अजीत डोभाल को मिला लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार, अमित शाह ने बताया भारत की सुरक्षा रणनीति का प्रमुख स्तंभ

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें भारत की सुरक्षा

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval की भूमिका की सराहना करते हुए उन्हें देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम योगदान देने वाला व्यक्तित्व बताया।

Ajit Doval Lokmanya Tilak Award 2026: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित एक विशेष समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर शाह ने डोभाल के दशकों लंबे योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, रक्षा रणनीति को आधुनिक स्वरूप देने और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की दिशा में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।

यह सम्मान ऐसे समय में मिला है जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। समारोह में मौजूद कई गणमान्य व्यक्तियों ने डोभाल को देश की सुरक्षा संरचना के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में से एक बताया।

राष्ट्रीय सुरक्षा में अजीत डोभाल की भूमिका पर बोले अमित शाह

अपने संबोधन में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अजीत डोभाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मामलों में निर्णायक योगदान दिया है। उन्होंने दावा किया कि गुजरात में अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें डोभाल से एक महत्वपूर्ण सूचना मिली थी, जिसने देशभर में हुए इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कई सीरियल बम धमाकों की जांच को नई दिशा दी।

शाह ने कहा कि सुरक्षा मामलों की गहरी समझ, खुफिया तंत्र पर मजबूत पकड़ और रणनीतिक सोच के कारण डोभाल ने वर्षों तक देश के हित में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनके अनुभव का लाभ भारत को लगातार मिलता रहा है।

सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार

अजीत डोभाल भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर कार्य करने वाले व्यक्तियों में शामिल हैं। सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में उनकी विशेषज्ञता ने उन्हें देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, उनके कार्यकाल में भारत ने सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक सक्रिय और बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया। सीमाई सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी रणनीति, साइबर सुरक्षा और रक्षा आधुनिकीकरण जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण पहलें इसी अवधि में आगे बढ़ीं।

विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन से नीति निर्माण तक

अमित शाह ने अपने भाषण में अजीत डोभाल के उस दौर का भी उल्लेख किया जब वे Vivekananda International Foundation से जुड़े थे। शाह के अनुसार, उस समय राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श और शोध कार्य हुआ था। उन्होंने कहा कि वर्षों तक कई सुझाव और रणनीतिक विचार केवल दस्तावेजों और चर्चाओं तक सीमित रहे, लेकिन 2014 के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया, तब उन विचारों को नीति और क्रियान्वयन के स्तर पर लागू करने की दिशा में तेजी आई।

रक्षा और सुरक्षा ढांचे के आधुनिकीकरण में योगदान

समारोह के दौरान अमित शाह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की रक्षा क्षमता में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, नई तकनीकों के समावेश और सुरक्षा ढांचे को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने में डोभाल की रणनीतिक सलाह महत्वपूर्ण रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारत ने जिस तरह अपनी रक्षा और खुफिया क्षमताओं को मजबूत किया है, उसमें राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र की सक्रिय भूमिका रही है। डोभाल को इस परिवर्तन का प्रमुख वास्तुकार माना जाता है।

लोकमान्य तिलक पुरस्कार का महत्व

लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार भारत के प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है। यह सम्मान उन व्यक्तित्वों को दिया जाता है जिन्होंने राष्ट्र निर्माण, सार्वजनिक जीवन, नेतृत्व और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। इस वर्ष चयन समिति ने अजीत डोभाल को उनकी दीर्घकालिक सार्वजनिक सेवा, राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति समर्पण और रणनीतिक नेतृत्व के लिए चुना। पुरस्कार की घोषणा के बाद विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं और विशेषज्ञों ने उन्हें बधाई दी।

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