गहलोत ने BJP पर निकाय चुनाव में सत्ता और धनबल के इस्तेमाल का लगाया आरोप

अशोक गहलोत ने राजस्थान निकाय चुनाव के बाद BJP पर सरकारी संसाधनों, पुलिस-प्रशासन और धनबल के कथित इस्तेमाल का आरोप लगाया। BJP ने आरोप खारिज किए।

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव पूरे होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर सरकारी संसाधनों, पुलिस-प्रशासन और धनबल के कथित इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने परिसीमन और मेयर-चेयरमैन चुनाव की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नगरीय निकाय चुनावों के बाद भाजपा सरकार पर चुनाव प्रक्रिया में सत्ता और सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। 26 सितंबर को X पर किए गए एक पोस्ट में गहलोत ने मेयर और चेयरमैन के चुनाव, परिसीमन तथा धनबल के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए। उनके आरोपों के मुताबिक, कई जगह जनादेश प्रभावित हुआ।

गहलोत ने चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल

राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव पूरे होने के बाद अशोक गहलोत ने चुनाव प्रक्रिया और इसके परिणामों को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। गहलोत ने आरोप लगाया कि इस बार के चुनाव में सत्ता, सरकारी संसाधनों और धनबल का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि आम लोगों के बीच यह धारणा बनी है कि भाजपा ने धनबल के आधार पर मेयर और चेयरमैन बनाए हैं।

गहलोत ने अपने बयान में यह भी कहा कि सामान्य तौर पर किसी शहर में नया मेयर या सभापति चुने जाने के बाद लोगों में उत्साह रहता है। उनके अनुसार, इस बार चुनाव परिणामों के बाद ऐसा माहौल दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने इसके पीछे जनादेश के सम्मान को लेकर उठ रहे सवालों का जिक्र किया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आने वाले समय में भाजपा निकायों को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। यह गहलोत का राजनीतिक आरोप है, जिसे उन्होंने अपने बयान के दौरान रखा है।

परिसीमन में मनमानी का भी लगाया आरोप

गहलोत ने निकाय चुनाव से पहले हुए परिसीमन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन के दौरान कांग्रेस समर्थित तीन-चार वार्डों को मिलाकर एक वार्ड बनाया गया, जबकि भाजपा समर्थक इलाकों में एक वार्ड को दो-तीन वार्डों में बांट दिया गया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि परिसीमन के दौरान स्थिति यहां तक पहुंच गई कि एक ही घर में रहने वाले पति-पत्नी और परिवार के सदस्यों के वोट अलग-अलग वार्डों में चले गए। गहलोत ने इसे चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कदम बताया।

इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन के बाद भी करीब एक साल तक निकाय चुनाव टाले गए और हाईकोर्ट की फटकार के बाद चुनाव कराने पड़े। इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित प्रशासनिक या न्यायिक रिकॉर्ड अलग से देखना जरूरी होगा।

मेयर-चेयरमैन चुनाव में पुलिस और प्रशासन के इस्तेमाल का दावा

गहलोत ने मेयर और अध्यक्ष पदों के चुनाव को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इन चुनावों में पुलिस, प्रशासन और धनबल का कथित दुरुपयोग किया गया। उनका दावा था कि जनता के बीच यह चर्चा है कि इस बार भाजपा के बजाय सरकारी बाहुबल और धनबल के जरिए मेयर और अध्यक्ष बनाए गए।

गहलोत ने यह भी कहा कि कई जगह कांग्रेस को भाजपा से ज्यादा वोट मिले, लेकिन उनके मुताबिक परिसीमन के कारण कांग्रेस के पार्षदों की संख्या कम रही। उन्होंने इसे चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल बताया।

गहलोत ने सत्ता के दुरुपयोग को लेकर जताई चिंता

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में आजादी के बाद पहली बार सत्ता और धनबल के इस तरह के कथित इस्तेमाल की स्थिति सामने आई है। उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए खास तौर पर पहली बार मतदान करने वाले युवाओं और Gen-Z मतदाताओं के संदर्भ में भी अपनी चिंता जाहिर की।

हालांकि, गहलोत द्वारा लगाए गए ये आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। निकाय चुनावों में भाजपा की ओर से भी इन आरोपों को खारिज किया गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पहले कहा था कि पार्टी ने सत्ता का दुरुपयोग नहीं किया और पार्षद अपनी पसंद के अनुसार मतदान करने के लिए स्वतंत्र हैं।

गहलोत ने निकाय चुनाव में जीतने वाले कांग्रेस के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बधाई भी दी। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से आगामी पंचायतीराज चुनावों के लिए संगठन को मजबूत करने और पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहने का आह्वान किया।

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