अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पूजा-अर्चना और सेवा व्यवस्था को लेकर नई नियमावली लागू की गई है। रामलला की सेवा में लगे अर्चकों यानी पुजारियों के लिए अब पहनावे, धार्मिक मर्यादा, शुचिता और ड्यूटी के दौरान आचरण से जुड़े कई नियम निर्धारित किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत सेवाकाल के दौरान पुजारियों के लिए तिलक लगाना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही उन्हें धार्मिक समिति की ओर से निर्धारित पीतवस्त्र पहनने होंगे और पंचकेशी यानी बाल, दाढ़ी, मूंछ और शिखा से संबंधित निर्धारित धार्मिक परंपरा का पालन करना होगा। गर्भगृह में मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके अलावा मंदिर की ओर से उपलब्ध कराए गए भोग-प्रसाद के अलावा बाहर की कोई भी सामग्री गर्भगृह में ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
नई नियमावली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पुनर्गठित धार्मिक समिति की ओर से लागू की गई है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर में सेवा दे रहे सभी 35 अर्चकों के साथ बैठक कर नियमों की जानकारी दी गई और तत्काल प्रभाव से इनका पालन करने को कहा गया। रिपोर्ट के अनुसार कई व्यवस्थाएं पहले से मौखिक रूप से लागू थीं, लेकिन अब उन्हें लिखित नियमावली का हिस्सा बनाया गया है। इसमें कुल 12 बिंदुओं के जरिए अर्चकों के लिए सेवा के दौरान धार्मिक और प्रशासनिक अनुशासन तय किया गया है।
नई व्यवस्था में सबसे प्रमुख बदलाव पहनावे और धार्मिक मर्यादा से जुड़ा है। सेवाकाल के दौरान अर्चकों को धार्मिक समिति की ओर से निर्धारित पीतवस्त्र पहनने होंगे। तिलक लगाना अनिवार्य रहेगा और पंचकेशी का पालन भी करना होगा। यानी मंदिर में पूजा की जिम्मेदारी निभाने वाले अर्चकों के बाहरी स्वरूप और सेवा के दौरान धार्मिक परंपराओं के पालन को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। यह व्यवस्था रामानंदी परंपरा के अनुरूप पूजा-अर्चना की मर्यादा बनाए रखने के उद्देश्य से बताई गई है। मंदिर के व्यवस्थापक आचार्य इंद्रदेव मिश्रा के अनुसार राम मंदिर में पूजन-अर्चन रामानंदी परंपरा के अनुसार कराया जाता है और अर्चकों को पूजा की मर्यादा तथा मंदिर की आंतरिक व्यवस्था के बारे में निर्देश दिए गए हैं।
गर्भगृह की व्यवस्था को लेकर भी सख्ती बढ़ाई गई है। अब अर्चक मोबाइल फोन लेकर गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इसके साथ ही मंदिर की ओर से उपलब्ध कराए गए भोग-प्रसाद के अतिरिक्त बाहर की कोई भी वस्तु गर्भगृह में ले जाने पर रोक रहेगी। इसका मतलब यह है कि सेवा के दौरान गर्भगृह में जाने वाली सामग्री को मंदिर व्यवस्था के तहत ही नियंत्रित किया जाएगा। भोग और प्रसाद से संबंधित सामग्री की व्यवस्था तथा निगरानी भी निर्धारित जिम्मेदार लोगों के माध्यम से किए जाने के निर्देश हैं।
शुचिता को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। नई नियमावली के मुताबिक शौच जाने के बाद बिना स्नान किए अर्चक मंदिर या कोठार में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। स्नान करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दोबारा सेवा में शामिल होना होगा। मंदिर की धार्मिक सेवा से जुड़े इस नियम में व्यक्तिगत स्वच्छता और पूजा की परंपरागत मर्यादा को प्राथमिकता दी गई है। यही नियम आगे मंदिर से जुड़े कोठारी और भंडारी जैसे कर्मचारियों पर भी लागू किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ड्यूटी के दौरान अर्चकों के आचरण को लेकर भी कई निर्देश दिए गए हैं। उन्हें निर्धारित सेवा स्थल पर रहने के लिए कहा गया है। यदि किसी आवश्यक कारण से स्थान छोड़ना पड़े तो पाली प्रमुख को लिखित संदेश देकर कारण बताना होगा। इसका उद्देश्य सेवाकाल के दौरान जिम्मेदारी और उपस्थिति की स्पष्ट व्यवस्था बनाए रखना है। पाली खत्म होने के बाद सहयोगियों और मंदिर व्यवस्था से जुड़े कामकाज को लेकर लिखित समीक्षा देने का भी प्रावधान बताया गया है।
नई गाइडलाइन में आपसी व्यवहार को लेकर भी निर्देश हैं। अर्चकों को सेवाकाल के दौरान अनावश्यक बातचीत, समूह में चर्चा, हंसी-मजाक या किसी तरह के विवाद से बचने को कहा गया है। किसी घटना की स्थिति में पहले शांतिपूर्वक स्थिति संभालने और जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार लोगों से सहयोग लेने का निर्देश है। असहमति या असंतुष्टि की स्थिति में सीधे विवाद करने के बजाय अपने आचार्य से मार्गदर्शन लेने को कहा गया है।
ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों के साथ संपर्क को लेकर भी ड्यूटी के दौरान सीमाएं तय की गई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक अर्चकों को मंदिर व्यवस्था, धर्मगुरु और आचार्यों के अतिरिक्त ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं या सुरक्षाकर्मियों से अनावश्यक संपर्क, चर्चा या बैठक से बचने को कहा गया है। इसका उद्देश्य पूजा और सेवा के दौरान जिम्मेदारियों को स्पष्ट रखना तथा मंदिर की आंतरिक व्यवस्था को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संचालित करना है।
नई व्यवस्था में पाली प्रमुख की भूमिका भी स्पष्ट की गई है। पाली प्रमुख से व्यवस्था के संचालन में सहयोग करने की अपेक्षा की गई है, लेकिन अनावश्यक टिप्पणी या शासन जैसा व्यवहार नहीं करने का निर्देश है। किसी अर्चक को किसी तरह की असंतुष्टि या असहयोग महसूस हो तो उसे आचार्य को अवगत कराने और उनसे मार्गदर्शन लेने की बात कही गई है। इस तरह नई नियमावली में केवल धार्मिक आचरण ही नहीं बल्कि सेवा के दौरान आपसी व्यवहार और जिम्मेदारियों को भी व्यवस्थित करने की कोशिश की गई है।
मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी घटनाओं के बाद व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर भी सख्ती बढ़ाई गई है। 18 सितंबर की अमर उजाला रिपोर्ट के अनुसार पुजारियों के बाद अब रामलला की सेवा से जुड़े कोठारी और भंडारी के लिए भी आचार संहिता लागू की गई है। मंदिर में चार भंडारी और दो कोठारी तैनात हैं और इनके लिए भी निर्धारित ड्रेस कोड लागू किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इन्हें बिना जेब वाली पीतांबरी पोशाक में मंदिर में प्रवेश करना होगा।
कोठारी और भंडारी के लिए नशे से संबंधित नियम भी कड़े किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, तंबाकू और मद्यपान सहित किसी भी प्रकार के नशे का सेवन करने पर सेवा से हटाने का प्रावधान किया गया है। शौच के बाद बिना स्नान किए गर्भगृह, रसोई या कोठार में प्रवेश नहीं किया जा सकेगा। भोग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को भी निर्धारित निगरानी व्यवस्था के तहत निकाले जाने की बात सामने आई है।
राम मंदिर की नई व्यवस्था केवल पुजारियों तक सीमित रहने वाली नहीं है। मंदिर से जुड़े अन्य कर्मचारियों के लिए भी नई नीति तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक पुजारियों के बाद मंदिर में अलग-अलग जिम्मेदारियों पर तैनात कर्मचारियों के लिए भी ड्रेस कोड, आचरण और ड्यूटी से जुड़े नियम निर्धारित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और अनुशासित तरीके से संचालित करना बताया गया है।
इस बीच अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक भी हुई। समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने निर्माणाधीन स्मारक स्तंभ और मंदिर परिसर से जुड़े विकास कार्यों का निरीक्षण किया। बैठकों में मंदिर और उससे जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति, तकनीकी पहलुओं और आने वाले कामों की समीक्षा की गई। मंदिर परिसर के चारों ओर लगभग चार किलोमीटर लंबी बाहरी सुरक्षा दीवार से जुड़े विषय पर भी चर्चा की जानकारी रिपोर्टों में दी गई है।
मंदिर की पूजा प्रक्रिया में भी कुछ बदलाव किए जाने की जानकारी सामने आई है। टीवी9 की रिपोर्ट के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी से राम मंदिर में आरती की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। वहीं धार्मिक समिति की ओर से पुजारियों के लिए परिधान और सेवा से संबंधित नियम निर्धारित किए गए हैं। मंदिर के व्यवस्थापक आचार्य इंद्रदेव मिश्रा ने इसे किसी विशेष नई सनद के बजाय पूजा की मर्यादा और मंदिर की व्यवस्था से संबंधित निर्देश बताया है।
नई नियमावली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मंदिर के भीतर अनुशासन और धार्मिक सेवा की गोपनीयता से भी जुड़ा है। मोबाइल फोन पर रोक के कारण गर्भगृह के भीतर मोबाइल से फोटो, वीडियो या अन्य गतिविधियों की संभावना को नियंत्रित किया जा सकेगा। बाहर की सामग्री पर रोक से गर्भगृह में प्रवेश करने वाली वस्तुओं की निगरानी भी अधिक स्पष्ट तरीके से की जा सकेगी। हालांकि इन नियमों के लागू होने का वास्तविक प्रशासनिक प्रभाव समय के साथ ही स्पष्ट होगा।
अर्चकों के लिए निर्धारित नियमों में मंदिर की सीमा के उल्लंघन पर पंचगव्य प्राशन जैसे धार्मिक प्रायश्चित का प्रावधान भी बताया गया है। यह नियम मंदिर की धार्मिक परंपरा और आचार व्यवस्था से संबंधित है। इसी तरह परिवार या परिचितों के मंदिर आने की स्थिति में दर्शन और प्रसाद आदि की व्यवस्था के लिए आचार्य के माध्यम से सहयोग या निर्देश लेने को कहा गया है। इससे व्यक्तिगत परिचय और मंदिर की आधिकारिक व्यवस्था के बीच एक निर्धारित प्रक्रिया बनाए रखने की कोशिश की गई है।
कुल मिलाकर राम मंदिर में लागू नई व्यवस्था का फोकस पुजारियों के पहनावे, तिलक, धार्मिक शुचिता, मोबाइल फोन, बाहरी सामग्री, ड्यूटी के दौरान आचरण और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने पर है। तिलक और निर्धारित पीतवस्त्र के साथ पंचकेशी का पालन अनिवार्य किया गया है, जबकि गर्भगृह में मोबाइल फोन और बाहर से लाई गई सामग्री पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही सेवा के दौरान निर्धारित स्थान पर रहने और जरूरत पड़ने पर लिखित सूचना देने जैसे प्रशासनिक नियम भी लागू किए गए हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से लागू की गई यह व्यवस्था मंदिर की पूजा-पद्धति और आंतरिक अनुशासन को एक तय नियमावली के तहत संचालित करने की दिशा में कदम के रूप में सामने आई है। फिलहाल रिपोर्टों के अनुसार अर्चकों को इन नियमों का तत्काल प्रभाव से पालन करने को कहा गया है। आगे मंदिर के अन्य कर्मचारियों के लिए भी ड्रेस कोड और आचार संहिता लागू किए जाने की प्रक्रिया जारी है।










