असम बाढ़ संकट: 68 लोगों की मौत, 6.54 लाख से अधिक प्रभावित; राहत और पुनर्वास अभियान तेज

असम में बाढ़ से 68 लोगों की मौत और 6.54 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राहत व पुनर्वास अभियान तेज किया, बचाव कार्य चला रही।

असम में बाढ़ से अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है और 6.54 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राहत एवं पुनर्वास अभियान तेज करते हुए मंत्रियों को प्रभावित जिलों में तैनात किया है, जबकि केंद्र सरकार भी बचाव कार्यों में सहयोग कर रही है।

गुवाहाटी: असम में इस वर्ष की मानसूनी बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। राज्य आपदा रिपोर्टिंग एवं सूचना प्रबंधन प्रणाली (DRIMS) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ से अब तक 68 लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि ऊपरी असम के कई इलाकों में जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है, लेकिन लाखों लोग अभी भी बाढ़ के प्रभाव से जूझ रहे हैं। राज्य सरकार ने अब राहत, पुनर्वास और आवश्यक सेवाओं की बहाली पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की है कि प्रभावित जिलों में राहत कार्यों की निगरानी और समन्वय के लिए मंत्रियों की तैनाती की जाएगी, ताकि सहायता तेजी और प्रभावी ढंग से जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।

सबसे अधिक प्रभावित जिले

राज्य सरकार के अनुसार, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, चिकित्सा सेवाएं तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। शिवसागर जिला सबसे अधिक प्रभावित माना जा रहा है, जहां लगभग 2.9 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन स्थानीय स्तर पर लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और जलस्तर घटने के साथ पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

बिजली आपूर्ति बहाल करने की कवायद

बाढ़ के दौरान सुरक्षा कारणों से कई इलाकों में बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी गई थी। अब जलस्तर कम होने के बाद असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (APDCL) चरणबद्ध तरीके से बिजली बहाल कर रही है। बिजली आपूर्ति शुरू करने से पहले तकनीकी दल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा निरीक्षण कर रहे हैं ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना न रहे। सरकार का कहना है कि आवश्यक सेवाओं की शीघ्र बहाली पुनर्वास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त अभियान

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बाढ़ की स्थिति को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर राहत सामग्री वितरण, बचाव अभियान और प्रभावित क्षेत्रों में सहायता पहुंचाने का काम कर रही हैं। इसके अलावा, एक उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी दल भी नुकसान का आकलन करने के लिए राज्य का दौरा कर रहा है।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ राहत कार्य में सक्रिय

सोनोवाल ने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) लगातार राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं। इन एजेंसियों की टीमें नावों और विशेष उपकरणों की मदद से फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, राहत सामग्री वितरित करने और आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने में जुटी हुई हैं।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान

असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि बाढ़ से कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचा है। हजारों हेक्टेयर खेती योग्य भूमि जलमग्न होने के कारण किसानों की फसलें नष्ट हो गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, करीब 35 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि अब भी पानी में डूबी हुई है। इससे खरीफ सीजन की खेती पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

राहत शिविरों में हजारों लोग

प्रभावित परिवारों के लिए विभिन्न जिलों में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। केवल शिवसागर जिले में ही 40 से अधिक राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां लगभग 20 हजार लोगों को अस्थायी आश्रय दिया गया है। इन शिविरों में भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता और बच्चों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का लक्ष्य है कि जलस्तर सामान्य होते ही विस्थापित परिवारों को सुरक्षित रूप से उनके घरों तक पहुंचाया जाए।

10 जिलों में 6.54 लाख से अधिक लोग प्रभावित

25 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गोलाघाट, चराइदेव, कामरूप, होजाई, डिब्रूगढ़, शिवसागर, जोरहाट, सोनितपुर, कामरूप (मेट्रो) और नगांव सहित 10 जिलों में 6.54 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 810 गांव अब भी जलमग्न हैं। कई सड़कें, पुल और ग्रामीण संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में कठिनाइयां आ रही हैं।

नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर

केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, शिवसागर में दिखौ नदी और नुमालीगढ़ क्षेत्र में दक्षिण धानसिरी नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन इन नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रख रहा है और निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारी वर्षा दोबारा होती है तो कुछ क्षेत्रों में स्थिति फिर गंभीर हो सकती है। इसलिए निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणाली को सक्रिय रखा गया है।

पुनर्वास सबसे बड़ी चुनौती

हालांकि कई क्षेत्रों में बाढ़ का पानी कम हो रहा है, लेकिन प्रभावित लोगों के लिए सामान्य जीवन में लौटना आसान नहीं होगा। घरों, फसलों, पशुधन और स्थानीय बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की भरपाई में समय लगेगा। राज्य सरकार का कहना है कि राहत कार्यों के साथ-साथ पुनर्वास, कृषि सहायता, बिजली बहाली, सड़क मरम्मत और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि प्रभावित परिवार जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौट सकें।

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