आगरा में गांधी जयंती के दिन नाथूराम गोडसे के श्राद्ध और तर्पण को लेकर विवाद खड़ा हो गया। अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से गोडसे का श्राद्ध और तर्पण करने का कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया था। कार्यक्रम के लिए हिंदूवादी संगठन से जुड़े लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस और संगठन के कार्यकर्ताओं के बीच तनातनी की स्थिति बनी रही।
मामले को लेकर हिंदू महासभा की ओर से पहले ही 2 अक्टूबर को गोडसे के श्राद्ध और तर्पण का कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही गई थी। संगठन ने इसे पितृपक्ष की धार्मिक परंपरा से जोड़ते हुए कार्यक्रम की तैयारी की थी। 1 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट में भी संगठन की ओर से 2 अक्टूबर को गोडसे के श्राद्ध-तर्पण की तैयारी किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
कार्यक्रम को लेकर आगरा में पहले से ही पुलिस प्रशासन सतर्क था। गांधी जयंती के दिन प्रस्तावित आयोजन के मद्देनजर पुलिस ने मौके पर निगरानी बढ़ा दी। जैसे ही हिंदू महासभा से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता तर्पण के लिए पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसी दौरान तर्पण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को पुलिस द्वारा अपने कब्जे में लिए जाने की बात सामने आई।
बताया जा रहा है कि हिंदू महासभा की आगरा जिलाध्यक्ष मीरा राठौर भी कार्यक्रम में पहुंची थीं। पुलिस ने उन्हें मौके से हटाया और जीप में बैठाकर ले गई। इस दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच बहस की स्थिति बनी। कार्यकर्ता पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते रहे, जबकि पुलिस ने प्रस्तावित कार्यक्रम को आगे बढ़ने से रोकने के लिए मौके पर कार्रवाई की।
हिंदू महासभा की ओर से गोडसे के श्राद्ध और तर्पण को लेकर अपना अलग पक्ष रखा गया था। संगठन से जुड़े नेताओं का कहना था कि पितृपक्ष में मृत व्यक्तियों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है और इसी परंपरा के तहत गोडसे के लिए यह कार्यक्रम रखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक संगठन ने गोडसे को लेकर अपनी विचारधारा के अनुरूप इस आयोजन की घोषणा की थी।
वहीं, गांधीवादी संगठनों और कुछ नागरिकों की ओर से इस आयोजन पर आपत्ति जताई गई। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार गांधी जयंती के दिन गोडसे के श्राद्ध और तर्पण के कार्यक्रम को लेकर विरोध और नाराजगी सामने आई थी। कार्यक्रम की घोषणा के बाद आगरा में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई।
गांधी जयंती के मौके पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पहले से सतर्क था। इसी वजह से पुलिस ने कार्यक्रम को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कार्रवाई की। तर्पण सामग्री को हटाए जाने और हिंदू महासभा की जिलाध्यक्ष को पुलिस जीप में ले जाने के बाद मौके पर मौजूद लोगों में भी चर्चा शुरू हो गई।
यह पहली बार नहीं है जब आगरा में हिंदू महासभा से जुड़े किसी कार्यक्रम को लेकर पुलिस और संगठन के पदाधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हो। इससे पहले अगस्त में ताजमहल परिसर में जलाभिषेक के प्रयास को पुलिस ने रोका था। उस दौरान भी संगठन के पदाधिकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी और बाद में कार्यकर्ताओं को राजेश्वर महादेव मंदिर ले जाया गया था।
सितंबर में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे से पहले आगरा में हिंदू महासभा के कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने नजरबंद किया था। उस समय संगठन ने मुख्यमंत्री से मिलने का कार्यक्रम घोषित किया था, जिसके बाद पुलिस ने पदाधिकारियों के घर पहुंचकर कार्रवाई की थी।
गोडसे के श्राद्ध-तर्पण को लेकर सामने आया यह मामला गांधी जयंती के दिन इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि इसी दिन देशभर में महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। आगरा में एक ओर गांधी जयंती के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर हिंदू महासभा की ओर से गोडसे के श्राद्ध-तर्पण का कार्यक्रम घोषित किया गया था। इसी विरोधाभासी पृष्ठभूमि में पुलिस की कार्रवाई ने मामले को और चर्चा में ला दिया।
पितृपक्ष के दौरान देशभर में लोग अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं। वर्ष 2026 में पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चल रहा है। इस दौरान विभिन्न तिथियों पर श्राद्ध और तर्पण की धार्मिक परंपरा निभाई जा रही है।
आगरा में हिंदू महासभा द्वारा इसी पितृपक्ष की परंपरा का हवाला देकर गोडसे के लिए श्राद्ध-तर्पण का कार्यक्रम रखा गया था। हालांकि, प्रशासन की ओर से इसे होने नहीं दिया गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद संगठन के पदाधिकारियों को मौके से हटाया गया और कार्यक्रम के लिए लाई गई सामग्री भी आगे इस्तेमाल नहीं हो सकी।
घटना के दौरान पुलिस की कार्रवाई का वीडियो और तस्वीरें भी सामने आने की बात कही जा रही है। इनमें पुलिसकर्मियों द्वारा कार्यकर्ताओं को मौके से हटाते हुए देखा गया। जिलाध्यक्ष को पुलिस वाहन में बैठाकर ले जाने के बाद संगठन के अन्य कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी देखी गई।
फिलहाल मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। दूसरी तरफ हिंदू महासभा अपने घोषित कार्यक्रम और उसके पीछे के तर्क को लेकर अपना पक्ष रख रही है। गांधी जयंती के दिन आगरा में गोडसे के श्राद्ध-तर्पण को लेकर हुआ यह घटनाक्रम शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।











