एक RTI कार्यकर्ता ने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके के परिवार की आय, संपत्ति और संगठन की फंडिंग की जांच की मांग करते हुए महाराष्ट्र सरकार, चुनाव आयोग और CBIC को शिकायत भेजी है। फिलहाल आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने महाराष्ट्र सरकार, भारत के चुनाव आयोग (ECI) और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) को शिकायत भेजकर अभिजीत दीपके के परिवार की आय, संपत्ति और संगठन की फंडिंग की जांच की मांग की है। शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम प्राधिकरण द्वारा पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी जांच एजेंसी ने इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जारी किया है। इसलिए सभी आरोप फिलहाल केवल शिकायतकर्ता के दावे हैं।
क्या है पूरा मामला
RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MIDC) में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। शिकायत में कहा गया है कि यदि उनकी आय सीमित थी, तो यह जांच की जानी चाहिए कि परिवार ने विदेश में उच्च शिक्षा का खर्च किस प्रकार वहन किया। शिकायतकर्ता ने संबंधित विभागों से आय और संपत्ति के स्रोतों की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इस संबंध में अभिजीत दीपके या उनके परिवार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
CJP के पंजीकरण पर भी सवाल
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कॉकरोच जनता पार्टी राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय है और सार्वजनिक रूप से फंड जुटा रही है, जबकि उसका राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण नहीं है।
RTI कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि यदि संगठन राजनीतिक दल की तरह कार्य कर रहा है और चंदा स्वीकार कर रहा है, तो उसके कानूनी दर्जे की जांच की जाए और आवश्यकता होने पर संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाए। फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की गई है।
लीगल डिफेंस फंड पर उठे प्रश्न
शिकायत में हाल ही में घोषित लीगल डिफेंस फंड का भी उल्लेख किया गया है। RTI कार्यकर्ता ने CBIC से अनुरोध किया है कि इस फंड से जुड़े वित्तीय पहलुओं और लागू कर नियमों की समीक्षा की जाए। यह मांग उस घोषणा के बाद उठाई गई, जिसमें छात्रों की कानूनी सहायता के लिए एक फंड बनाने की बात कही गई थी। हालांकि, संबंधित वित्तीय व्यवस्था या कर दायित्वों पर अभी किसी सरकारी एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
आंदोलन को लेकर भी लगाए आरोप
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि संगठन का आंदोलन समय के साथ अपने मूल उद्देश्य से आगे बढ़ गया और कुछ सार्वजनिक बयानों में आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। इन आरोपों की भी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत भेजी गई है और यदि आवश्यक हुआ तो जांच एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती हैं।

CJP का लीगल डिफेंस फंड क्या है
कॉकरोच जनता पार्टी ने हाल ही में घोषणा की थी कि विभिन्न मामलों का सामना कर रहे छात्रों की कानूनी सहायता के लिए एक लीगल डिफेंस फंड बनाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य ऐसे छात्रों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना बताया गया था, जिनके खिलाफ विभिन्न मामलों में कार्रवाई चल रही है। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी आर्थिक सहयोग की घोषणा की थी और अन्य वकीलों से भी इस पहल में योगदान देने की अपील की थी।
अभिजीत दीपके कौन हैं
अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजीनगर (औरंगाबाद) से संबंध रखते हैं और डिजिटल मीडिया रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई भारत में की और वर्तमान में अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वे पहले राजनीतिक क्षेत्र में भी विभिन्न संगठनों के साथ काम कर चुके हैं।
कानूनी प्रक्रिया क्या कहती है
भारतीय कानून के अनुसार, किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ लगाए गए आरोप तब तक सिद्ध नहीं माने जाते जब तक सक्षम जांच एजेंसी जांच पूरी न कर ले और आवश्यकता होने पर न्यायालय में आरोप प्रमाणित न हो जाएं। इसी कारण वर्तमान मामले में भी शिकायत और आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। संबंधित विभाग शिकायतों की समीक्षा करने के बाद ही यह तय करेंगे कि जांच शुरू की जाए या नहीं।
आगे क्या हो सकता है
यदि महाराष्ट्र सरकार, चुनाव आयोग या CBIC शिकायत को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हैं, तो वे प्रारंभिक जांच या तथ्यात्मक सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। इसके बाद आवश्यक होने पर विस्तृत जांच कराई जा सकती है। दूसरी ओर, यदि संबंधित पक्ष अपनी प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हैं, तो उसे भी जांच प्रक्रिया का हिस्सा माना जाएगा।











