अमेरिका के साथ गठबंधन पर सवाल, ख्वाजा आसिफ ने खोली पुरानी परतें

पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को रणनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल कर बाद में छोड़ दिया गया।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को रणनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल कर बाद में छोड़ दिया गया। अफगान युद्धों में शामिल होने से आतंकवाद और अस्थिरता बढ़ी, जिसका खामियाजा आज भी देश भुगत रहा है।

Pakistan: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में दिया गया बयान देश के राजनीतिक और सैन्य इतिहास को लेकर एक बड़ा कबूलनामा माना जा रहा है। अपने भाषण में उन्होंने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वाशिंगटन ने अपने रणनीतिक हितों के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और फिर उसे “टॉयलेट पेपर” की तरह छोड़ दिया। आसिफ के मुताबिक, इसी नीति के चलते पाकिस्तान आज भी आतंकवाद, अस्थिरता और सामाजिक संकट से बाहर नहीं निकल पाया है।

1999 के बाद लिए गए फैसलों पर सवाल

ख्वाजा आसिफ ने कहा कि 1999 के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ दोबारा गठबंधन करने का जो फैसला लिया, उसने देश को स्थायी नुकसान पहुंचाया। खास तौर पर अफगानिस्तान से जुड़े मामलों में अमेरिका का साथ देने को उन्होंने एक गंभीर रणनीतिक भूल बताया। उनके अनुसार, उस समय लिए गए फैसलों के नतीजे आज भी पाकिस्तान भुगत रहा है और देश की सुरक्षा स्थिति कमजोर बनी हुई है।

अपने नहीं थे ये युद्ध

रक्षा मंत्री ने संसद में स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने खुद को ऐसे युद्धों में झोंक दिया, जो वास्तव में उसके अपने नहीं थे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह धारणा गलत थी कि अफगानिस्तान से जुड़े संघर्ष पाकिस्तान के धार्मिक या राष्ट्रीय हितों से जुड़े थे। उनके मुताबिक, पाकिस्तान ने बाहरी ताकतों के दबाव में आकर खुद को ऐसे संघर्षों का हिस्सा बनाया, जिनका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ा।

जिहाद की कहानी पर खुला बयान

ख्वाजा आसिफ ने लंबे समय से चली आ रही उस कहानी को भी खारिज किया, जिसमें अफगान युद्ध को धार्मिक कर्तव्य बताया जाता रहा। उन्होंने कहा कि लोगों को जिहाद के नाम पर एक भ्रामक narrative के जरिए लामबंद किया गया। इस narrative ने पाकिस्तान के भीतर उग्रवाद और अराजकता को बढ़ावा दिया। उनका कहना था कि इस सोच ने समाज को बांट दिया और कट्टरता को गहराई तक पहुंचा दिया।

शिक्षा प्रणाली में किए गए बदलाव

अपने बयान में आसिफ ने एक चौंकाने वाला खुलासा भी किया। उन्होंने कहा कि इन युद्धों को सही ठहराने के लिए पाकिस्तान की शिक्षा प्रणाली तक में बदलाव किए गए। विदेशी हितों से प्रेरित संघर्षों को जायज ठहराने के लिए वैचारिक परिवर्तन किए गए। उन्होंने माना कि यह सब देश के सामाजिक ताने-बाने के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हुआ।

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सोवियत विरोधी युद्ध पर साफ रुख

रक्षा मंत्री ने 1980 के दशक के सोवियत विरोधी युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि वह संघर्ष धर्म से नहीं बल्कि अमेरिकी भू-राजनीतिक लक्ष्यों से जुड़ा था। उनके अनुसार, उस दौर में पाकिस्तान ने अमेरिका के रणनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई। इसके बदले में पाकिस्तान को आर्थिक मदद तो मिली, लेकिन समाज और सुरक्षा व्यवस्था को भारी नुकसान हुआ।

पूर्व सैन्य शासकों पर आरोप

ख्वाजा आसिफ ने पूर्व सैन्य नेताओं की भूमिका पर भी खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने जनरल जिया-उल-हक और जनरल परवेज़ मुशर्रफ पर आरोप लगाया कि उन्होंने अल्पकालिक लाभ के लिए पाकिस्तान को बाहरी युद्धों में झोंक दिया। उनके फैसलों के कारण जब वैश्विक शक्तियां पीछे हट गईं, तब पाकिस्तान को आतंकवाद, कट्टरता और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।

9/11 के बाद की स्थिति

9/11 के बाद पाकिस्तान ने तालिबान के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी युद्ध का समर्थन किया। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि उस समय पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ खड़े होकर भारी कीमत चुकाई। जब वाशिंगटन ने अफगानिस्तान से अपनी सेनाएं वापस बुला लीं, तब पाकिस्तान हिंसा, अस्थिरता और सुरक्षा संकट के साथ अकेला रह गया।

सैनिकों के सम्मान पर सवाल

अपने भाषण में रक्षा मंत्री ने अप्रत्यक्ष रूप से यह भी स्वीकार किया कि पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को वह सम्मान नहीं दे पाया, जिसके वे हकदार थे। उनका कहना था कि देश ने जिन युद्धों में हिस्सा लिया, वे बाहरी हितों से प्रेरित थे, लेकिन उनकी कीमत पाकिस्तानी सैनिकों और आम नागरिकों ने चुकाई। इसके बावजूद, इन बलिदानों को सही संदर्भ में कभी स्वीकार नहीं किया गया।

आसिफ के मुताबिक, इन फैसलों की वजह से पाकिस्तान में आतंकवाद की जड़ें और मजबूत हुईं। उग्रवाद सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के भीतर फैल गया। आर्थिक नुकसान, सामाजिक अस्थिरता और वैश्विक स्तर पर बदनामी भी इन्हीं नीतियों का नतीजा है।

संसद में कबूलनामे की गूंज

रक्षा मंत्री का यह बयान पाकिस्तान की राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है। संसद में खुले तौर पर अमेरिका पर आरोप लगाना और अपनी ही नीतियों की आलोचना करना असामान्य माना जा रहा है। यह बयान उन दावों की भी पुष्टि करता है, जिनमें कहा जाता रहा है कि पाकिस्तान ने दशकों तक बाहरी ताकतों के हितों के लिए अपनी नीतियां बदलीं।

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