Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust से जुड़े चढ़ावे में कथित हेरफेर के मामले को लेकर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के अचानक सामने आने और बयान देने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।
अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में दान राशि के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी रहने के दौरान मंदिर ट्रस्ट से जुड़े एक सहयोगी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के सार्वजनिक रूप से सामने आने और अपना पक्ष रखने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
यह मामला 6 जून को सामने आया था, जब मंदिर में दान राशि के प्रबंधन और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जांच शुरू हुई। इसके बाद विशेष जांच दल (एसआईटी) मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रहा है।
जांच के बीच टिन्नू यादव का सार्वजनिक बयान
मामले के सामने आने के बाद कई दिनों तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं देने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव ने हाल ही में वीडियो संदेश जारी किया और विभिन्न मीडिया संस्थानों से बातचीत की। उनके इस कदम ने कई सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
हालांकि, अब तक इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि उनका बयान किसी विशेष रणनीति का हिस्सा था। अपने बयानों में टिन्नू यादव ने मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के पक्ष में अपनी बात रखी और अन्य प्रशासनिक पहलुओं पर भी सवाल उठाए।
एसआईटी की जांच जारी
विशेष जांच दल लगातार मंदिर परिसर और दान राशि के प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों तथा प्रक्रियाओं की जांच कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान निगरानी व्यवस्था और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से संबंधित कुछ तकनीकी पहलुओं की भी समीक्षा की गई है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में सीसीटीवी फुटेज के साथ संभावित छेड़छाड़ की आशंका जताई गई है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
एसआईटी ने मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित बैंक अधिकारियों से पूछताछ की है। टिन्नू यादव से भी विस्तृत पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है।
![]()
दान प्रबंधन प्रणाली भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियां केवल कथित वित्तीय अनियमितताओं की ही नहीं, बल्कि दान राशि की पूरी प्रक्रिया की भी समीक्षा कर रही हैं। मंदिर में दान की गिनती और बैंकिंग प्रक्रिया में कई स्तरों की भागीदारी होती है। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान बैंकिंग प्रक्रियाओं और प्रशासनिक निगरानी से जुड़े कुछ पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है।
हालांकि, इस संबंध में किसी संस्था या अधिकारी की जिम्मेदारी अभी तक आधिकारिक रूप से तय नहीं की गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े कुछ प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हालांकि, जांच एजेंसियों ने अब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ औपचारिक आरोपों की घोषणा नहीं की है।
कुछ रिपोर्टों में ट्रस्ट से जुड़े अन्य अधिकारियों के बारे में भी चर्चा की गई है, लेकिन उनकी स्थिति और संभावित पूछताछ को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी संवेदनशील जांच में सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा
इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा भी प्रस्तावित है। उनके कार्यक्रम में धार्मिक और प्रशासनिक दोनों तरह की गतिविधियां शामिल हैं। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से इस दौरे को सीधे जांच प्रक्रिया से जोड़कर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। फिर भी, मामले की संवेदनशीलता के कारण इस दौरे पर राजनीतिक और सार्वजनिक नजर बनी हुई है।
अयोध्या राम मंदिर भारत के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दान करते हैं। ऐसे में दान राशि के प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता का मुद्दा व्यापक सार्वजनिक महत्व रखता है।











