार किया गया है। समारोह में लगभग 7,000 श्रद्धालु, 300 संत और विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे, जिनमें मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले प्रतिष्ठित व्यक्ति और विशेषज्ञ भी उपस्थित रहेंगे।

श्रीराम यंत्र का महत्व और इतिहास

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai के अनुसार, श्रीराम यंत्र दो वर्ष पहले जगद्गुरु विजयेंद्र सरस्वती द्वारा अयोध्या भेजा गया था। यह यंत्र विशेष वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों के अनुसार तैयार किया गया है और धार्मिक मान्यता के अनुसार इसमें देवताओं का निवास माना जाता है। यंत्र की स्थापना से घर और मंदिर परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और यह भक्तों के लिए आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है।

यंत्र वर्तमान में राम मंदिर के दूसरे तल पर पूजा के लिए रखा गया है और 19 मार्च को इसे विधिवत स्थापित किया जाएगा। नौ दिवसीय अनुष्ठान पहले से चल रहे हैं, जिनमें दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के विद्वान शामिल हैं। इस आयोजन में लगभग 7,000 लोग उपस्थित रहेंगे, जिनमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रतिष्ठित नागरिक भी शामिल होंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आगमन और मुख्य अनुष्ठान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 19 मार्च को सुबह 11 बजे अयोध्या पहुंचेंगी। उनका स्वागत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। मंदिर परिसर में राष्ट्रपति श्रीराम यंत्र की पूजा-अर्चना करेंगी और अभिजित मुहूर्त में यानी 11:55 बजे यंत्र स्थापना का मुख्य अनुष्ठान संपन्न होगा। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि का पालन किया जाएगा। पूजा और अनुष्ठान के बाद राष्ट्रपति प्रसाद ग्रहण करेंगी और भोजन के बाद वापस रवाना होंगी।

संत और विशिष्ट अतिथि समारोह में शामिल

इस आयोजन में लगभग 300 संत और विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहेंगे। केरल की पूज्य माता अमृतानंदमयी अपने लगभग एक हजार भक्तों के साथ अयोध्या आएंगी। मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले प्रतिष्ठित व्यक्तियों और कंपनियों जैसे Larsen & Toubro, Tata Group, आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई के परिवार और अन्य विशेषज्ञ भी आमंत्रित हैं। इसके अलावा पत्थर, लकड़ी और संगमरमर पर नक्काशी करने वाले कारीगर, मूर्तिकार और शिल्पकार शामिल होंगे।

सभी अतिथियों और कार्यकर्ताओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए क्यूआर कोड वाला विशेष पास आवश्यक है। मोबाइल फोन और हथियार लाना वर्जित रहेगा, हालांकि सिख धर्म के अनुयायी कृपाण लेकर प्रवेश कर सकते हैं। यह सुनिश्चित किया गया है कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह कड़ी और व्यवस्थित रहे।

मंदिर की सजावट और व्यवस्थाएं

उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए मंदिर परिसर की साफ-सफाई, सजावट और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया है। मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले सभी कार्यकर्ताओं का सम्मान इस अवसर पर किया जाएगा। स्थानीय और देशभर के श्रद्धालु इस आयोजन को आस्था और श्रद्धा के साथ देखेंगे।

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