आंध्र प्रदेश में रेयर अर्थ गलियारे को मिली रफ्तार, भारत की चीन पर निर्भरता कम करने की बड़ी तैयारी

आंध्र प्रदेश ने रेयर अर्थ और टाइटेनियम इकोसिस्टम का बड़ा खाका तैयार किया है। राज्य अगले 10 वर्षों में 50 हजार करोड़ निवेश आकर्षित करने की तैयारी में है।

आंध्र प्रदेश सरकार ने रेयर अर्थ, टाइटेनियम और तटीय सैंड मिनरल्स के लिए बड़ा औद्योगिक खाका तैयार किया है। राज्य 50 हजार करोड़ रुपये निवेश आकर्षित कर चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है और तीन बड़े औद्योगिक क्लस्टर विकसित करेगा।

अमरावती: आंध्र प्रदेश ने रेयर अर्थ मिनरल्स और तटीय सैंड खनिजों के क्षेत्र में एक महत्वाकांक्षी योजना पेश की है, जिसे भारत की रणनीतिक और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार ने अगले 10 वर्षों में 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य तय किया है। इसका मकसद रेयर अर्थ तत्वों, टाइटेनियम और परमानेंट मैग्नेट निर्माण के लिए चीन पर भारत की निर्भरता को कम करना है।

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक सप्लाई चेन में अस्थिरता और चीन द्वारा निर्यात नियंत्रणों ने इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।

क्या है रेयर अर्थ गलियारा परियोजना?

रेयर अर्थ गलियारा (Rare Earth Corridor) एक ऐसा औद्योगिक नेटवर्क होगा जिसमें खनन से लेकर उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण तक पूरी सप्लाई चेन विकसित की जाएगी। इसमें खनिजों की खोज, पृथक्करण, रिफाइनिंग, धातु और मिश्र धातु निर्माण के साथ-साथ रेयर अर्थ मैग्नेट और टाइटेनियम आधारित उत्पादों का उत्पादन शामिल होगा।

निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और ओडिशा में रेयर अर्थ गलियारों के विकास का समर्थन करने की घोषणा की थी। इसके बाद आंध्र प्रदेश ने सबसे विस्तृत और आक्रामक औद्योगिक खाका प्रस्तुत किया है।

50,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश का लक्ष्य

राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, आंध्र प्रदेश अगले दशक में खनन, खनिज पृथक्करण और मूल्य संवर्धन आधारित औद्योगिक संयंत्रों में भारी निवेश आकर्षित करना चाहता है।

सरकार एक व्यापक “रेयर अर्थ पॉलिसी” तैयार कर रही है, जिसे जून 2026 तक अधिसूचित किए जाने की संभावना है। इस नीति के तहत राज्य में विशेष औद्योगिक पार्क और रेयर अर्थ गलियारे विकसित किए जाएंगे।

राज्य सरकार प्रतिष्ठित घरेलू और वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी कर एंड-टू-एंड औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने की योजना बना रही है।

तीन बड़े औद्योगिक क्लस्टर बनाए जाएंगे

आंध्र प्रदेश सरकार ने तटीय क्षेत्रों में तीन बड़े औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की योजना बनाई है।

श्रीकाकुलम में टाइटेनियम पार्क

श्रीकाकुलम में प्रस्तावित टाइटेनियम पार्क का उद्देश्य टाइटेनियम आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना है। यहां टाइटेनियम स्पंज, टाइटेनियम धातु और टाइटेनियम डाइऑक्साइड पिगमेंट का उत्पादन किया जाएगा।

अनाकापल्ली में रेयर अर्थ कॉरिडोर

अनाकापल्ली में रेयर अर्थ कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, जहां रेयर अर्थ ऑक्साइड, मिश्र धातु और परमानेंट मैग्नेट निर्माण पर फोकस रहेगा।

मछलीपट्टनम में एकीकृत पार्क

मछलीपट्टनम में एकीकृत टाइटेनियम और रेयर अर्थ पार्क बनाया जाएगा, जो खनन से लेकर उन्नत विनिर्माण तक पूरी मूल्य श्रृंखला को एक स्थान पर जोड़ेगा।

क्यों महत्वपूर्ण हैं रेयर अर्थ तत्व?

रेयर अर्थ तत्व आधुनिक तकनीक और उन्नत उद्योगों की रीढ़ माने जाते हैं। इनका उपयोग कई रणनीतिक क्षेत्रों में होता है, जैसे—

इलेक्ट्रिक वाहन (EV)

पवन ऊर्जा टरबाइन

स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स

रक्षा उपकरण

मिसाइल और एयरोस्पेस तकनीक

चिकित्सा उपकरण

परमानेंट मैग्नेट, जो रेयर अर्थ तत्वों से बनाए जाते हैं, ऊर्जा दक्ष मोटर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बेहद जरूरी होते हैं।

वर्तमान में वैश्विक रेयर अर्थ प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण पर चीन का दबदबा है। भारत अभी भी इन उत्पादों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

मोनाजाइट खनिज पर रहेगा खास फोकस

आंध्र प्रदेश को भारत के सबसे समृद्ध मोनाजाइट भंडार वाले राज्यों में गिना जाता है। मोनाजाइट एक रणनीतिक खनिज है जिसमें रेयर अर्थ तत्व मौजूद होते हैं।

राज्य सरकार ने 16 तटीय सैंड मिनरल भंडारों की पहचान की है, जो लगभग 16,604 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं। ये भंडार विशाखापत्तनम, काकीनाडा, कृष्णा और अन्य तटीय जिलों में स्थित हैं।

इन क्षेत्रों में इल्मेनाइट, रूटाइल, जिरकॉन, गार्नेट और मोनाजाइट जैसे मूल्यवान खनिज पाए जाते हैं।

मोनाजाइट पर सरकारी नियंत्रण क्यों?

मोनाजाइट को भारत के “परमाणु ऊर्जा अधिनियम” के तहत एक नियंत्रित पदार्थ माना जाता है क्योंकि यह रेडियोधर्मी तत्वों से जुड़ा होता है।

इसी वजह से निजी कंपनियों को सीधे मोनाजाइट युक्त खनिज क्षेत्रों के खनन पट्टे नहीं दिए जा सकते।

इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने एक विशेष पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल तैयार किया है।

PPP मॉडल के जरिए निजी कंपनियों को मिलेगा मौका

इस मॉडल के तहत खनन पट्टे आंध्र प्रदेश खनिज विकास निगम (APMDC) के पास रहेंगे, जबकि निजी कंपनियां खनन के बाद मूल्य संवर्धन, प्रोसेसिंग और विनिर्माण में भागीदारी कर सकेंगी।

सरकार का मानना है कि इससे रणनीतिक नियंत्रण भी बना रहेगा और निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

भारत की सप्लाई चेन सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?

हाल के वर्षों में वैश्विक सप्लाई चेन बाधाओं और चीन की निर्यात नीतियों ने कई देशों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने के लिए मजबूर किया है।

भारत के लिए यह परियोजना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि

  • इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग तेजी से बढ़ रहा है
  • रक्षा क्षेत्र में घरेलू निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है
  • नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में मांग बढ़ रही है
  • हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को स्थिर सप्लाई चाहिए

ऐसे में घरेलू रेयर अर्थ उत्पादन भारत की रणनीतिक सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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