इंग्लैंड में सोशल केयर सुधार को लेकर एंडी बर्नहैम ने कहा कि बेहतर व्यवस्था के लिए कठिन वित्तीय फैसले लेने होंगे। उन्होंने केयर वर्कर्स के वेतन, प्रशिक्षण और राष्ट्रीय केयर सेवा की जरूरत पर जोर दिया, जबकि सरकार व्यापक सुधार की तैयारी कर रही है।
लंदन: इंग्लैंड में वयस्क सोशल केयर (Adult Social Care) व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चल रही बहस अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। सोशल केयर सुधार को लेकर दिए गए एक महत्वपूर्ण भाषण में एंडी बर्नहैम ने कहा कि देश को बेहतर और टिकाऊ देखभाल व्यवस्था के लिए "कठिन फैसले" लेने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग जरूरी है, लेकिन व्यापक सुधारों के लिए अतिरिक्त वित्तीय व्यवस्था की भी आवश्यकता पड़ेगी। बर्नहैम का यह बयान ऐसे समय आया है जब इंग्लैंड की स्वास्थ्य और सामाजिक देखभाल व्यवस्था बढ़ती बुजुर्ग आबादी, दिव्यांग लोगों की बढ़ती जरूरतों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।
सोशल केयर को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की अपील
अपने संबोधन में बर्नहैम ने कहा कि सोशल केयर केवल बुजुर्गों की देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाखों दिव्यांग, गंभीर बीमारी से जूझ रहे और दैनिक सहायता पर निर्भर लोगों के जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि यदि समाज को सम्मानजनक और समावेशी बनाना है तो सोशल केयर प्रणाली को स्वास्थ्य सेवाओं के बराबर महत्व देना होगा।
केयर वर्कर्स को बेहतर वेतन और प्रशिक्षण की जरूरत
बर्नहैम ने सोशल केयर कर्मचारियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जो लोग दूसरों की देखभाल करते हैं, उन्हें समाज में अधिक सम्मान और बेहतर वेतन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कई केयर वर्कर्स कम वेतन, सीमित प्रशिक्षण और अत्यधिक कार्यभार का सामना कर रहे हैं। यदि गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित करनी हैं तो इस क्षेत्र में पेशेवर प्रशिक्षण, करियर विकास और बेहतर वेतन संरचना आवश्यक होगी।
राष्ट्रीय केयर सेवा (National Care Service) पर जोर
भाषण के दौरान यह भी पुष्टि की गई कि सोशल केयर व्यवस्था की समीक्षा तय समय से पहले पूरी की जाएगी। समीक्षा रिपोर्ट अब 2027 में पेश किए जाने की योजना है। इस समीक्षा में इंग्लैंड के लिए राष्ट्रीय केयर सेवा (National Care Service) स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। यदि ऐसा मॉडल लागू होता है, तो यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) की तरह अधिक संगठित और समान अवसर आधारित सोशल केयर व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।
फंडिंग सबसे बड़ी चुनौती
सोशल केयर सुधार पर सबसे बड़ा सवाल हमेशा फंडिंग का रहा है। बर्नहैम ने स्वीकार किया कि वर्तमान संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग किया जा सकता है, लेकिन व्यापक सुधारों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार को भविष्य में कुछ कठिन आर्थिक निर्णय लेने पड़ सकते हैं ताकि सोशल केयर प्रणाली को स्थायी रूप से मजबूत किया जा सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान से भविष्य में कर व्यवस्था या अन्य राजस्व स्रोतों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सोशल केयर वास्तव में क्या है?
सोशल केयर उन लोगों को सहायता प्रदान करने वाली व्यवस्था है जो उम्र, बीमारी, दिव्यांगता या अन्य कारणों से दैनिक जीवन के कार्य स्वयं नहीं कर सकते। इसमें नहाना, कपड़े पहनना, भोजन तैयार करना, घर से बाहर जाना, दवाओं का प्रबंधन और व्यक्तिगत सहायता जैसी सेवाएं शामिल होती हैं। यूनाइटेड किंगडम में सोशल केयर एक विकेंद्रीकृत विषय है। इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड अपनी-अपनी नीतियों के अनुसार इसकी व्यवस्था संचालित करते हैं।
दिव्यांग युवाओं की चुनौतियां भी सामने आईं
सोशल केयर सुधार की बहस के दौरान कई ऐसे लोगों की कहानियां सामने आईं जो इस व्यवस्था पर निर्भर हैं। ऐसे ही एक युवा पेशेवर ने बताया कि स्थानीय परिषद से मिलने वाली सहायता के कारण वह स्वतंत्र जीवन जी पा रहा है और नौकरी शुरू करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, मौजूदा नियमों के अनुसार यदि उसकी बचत एक निश्चित सीमा से अधिक हो जाती है तो उसे सरकारी सहायता मिलना बंद हो सकती है
उनका कहना है कि इससे दिव्यांग लोगों के लिए आर्थिक रूप से आगे बढ़ना कठिन हो जाता है और भविष्य की योजनाएं, जैसे अपना घर खरीदना, लगभग असंभव लगने लगता है।
बिना वेतन देखभाल करने वालों की भी बढ़ी चिंता
बहुत से परिवार ऐसे हैं जहां परिजन बिना किसी आर्थिक सहायता के अपने बीमार या बुजुर्ग रिश्तेदारों की देखभाल करते हैं। ऐसे देखभालकर्ताओं का कहना है कि लगातार मानसिक और शारीरिक दबाव के कारण उनका अपना स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेशेवर देखभाल सेवाओं का विस्तार कर इन परिवारों का बोझ कम किया जा सकता है।
सुधार के संभावित विकल्प
विशेषज्ञों के अनुसार सोशल केयर सुधार के लिए कई विकल्पों पर चर्चा की जा रही है। इनमें जीवनभर के देखभाल खर्च की अधिकतम सीमा तय करना, आर्थिक सहायता पाने के लिए संपत्ति सीमा में बदलाव, पात्र लोगों के लिए मुफ्त व्यक्तिगत देखभाल उपलब्ध कराना और राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत केयर सेवा स्थापित करना शामिल है। हर विकल्प के साथ अलग-अलग वित्तीय लागत और प्रशासनिक चुनौतियां जुड़ी हुई हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ेगा सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोशल केयर व्यवस्था मजबूत होती है तो अस्पतालों पर भी दबाव कम होगा। अक्सर बुजुर्ग मरीज इलाज पूरा होने के बाद भी केवल इसलिए अस्पताल में रहते हैं क्योंकि उनके घर पर पर्याप्त देखभाल उपलब्ध नहीं होती। बेहतर सोशल केयर व्यवस्था से ऐसे मरीज समय पर घर लौट सकेंगे और अस्पतालों में नए मरीजों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे।
आगे की राह
इंग्लैंड में सोशल केयर सुधार अब केवल स्वास्थ्य नीति का विषय नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन चुका है। आने वाले वर्षों में सरकार को यह तय करना होगा कि बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त संसाधन कैसे जुटाए जाएं और ऐसी व्यवस्था कैसे विकसित की जाए जो बुजुर्गों, दिव्यांग लोगों, उनके परिवारों और देखभाल करने वाले कर्मचारियों सभी की जरूरतों को संतुलित रूप से पूरा कर सके।











