अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे जिले में एक जलविद्युत परियोजना स्थल पर भूस्खलन में असम के एक श्रमिक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल हो गया। प्रशासन ने घटना की पुष्टि करते हुए राहत और सहायता का आश्वासन दिया है।
ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे जिले में स्थित एक जलविद्युत परियोजना (हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट) में मंगलवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हुआ। परियोजना स्थल पर अचानक हुए भूस्खलन में असम के एक श्रमिक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य श्रमिक घायल हो गया। घटना ने एक बार फिर पूर्वोत्तर भारत में मानसून के दौरान निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था और भू-स्खलन के बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिला प्रशासन के अनुसार, यह हादसा मंगलवार दोपहर लगभग तीन बजे उस समय हुआ जब पहाड़ी ढलान से अचानक भारी मात्रा में मिट्टी, मलबा और बड़े पत्थर नीचे आ गिरे। उस समय परियोजना स्थल पर निर्माण कार्य जारी था और कई श्रमिक काम में लगे हुए थे।
मृतक की पहचान असम के नोबिन डोले के रूप में
जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी (DIPRO) के अनुसार, इस हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिक की पहचान नोबिन डोले के रूप में हुई है। वह असम के धेमाजी जिले के निवासी थे और परियोजना में कार्यरत थे। हादसे में घायल हुए दूसरे श्रमिक को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। अधिकारियों के अनुसार, घायल श्रमिक की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
कैसे हुआ हादसा?
प्रशासन की प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, परियोजना क्षेत्र की पहाड़ी ढलान अचानक अस्थिर हो गई, जिसके बाद भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें तेजी से नीचे आ गईं। इस अप्रत्याशित भूस्खलन की चपेट में निर्माण स्थल पर मौजूद श्रमिक आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना इतनी अचानक हुई कि श्रमिकों को सुरक्षित स्थान पर जाने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। हादसे के तुरंत बाद परियोजना प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान शुरू किया।
मानसून में बढ़ जाता है भूस्खलन का खतरा
पूर्वोत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों—अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम—में मानसून के दौरान भूस्खलन की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार होने वाली भारी बारिश से पहाड़ों की मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे ढलानों के खिसकने और चट्टानों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। सड़क निर्माण, सुरंग, जलविद्युत परियोजनाएं और अन्य बड़े निर्माण कार्य ऐसे क्षेत्रों में अतिरिक्त जोखिम का सामना करते हैं।
परियोजना स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में कार्य शुरू करने से पहले भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, ढलानों की निगरानी और मौसम आधारित जोखिम मूल्यांकन अनिवार्य होना चाहिए। इसके अलावा श्रमिकों के लिए समय-समय पर सुरक्षा प्रशिक्षण, आपातकालीन निकासी योजना और आधुनिक चेतावनी प्रणाली भी जरूरी है, ताकि अचानक होने वाली प्राकृतिक घटनाओं में जान-माल का नुकसान कम किया जा सके।
प्रशासन ने जताया शोक
कुरुंग कुमे जिला प्रशासन ने मृतक श्रमिक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। अधिकारियों ने कहा कि प्रभावित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन ने यह भी बताया कि घटना की परिस्थितियों की समीक्षा की जा रही है और परियोजना स्थल की सुरक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
पूर्वोत्तर में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की चुनौती
अरुणाचल प्रदेश में कई बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्र में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना और आर्थिक विकास को गति देना है। हालांकि, इन परियोजनाओं का अधिकांश हिस्सा दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में स्थित है, जहां मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां निर्माण कार्य को चुनौतीपूर्ण बना देती हैं। मानसून के दौरान लगातार बारिश के कारण सड़क संपर्क, मशीनरी की आवाजाही और श्रमिकों की सुरक्षा प्रभावित होती है। ऐसे में परियोजना प्रबंधन और प्रशासन के लिए सुरक्षा उपायों को और मजबूत करना आवश्यक हो जाता है।
विशेषज्ञों की राय
भू-विज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्य के दौरान लगातार भू-निगरानी (Geotechnical Monitoring) और वर्षा के आधार पर जोखिम विश्लेषण बेहद जरूरी है। यदि समय रहते ढलानों की गतिविधियों पर नजर रखी जाए तो कई दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है। इसके साथ ही आधुनिक सेंसर, ड्रोन सर्वेक्षण और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली का उपयोग भी ऐसी परियोजनाओं में सुरक्षा बढ़ाने में मदद कर सकता है।
स्थानीय लोगों में चिंता
घटना के बाद आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और परियोजना में कार्यरत अन्य श्रमिकों के बीच चिंता का माहौल है। कई लोगों का कहना है कि मानसून के दौरान सुरक्षा उपायों को और सख्ती से लागू किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों से बचा जा सके। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से बारिश के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्क रहने और किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना तुरंत अधिकारियों को देने की अपील की है।











