आयुर्वेद में हजारों वर्षों से इस्तेमाल की जा रही जड़ी-बूटी अश्वगंधा आज पूरी दुनिया में एक लोकप्रिय सप्लीमेंट बन चुकी है। तनाव कम करने, नींद सुधारने और शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है।
लेकिन हाल ही में भारत की खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण FSSAI ने अश्वगंधा सप्लीमेंट्स को लेकर एक सख्त एडवाइजरी जारी की है, जिससे हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है।
FSSAI की सख्त हिदायत क्या है?
FSSAI ने स्पष्ट किया है कि अश्वगंधा आधारित सप्लीमेंट्स में केवल पौधे की जड़ (root) का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
एजेंसी के अनुसार, बाजार में कुछ कंपनियां लाभ बढ़ाने के लिए अश्वगंधा की पत्तियों (leaves) का इस्तेमाल कर रही थीं, जबकि इसके औषधीय गुण मुख्य रूप से जड़ों में पाए जाते हैं।
इसी कारण अब नियमों को और सख्त किया गया है ताकि उपभोक्ताओं को गलत या अधूरे उत्पाद न मिलें।
अश्वगंधा की जड़ और पत्तियों में अंतर
अश्वगंधा के अलग-अलग हिस्सों का शरीर पर अलग प्रभाव होता है। यही वजह है कि FSSAI ने इस पर खास ध्यान दिया है।
- अश्वगंधा की जड़ (Root)
- तनाव (Stress) कम करने में मददगार
- कॉर्टिसोल हार्मोन को नियंत्रित करता है
- नींद सुधारने में सहायक
- शरीर की ताकत और स्टैमिना बढ़ाता है
- सामान्य कमजोरी में लाभकारी
- ज्यादातर आयुर्वेदिक सप्लीमेंट इसी हिस्से से बनाए जाते हैं।
- अश्वगंधा की पत्तियां (Leaves)
- कुछ शोधों में घाव भरने में उपयोगी
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हल्के डिटॉक्स प्रभाव
- वजन घटाने से जुड़े कुछ प्रयोगों में उपयोग
- लेकिन सप्लीमेंट्स में इसके प्रभाव जड़ जितने व्यापक नहीं माने जाते।
सप्लीमेंट इंडस्ट्री पर क्यों उठे सवाल?
भारत में हर्बल और आयुर्वेदिक सप्लीमेंट्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अश्वगंधा इसका एक प्रमुख हिस्सा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ कंपनियां लागत कम करने के लिए जड़ों की जगह पत्तियों का इस्तेमाल कर रही थीं, क्योंकि:
अश्वगंधा की जड़ महंगी होती है
- पत्तियां सस्ती और आसानी से उपलब्ध होती हैं
- मुनाफा बढ़ाने के लिए गलत मिश्रण किया जाता है
भारत में अश्वगंधा जड़ की कीमत लगभग 300 से 500 रुपये प्रति किलो तक होती है, जबकि पत्तियां 35 से 50 रुपये प्रति किलो में मिल जाती हैं।
FSSAI का उद्देश्य क्या है?
FSSAI का मुख्य उद्देश्य है:
- उपभोक्ताओं को सुरक्षित और सही उत्पाद देना
- गलत लेबलिंग और मिलावट रोकना
- आयुर्वेदिक उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखना
सप्लीमेंट इंडस्ट्री में पारदर्शिता लाना
इस कदम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अश्वगंधा के नाम पर बेचे जाने वाले सभी उत्पाद मानकों के अनुरूप हों।
अश्वगंधा के फायदे (सही तरीके से इस्तेमाल करने पर)
जब सही हिस्से (जड़) का उपयोग किया जाता है, तो अश्वगंधा के कई फायदे देखे जाते हैं:
- तनाव और चिंता में कमी
- बेहतर नींद
- इम्यून सिस्टम मजबूत होना
- शरीर की ऊर्जा में वृद्धि
- मानसिक फोकस में सुधार
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सावधानियां
अगर आप अश्वगंधा सप्लीमेंट लेते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
1. लेबल जरूर पढ़ें
देखें कि उत्पाद में “root extract” लिखा है या नहीं।
2. भरोसेमंद ब्रांड चुनें
सिर्फ प्रमाणित और रेगुलेटेड कंपनियों के उत्पाद लें।
3. डॉक्टर की सलाह लें
खासकर अगर आप किसी बीमारी या दवा पर हैं।
4. मात्रा का ध्यान रखें
अधिक मात्रा में सेवन नुकसानदायक हो सकता है।
5. बिना जानकारी के प्रयोग न करें
हर्बल होने का मतलब यह नहीं कि यह पूरी तरह सुरक्षित है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती हर्बल निगरानी
आज पूरी दुनिया में हर्बल और नेचुरल सप्लीमेंट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका, यूरोप और एशिया में भी इन उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सख्त नियम बनाए जा रहे हैं।
FSSAI का यह कदम भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है ताकि भारत से निर्यात होने वाले उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतर सकें।






