अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव को लेकर राजनीतिक और वैचारिक मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों ने मंच से अपने भाषणों में सावरकर से लेकर उमर खालिद तक का जिक्र किया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में हुए लाठीचार्ज का मुद्दा भी उठाया गया। प्रत्याशियों ने छात्रों के सामने अपनी बातें रखते हुए विश्वविद्यालय के माहौल, छात्र अधिकारों और प्रशासन की भूमिका से जुड़े सवाल उठाए।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में करीब आठ साल बाद हो रहे छात्रसंघ चुनाव को लेकर कैंपस का माहौल चुनावी रंग में रंग गया है। मंगलवार को अध्यक्ष उपाध्यक्ष और सचिव पद के प्रत्याशियों ने यूनियन हॉल की छत से विद्यार्थियों के सामने अपने विचार रखे। इन भाषणों में केवल छात्रहित और विश्वविद्यालय की समस्याओं की बात नहीं हुई बल्कि देश की राजनीति और अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। कुछ प्रत्याशियों ने अपने भाषण में वीर सावरकर का जिक्र किया तो कुछ ने उमर खालिद शरजील इमाम सफूरा जरगर और आफरीन फातिमा जैसे नामों का उल्लेख किया।
चुनावी भाषणों के दौरान प्रत्याशियों ने अपने विचारों के माध्यम से छात्रों को यह बताने की कोशिश की कि वे विश्वविद्यालय और देश के भविष्य को किस नजरिए से देखते हैं। एक प्रत्याशी मोहम्मद इंतखाब ने अपने भाषण और चुनावी संदेश में उमर खालिद शरजील इमाम सफूरा जरगर और आफरीन फातिमा का जिक्र किया। उन्होंने इन लोगों की गिरफ्तारी और जेल में रखे जाने के मुद्दे पर आवाज उठाने की बात कही। इसके साथ ही विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों का भी विरोध किया।
दूसरी ओर प्रत्याशी नोमान अशरफ ने अपने विचार रखते हुए कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्था के दायरे में रहकर अपनी बात रखने की बात कही। उन्होंने शरजील इमाम से जुड़े मुद्दे का भी उल्लेख किया। इन बयानों के बाद कैंपस में प्रत्याशियों की विचारधारा और उनके चुनावी एजेंडे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष नदीम अंसारी ने भी कुछ प्रत्याशियों के बयानों पर असहमति जताई और छात्रों से अपील की कि वे मतदान से पहले उम्मीदवारों की विचारधारा उनके काम और प्राथमिकताओं को समझें।
प्रत्याशियों के भाषणों में विश्वविद्यालय परिसर में हुए लाठीचार्ज का मुद्दा भी उठाया गया। छात्रों ने पुराने घटनाक्रम और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल किए। चुनावी मंच से यह मुद्दा उठने के बाद छात्र आंदोलन और प्रशासन के साथ हुए विवादों की चर्चा फिर शुरू हो गई है। प्रत्याशियों ने छात्र अधिकारों और विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की आवाज को महत्व देने की बात कही।
एएमयू में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर सितंबर से ही छात्रों का आंदोलन चल रहा था। विद्यार्थियों की प्रमुख मांगों में छात्रसंघ चुनाव कराने के साथ प्रॉक्टर को हटाने और छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर पुनर्विचार करना शामिल था। करीब 20 दिनों तक चले आंदोलन और भूख हड़ताल के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव कराने की घोषणा की थी। इसके बाद नए प्रॉक्टर की नियुक्ति भी की गई और चुनाव कार्यक्रम जारी हुआ।
इस बार एएमयू छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष उपाध्यक्ष सचिव कैबिनेट सदस्य और एएमयू कोर्ट सदस्य जैसे पदों के लिए नामांकन दाखिल किए गए हैं। कुल 151 नामांकन प्राप्त हुए थे। नामांकन प्रक्रिया के दौरान भी छात्रों के बीच विवाद और हंगामे की स्थिति बनी थी। एक प्रत्याशी मोहम्मद साबिर हुसैन का नामांकन पहले वैध पाया गया था लेकिन बाद में करीब 70 घंटे बाद उसे निरस्त कर दिया गया। इस फैसले को लेकर भी कैंपस में विरोध और सवाल उठे।
मंगलवार को आयोजित फाइनल स्पीच के लिए प्रत्येक प्रत्याशी को पांच मिनट का समय दिया गया और एक मिनट अतिरिक्त रखने की अनुमति भी दी गई। भाषण का निर्धारित विषय राष्ट्र निर्माण में छात्र नेतृत्व का योगदान था। प्रत्याशियों को अपनी प्राथमिकताओं और छात्र नेतृत्व की भूमिका पर विचार रखने थे। कार्यक्रम के दौरान भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
अब पांच नवंबर को विश्वविद्यालय में मतदान होना है। मतदान सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक संबंधित संकायों में कराया जाएगा। इसके बाद शाम सात बजे से मतगणना शुरू होने का कार्यक्रम निर्धारित है। आठ साल के अंतराल के बाद हो रहे इस चुनाव में छात्रों की नजर इस बात पर है कि नया छात्रसंघ विश्वविद्यालय की समस्याओं और विद्यार्थियों की मांगों को किस तरह उठाएगा। चुनावी भाषणों में सावरकर से लेकर उमर खालिद तक के नामों का जिक्र और लाठीचार्ज का मुद्दा उठने से साफ है कि इस बार कैंपस में छात्रहित के साथ वैचारिक बहस भी चुनाव का अहम हिस्सा बन गई है।











