अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन की नौ महीने लंबी तैनाती के दौरान नाविकों की मुश्किलें बढ़ने की रिपोर्ट है। भोजन, पानी, स्वच्छता और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। सांसदों ने हालात की आधिकारिक जांच की मांग की है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी नौसेना के विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन पर लंबे समय से समुद्र में तैनाती के कारण मुश्किलें बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। जहाज पर करीब 5,000 नाविक और मरीन तैनात हैं। रिपोर्ट्स में बुनियादी सामान की कमी, स्वच्छता और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं के साथ कुछ नाविकों द्वारा समुद्र में कूदने की कोशिश किए जाने का भी दावा किया गया है। अब्राहम लिंकन लगातार नौवें महीने समुद्र में तैनात है और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियान का हिस्सा बना हुआ है। लंबी तैनाती के कारण जहाज के चालक दल और उनके परिवारों में चिंता बढ़ी है। इस बीच अमेरिकी अधिकारियों और सांसदों के बीच जहाज पर मौजूद परिस्थितियों को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
नौ महीने से समुद्र में तैनात है अब्राहम लिंकन
यूएसएस अब्राहम लिंकन ने नवंबर 2025 में कैलिफोर्निया से अपनी तैनाती शुरू की थी। शुरुआत में इसे दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में भेजा गया था, लेकिन बाद में मध्य पूर्व की परिस्थितियों के कारण इसकी तैनाती का रुख बदल दिया गया। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद कैरियर को मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी पड़ी। अब जहाज नौ महीने से अधिक समय से लगातार समुद्र में है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना की सामान्य योजना में एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की तैनाती लगभग छह महीने की होती है। इससे ज्यादा समय तक जहाज को समुद्र में रखने से रखरखाव, सैनिकों की थकान और परिचालन क्षमता पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता
अब्राहम लिंकन पर तैनात सैनिकों की मानसिक स्थिति को लेकर सबसे गंभीर चिंता कुछ नाविकों द्वारा कथित आत्महत्या के प्रयासों से जुड़ी है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दो नाविकों ने कथित तौर पर जहाज से समुद्र में छलांग लगाने की कोशिश की।
हालांकि, अमेरिकी नौसेना ने इन घटनाओं पर तत्काल विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी। यूएस सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा कि 260 से ज्यादा दिनों तक समुद्र में रहने के बावजूद चालक दल मजबूती और प्रतिबद्धता के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा रहा है। कमांड के अनुसार, जहाज पर तैनात किसी भी सैन्यकर्मी की मौत नहीं हुई है। 3 अगस्त को समुद्र में गिरने वाले एक नाविक को भी तेजी से सुरक्षित निकाल लिया गया था।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नौसैनिक मामलों के जानकारों के लिए लंबे समय तक समुद्र में रहना अपने आप में एक बड़ा तनाव है। सीमित जगह, लंबे काम के घंटे, नींद की कमी, परिवार से दूरी और युद्ध के खतरे का लगातार दबाव सैनिकों पर गंभीर असर डाल सकता है।
बुनियादी सामान और भोजन की कमी की शिकायत
अब्राहम लिंकन पर मौजूद नाविकों के परिवारों ने भी जहाज की परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई है। हाल की बैठकों में परिवार के सदस्यों और नौसेना नेतृत्व के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस होने की खबरें हैं।
रिपोर्टों में भोजन और अन्य बुनियादी सामान की उपलब्धता को लेकर शिकायतों का उल्लेख किया गया है। कुछ सांसदों ने पानी की गुणवत्ता, पाइपलाइन और शौचालय व्यवस्था तथा जहाज की स्वच्छता को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
लंबी समुद्री तैनाती के दौरान सीमित संसाधनों का दबाव बढ़ सकता है। जहाज पर हजारों लोगों की मौजूदगी में भोजन, पेयजल, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाओं को लगातार बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है।
सांसदों ने मांगी आधिकारिक जांच
अब्राहम लिंकन की परिस्थितियों को लेकर अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने रक्षा विभाग से जवाब मांगा है। सीनेटर रूबेन गैलेगो ने जहाज की स्थिति की जांच के लिए द्विदलीय सीनेट प्रतिनिधिमंडल के साथ आधिकारिक निरीक्षण की मांग की है।
डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भी जहाज को लेकर सामने आई रिपोर्टों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बुनियादी सामान की कथित कमी, पानी से जुड़ी समस्याओं, प्लंबिंग, मानसिक स्वास्थ्य और डेक की सुरक्षा से संबंधित शिकायतों का उल्लेख किया।
ब्लूमेंथल ने इस पूरे मामले को अमेरिकी नौसेना की मौजूदा परिचालन क्षमता से भी जोड़ा। उनका सवाल है कि क्या नौसेना अपने एयरक्राफ्ट कैरियर बेड़े से लगातार बढ़ती परिचालन मांग को लंबे समय तक बनाए रखने की स्थिति में है।
रक्षा प्रमुख ने रिपोर्टों को बताया गलत तरीके से पेश किया गया
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जहाज पर खराब परिस्थितियों से संबंधित दावों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि अब्राहम लिंकन पर मौजूद स्थिति को पूरी तरह गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
हेगसेथ के अनुसार, अमेरिकी नौसेना यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक जहाज, उसके चालक दल और कमांडिंग अधिकारियों को उपलब्ध सभी जरूरी संसाधन दिए जाएं।
इस बयान के बावजूद कांग्रेस के कुछ सदस्य जहाज की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र जांच कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय तक समुद्र में रहने वाले सैनिकों की समस्याओं का वास्तविक आकलन जरूरी है।
विशेषज्ञ बोले- लंबी तैनाती से समस्याएं बढ़ती हैं
Centre for Naval Analyses के मुख्य शोध अधिकारी जोनाथन श्रोडेन के मुताबिक, समुद्र में लंबी तैनाती सैनिकों के लिए बेहद कठिन होती है। उन्होंने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में भी एयरक्राफ्ट कैरियर पर जगह सीमित होती है, काम के घंटे लंबे होते हैं और पर्याप्त ताजी हवा, व्यायाम तथा नींद हासिल करना आसान नहीं होता।

युद्ध जैसी परिस्थितियों में यह दबाव कई गुना बढ़ जाता है। जहाज को लगातार संभावित सैन्य खतरे का सामना करना पड़ता है और चालक दल को लंबे समय तक उच्च स्तर की सतर्कता बनाए रखनी पड़ती है।
श्रोडेन के अनुसार, छह महीने से अधिक की तैनाती से आगे बढ़ने पर समस्याएं एक-दूसरे से जुड़कर बढ़ सकती हैं। इससे नाविकों के कल्याण के साथ-साथ जहाज के रखरखाव और भविष्य की परिचालन तैयारियों पर भी असर पड़ सकता है।
यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड का उदाहरण भी सामने
अब्राहम लिंकन अकेला अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है जिसे लंबी तैनाती के दौरान समस्याओं का सामना करना पड़ा। यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड ने हाल में करीब 326 दिनों की लंबी तैनाती पूरी की थी।
इस दौरान जहाज को कैरेबियन और मध्य पूर्व सहित कई क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य अभियानों में शामिल किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, मार्च में फोर्ड के लॉन्ड्री रूम में आग लगने से दो नाविक घायल हुए थे। आग से करीब 100 बिस्तरों को भी नुकसान पहुंचा था।
अमेरिकी मीडिया में जहाज की समुद्र में शौचालय व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं की भी रिपोर्टें सामने आई थीं। इससे यह बहस तेज हुई कि लंबे समय तक एयरक्राफ्ट कैरियर को समुद्र में तैनात रखने की अमेरिकी रणनीति का सैनिकों और जहाजों पर कितना असर पड़ रहा है।
अब जॉर्ज वॉशिंगटन संभाल सकता है जिम्मेदारी
अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती के बाद उसकी जगह यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन के मध्य पूर्व में आने की संभावना है। अगर यह बदलाव तय कार्यक्रम के अनुसार होता है, तो लिंकन के चालक दल को लंबे समय बाद घर लौटने और आराम करने का मौका मिल सकता है।
परिवारों के लिए यह बदलाव राहत भरा हो सकता है, क्योंकि कई महीनों से वे अपने परिजनों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
हालांकि, अब्राहम लिंकन के चालक दल की चुनौतियां केवल घर वापसी तक सीमित नहीं हैं। लंबी तैनाती ने अमेरिकी नौसेना के सामने सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य, जहाजों के रखरखाव और लगातार सैन्य अभियानों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को भी उजागर किया है।
अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती
अब्राहम लिंकन की स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका कई क्षेत्रों में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है। एयरक्राफ्ट कैरियर अमेरिकी नौसेना की शक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन इनकी लंबी तैनाती के लिए बड़ी संख्या में सैनिकों, तकनीकी संसाधनों और रखरखाव सुविधाओं की जरूरत होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जहाज अपने निर्धारित मिशन को पूरा करने में सक्षम हो सकता है, लेकिन समुद्र में रहने की अवधि बढ़ने के साथ समस्याओं की संख्या भी बढ़ती जाती है।
अब अमेरिकी नौसेना और रक्षा विभाग के सामने यह चुनौती है कि वे सैनिकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करते हुए लंबे समय तक चलने वाले सैन्य अभियानों के लिए अपने कैरियर बेड़े की परिचालन क्षमता बनाए रखें। अब्राहम लिंकन से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि जहाज पर सामने आई समस्याएं कितनी व्यापक हैं और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए क्या कदम जरूरी होंगे।











