हर साल 30 अक्टूबर को दुनिया भर में एडॉप्टी रिमेम्ब्रेंस डे (Adoptee Remembrance Day) मनाया जाता है। यह दिन उन लोगों की याद में समर्पित है जिन्हें गोद लिए जाने की प्रक्रिया में कभी न कभी दर्द, आघात या अस्वीकार किए जाने की पीड़ा झेलनी पड़ी है। यह सिर्फ एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि एक भावनात्मक पुल है — जो समाज, परिवार और गोद लिए गए व्यक्तियों (Adoptees) को एक साझा समझ और करुणा की कड़ी में जोड़ता है।
इस दिन का उद्देश्य है — उन आवाज़ों को सुनना जो अक्सर मौन रह जाती हैं, उन कहानियों को याद करना जो अधूरी रह गईं, और उन लोगों को सम्मान देना जिन्होंने इस संघर्ष को झेला या खो दिया।
एडॉप्टी रिमेम्ब्रेंस डे क्या है?
यह दिन जागरूकता, संवेदना और एकजुटता का प्रतीक है। दुनिया के कई देशों में गोद लेने (Adoption) की प्रक्रिया को एक सुंदर मानवीय कदम माना जाता है — जहाँ किसी बच्चे को नया परिवार, नई पहचान और नया जीवन मिलता है। लेकिन इस प्रक्रिया का एक दूसरा पहलू भी है — भावनात्मक खालीपन, पहचान की खोज और मानसिक आघात।
हर गोद लिया गया व्यक्ति अपनी यात्रा अलग तरह से जीता है। किसी के लिए यह जीवन का दूसरा अवसर होता है, तो किसी के लिए यह एक ऐसा अध्याय जिसमें दर्द, खोई हुई पहचान और “मैं कौन हूँ?” जैसे सवाल शामिल होते हैं। एडॉप्टी रिमेम्ब्रेंस डे उन सभी भावनाओं को सम्मान देता है — चाहे वे खुशी की हों या पीड़ा की।
एडॉप्टी रिमेम्ब्रेंस डे का इतिहास

इस दिन की शुरुआत साल 2020 में पैमेला करानोवा (Pamela Karanova) ने की थी। उनका उद्देश्य था उन गोद लिए गए व्यक्तियों की याद में एक दिन बनाना जिन्होंने अपने जीवन में गहरी चोटें झेली थीं, या जो मानसिक तनाव और आत्महत्या के कारण दुनिया से चले गए।
करानोवा खुद एक adoptee हैं। उन्होंने अपने जीवन में उस अदृश्य दुख को महसूस किया जिसे शब्दों में बयान करना कठिन है — जैविक परिवार से दूरी, अपनापन खोजने की जद्दोजहद और समाज की उदासीनता। उन्होंने महसूस किया कि दुनिया गोद लिए गए बच्चों की “नई शुरुआत” का जश्न तो मनाती है, लेकिन उनके मौन संघर्षों को शायद ही कोई समझता है। इसलिए, उन्होंने 30 अक्टूबर को Adoptee Remembrance Day के रूप में घोषित किया — एक ऐसा दिन जहाँ हर कोई सुन सके, समझ सके और साथ खड़ा हो सके।
कैसे मनाया जाता है एडॉप्टी रिमेम्ब्रेंस डे?

1. पीले रंग का प्रतीक – आशा और संवेदना का रंग
पीला (Yellow) रंग इस दिन का आधिकारिक प्रतीक है। यह रंग उम्मीद, करुणा और प्रकाश का प्रतीक है। लोग इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनते हैं — जैसे टी-शर्ट, रिबन, या मोज़े — ताकि यह संदेश दे सकें कि वे उन सभी गोद लिए गए व्यक्तियों के साथ हैं जिन्होंने किसी न किसी रूप में दर्द झेला है।
कुछ लोग पीले रंग का रिबन लगाते हैं, और सोशल मीडिया पर #AdopteeRemembranceDay जैसे हैशटैग के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हैं, ताकि जागरूकता फैले।
2. मोमबत्ती जलाना – यादों को रोशनी देना
मोमबत्ती जलाना इस दिन का सबसे भावुक हिस्सा है। लोग एक पीली मोमबत्ती जलाकर उन जीवनों को याद करते हैं जो अब हमारे बीच नहीं हैं — वे गोद लिए गए बच्चे जिन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना किया, या जो मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से हार गए।
यह एक मौन श्रद्धांजलि होती है — जिसमें हम शब्द नहीं बोलते, पर रोशनी सब कुछ कह जाती है। कई लोग अपनी जलाई हुई मोमबत्ती की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हैं, ताकि और लोग भी इस संवेदनशील पहल का हिस्सा बन सकें।
3. अपनी कहानी साझा करें – मौन तोड़ें
एडॉप्टी रिमेम्ब्रेंस डे का एक अहम हिस्सा है — कहानी कहना और सुनना। जो लोग गोद लिए गए हैं, या जिन्होंने गोद लेने से जुड़ा कोई नुकसान झेला है, वे इस दिन अपनी कहानी साझा कर सकते हैं।
हर कहानी दर्दनाक नहीं होती, लेकिन हर कहानी सच्ची होती है। कई लोग पाते हैं कि जब वे अपनी भावनाएँ साझा करते हैं, तो न केवल उन्हें सुकून मिलता है, बल्कि किसी और को भी आशा मिलती है कि वह अकेला नहीं है।
यह दिन इस बात पर ज़ोर देता है कि —
“हर अपनाया गया जीवन सम्मान के योग्य है, चाहे उसकी यात्रा कितनी भी कठिन क्यों न रही हो।”
4. सीखें और समझें
जो लोग इस विषय से नए हैं, वे इस दिन को शिक्षा और संवेदनशीलता के अवसर के रूप में अपना सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाला संगठन Adoptees for Justice (A4J) इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
यह संस्था अमेरिका और अन्य देशों में ऐसे लोगों के लिए काम करती है जिन्हें गोद लेने की प्रक्रिया में नागरिकता नहीं मिली या जो कानूनी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है — “हर adoptee को अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए।”
एडॉप्टी रिमेम्ब्रेंस डे हमें यह याद दिलाता है कि हर गोद लिया गया व्यक्ति केवल एक कहानी नहीं, बल्कि भावनाओं, संघर्ष और पहचान की यात्रा है। यह दिन समाज को संवेदना, समझ और स्वीकृति का संदेश देता है — ताकि कोई भी adoptee खुद को अकेला या अनसुना महसूस न करे। यही सच्ची मानवता है।











