अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: टिन्नू यादव समेत 8 आरोपी गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में टिन्नू यादव समेत 8 आरोपी गिरफ्तार। पुलिस आज कोर्ट में पेश करेगी, रिमांड मांगेगी। निवारण अधिनियम के तहत जांच आगे बढ़ेगी

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में टिन्नू यादव समेत आठ आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपियों को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं।

अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मंदिर ट्रस्ट से जुड़े रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपियों को गुरुवार देर रात हिरासत में लिया गया। पुलिस उन्हें आज स्थानीय अदालत में पेश करेगी और आगे की पूछताछ के लिए 14 दिनों की न्यायिक रिमांड की मांग करेगी।

यह मामला देश के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में से एक राम मंदिर से जुड़ा होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित वित्तीय अनियमितता कितने समय से चल रही थी और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

पहली एफआईआर में आठ लोगों को बनाया गया नामजद

गुरुवार शाम इस मामले में पहली औपचारिक एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की ओर से दर्ज कराई गई, जिसमें आठ लोगों को नामजद किया गया है।

एफआईआर में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और रमाशंकर मिश्रा के नाम शामिल हैं। पुलिस के अनुसार इनमें से अधिकांश लोग मंदिर में चढ़ावे की गिनती, दान प्रबंधन और संबंधित प्रशासनिक कार्यों से जुड़े रहे हैं। प्राथमिक जांच के आधार पर इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम एफआईआर में नहीं

जांच को लेकर पहले ऐसी चर्चाएं थीं कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा तथा अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम भी एफआईआर में शामिल हो सकते हैं। हालांकि दर्ज की गई पहली एफआईआर में इनका नाम शामिल नहीं किया गया है।

पुलिस और प्रशासन ने इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है कि वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका की जांच किस स्तर पर चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कैसे सामने आया चढ़ावा चोरी का मामला?

राम मंदिर में चढ़ावे में कथित अनियमितता का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।

एसआईटी ने कई दिनों तक दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ करने के बाद 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई और बाद में एफआईआर दर्ज की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि अब वित्तीय लेनदेन, दान प्रबंधन और बैंकिंग प्रक्रिया की विस्तृत फोरेंसिक जांच भी की जाएगी।

जांच में क्या-क्या सामने आया?

सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। बताया जा रहा है कि मंदिर के दानपात्रों की चाबियां रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास पाई गई थीं। इसके अलावा एसआईटी ने लगभग 150 ऐसे कर्मचारियों और सेवादारों की पहचान की, जिनकी आर्थिक स्थिति में जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है। जांच एजेंसियां बैंक खातों, संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही हैं ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि कथित अनियमितताओं का वास्तविक स्वरूप क्या था।

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: टिन्नू यादव समेत 8 आरोपी गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी

सरकारी कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की संभावना

एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल किए जाने के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि जांच का दायरा सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों तक भी पहुंच सकता है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मंदिर में चढ़ावे की राशि की गिनती और उसे भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में जमा कराने की प्रक्रिया में विभिन्न सरकारी कर्मचारी भी शामिल रहते थे। यदि जांच में उनकी भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई केवल उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही की जाएगी।

सरकार ने दोहराई जीरो टॉलरेंस की नीति

उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि राज्य में अपराध और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति लागू है।

उन्होंने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। सरकार का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जांच को पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि जांच का दायरा सीमित रखा जा रहा है और बड़े स्तर पर कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि उन्होंने जांच एजेंसियों को कुछ दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं, जिनमें कथित भूमि और वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख है। संजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि केवल कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर बड़े आरोपों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित ट्रस्ट या नामित व्यक्तियों की ओर से इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

आगे की जांच पर रहेगी नजर

अब सभी आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद पुलिस आगे की रिमांड मांगकर उनसे विस्तृत पूछताछ करेगी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास करेंगी कि कथित चढ़ावा चोरी किसी संगठित नेटवर्क के माध्यम से हुई या यह कुछ व्यक्तियों तक सीमित मामला था।

यदि जांच के दौरान नए साक्ष्य सामने आते हैं, तो एफआईआर में नए नाम जोड़े जाने या अतिरिक्त धाराएं लगाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

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