BHU की दो महिला प्रोफेसर से फ्लैट दिलाने के नाम पर 30 लाख की ठगी; दबाव बनाने पर दिया चेक

वाराणसी में BHU की दो महिला प्रोफेसर से फ्लैट दिलाने के नाम पर 30 लाख रुपये लिए गए। रकम मांगने पर चेक दिया गया, जो दो बार बाउंस हो गया।
BHU की दो महिला प्रोफेसर से फ्लैट दिलाने के नाम पर 30 लाख की ठगी; दबाव बनाने पर दिया चेक
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वाराणसी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की दो महिला प्रोफेसर के साथ फ्लैट दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि आरोपितों ने दोनों प्रोफेसर से फ्लैट दिलाने का भरोसा देकर करीब 30 लाख रुपये ले लिए। काफी समय बीतने के बाद जब फ्लैट नहीं मिला तो दोनों ने अपनी रकम वापस मांगी। दबाव बढ़ने पर आरोपितों की ओर से चेक दिया गया, लेकिन बैंक में जमा करने पर वह दो बार बाउंस हो गया। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

बताया जा रहा है कि दोनों महिला प्रोफेसर ने फ्लैट खरीदने के उद्देश्य से संबंधित लोगों से संपर्क किया था। बातचीत के दौरान उन्हें फ्लैट दिलाने का भरोसा दिया गया। सौदे को लेकर दोनों प्रोफेसरों से अलग-अलग चरणों में रकम लिए जाने की बात सामने आई है। कुल रकम करीब 30 लाख रुपये बताई जा रही है।

आरोप के मुताबिक रकम लेने के बाद तय प्रक्रिया के अनुसार फ्लैट उपलब्ध नहीं कराया गया। जब दोनों प्रोफेसरों ने फ्लैट के संबंध में जानकारी मांगनी शुरू की तो उन्हें अलग-अलग कारण बताए गए। काफी समय तक मामला टलता रहा। इसके बाद प्रोफेसरों ने अपनी दी हुई रकम वापस मांगनी शुरू की।

रकम लौटाने को लेकर दबाव बनाए जाने के बाद आरोपितों की ओर से चेक दिया गया। दोनों प्रोफेसरों को उम्मीद थी कि चेक के माध्यम से उनकी रकम वापस मिल जाएगी। लेकिन बैंक में चेक जमा करने के बाद वह भुगतान के बिना वापस हो गया। बताया जा रहा है कि चेक दो बार बैंक से बाउंस हुआ। इसके बाद दोनों प्रोफेसरों को शक हुआ कि उनके साथ जानबूझकर धोखाधड़ी की गई है।

चेक बाउंस होने के बाद रकम वापस पाने के लिए दोनों प्रोफेसरों ने आरोपितों से संपर्क किया। उनसे भुगतान करने को कहा गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की। शिकायत में फ्लैट दिलाने के नाम पर रकम लेने और बाद में चेक देकर भुगतान नहीं करने समेत पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई है।

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों प्रोफेसरों से रकम किस माध्यम से ली गई थी, फ्लैट के नाम पर किस तरह का समझौता या आश्वासन दिया गया था और बाद में रकम वापस करने के लिए चेक क्यों दिया गया।

जांच में बैंक से संबंधित दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। चेक कब जारी किया गया, किस खाते से जारी हुआ और किन परिस्थितियों में दोनों बार भुगतान नहीं हो सका, इसकी जानकारी जुटाई जा सकती है। इसके अलावा दोनों प्रोफेसरों द्वारा रकम दिए जाने से जुड़े दस्तावेज और लेन-देन के रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।

फ्लैट खरीदने के लिए बड़ी रकम का भुगतान करने के बाद भी संपत्ति नहीं मिलने और रकम वापस न होने से दोनों प्रोफेसरों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा। विश्वविद्यालय जैसे संस्थान में कार्यरत दोनों शिक्षिकाओं के साथ इस तरह की धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद आसपास के लोगों में भी चर्चा शुरू हो गई है।

ऐसे मामलों में अक्सर संपत्ति खरीदने से पहले दस्तावेजों की जांच और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण होता है। फ्लैट की वैधता, विक्रेता या एजेंट की भूमिका, संपत्ति के कागजात और भुगतान की शर्तों की पुष्टि नहीं होने पर बाद में विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। इस मामले में भी पुलिस इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा सकती है।

दोनों प्रोफेसरों की शिकायत के बाद अब आरोपित पक्ष का बयान और जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल आरोपों की जांच पुलिस स्तर पर की जा रही है।

फ्लैट के नाम पर 30 लाख रुपये लिए जाने, रकम लौटाने के लिए चेक दिए जाने और उसके दो बार बाउंस होने के बाद सामने आया यह मामला वाराणसी में चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों महिला प्रोफेसर अब अपनी रकम वापस पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा ले रही हैं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित धोखाधड़ी किस तरह की गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

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