असम में रोंगाली बिहू 2026 की तैयारियां पूरे जोश पर हैं। वसंत ऋतु और नववर्ष के इस पर्व को लेकर गांवों और शहरों में उत्सव का माहौल है। पारंपरिक व्यंजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बाजारों में बढ़ी रौनक ने पूरे राज्य को बिहू के रंग में रंग दिया है।
Rongali Bihu 2026: असम में 14 अप्रैल 2026 को मनाए जा रहे रोंगाली बिहू को लेकर पूरे राज्य में उत्साह का माहौल है। यह पर्व वसंत ऋतु और असमिया नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, जिसे गांवों और शहरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है। चुनावी गतिविधियों के शांत होने के बाद लोगों ने इस बार त्योहार की तैयारियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। घरों में पारंपरिक व्यंजन बन रहे हैं, सांस्कृतिक अभ्यास चल रहा है और बाजारों में रौनक लौट आई है, जिससे पूरा असम उत्सव के रंग में नजर आ रहा है।
असम में रोंगाली बिहू की तैयारियां जोरों पर
रोंगाली बिहू, जिसे बोहाग बिहू भी कहा जाता है, असम का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पर्व है। यह वसंत ऋतु के आगमन और नए साल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, जो कृषि परंपराओं से गहराई से जुड़ा है।
इस बार चुनावी गतिविधियों के शांत होते ही लोगों को पूरे उत्साह के साथ त्योहार मनाने का अवसर मिला है। गांवों और शहरों में बिहू की तैयारियां तेज हो गई हैं और हर तरफ उत्सव जैसा माहौल दिखाई दे रहा है।

पारंपरिक व्यंजन और संस्कृति से सजा असम
घरों में पारंपरिक व्यंजन जैसे पिठा, लारू, चिरा, दही और अखोई तैयार किए जा रहे हैं। इन व्यंजनों की खुशबू से पूरा वातावरण त्योहारमय हो गया है और लोग इन्हें आपसी मेल-जोल के प्रतीक के रूप में साझा कर रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों में आज भी ढेकी की आवाज और बिहू के पारंपरिक वाद्य यंत्र जैसे ढोल, पेपा और गोगोना की धुनें माहौल को जीवंत बना रही हैं। युवा पीढ़ी बिहू नृत्य और गीतों की तैयारियों में जुटी हुई है।
बाजारों में लौटी रौनक, कारोबार में तेजी
चुनाव के दौरान सुस्त पड़े बाजार अब फिर से सक्रिय हो गए हैं। पारंपरिक परिधानों जैसे मेखला चादर और गमछा की मांग तेजी से बढ़ी है, जिससे व्यापारियों में नई उम्मीद जगी है।
स्थानीय कारोबारियों के अनुसार बिहू सीजन ने व्यापार को फिर से गति दी है। हथकरघा उद्योग और पारंपरिक वस्त्रों की बिक्री में खास बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिससे छोटे व्यापारियों और कारीगरों को राहत मिली है।








