ताडिचर्ला-II कोयला खदान सिंगरेनी के भविष्य के लिए अहम परियोजना बनकर उभर रही है। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि यह खदान कोयला उत्पादन बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और हजारों रोजगार अवसर पैदा करने में मदद करेगी।
हैदराबाद: तेलंगाना की प्रमुख कोयला कंपनी सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) के भविष्य के लिए ताडिचर्ला-II कोयला खदान को एक महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इसे ‘बाहुबली कोल फील्ड’ बताते हुए कहा कि यह खदान आने वाले वर्षों में सिंगरेनी के कोयला उत्पादन को मजबूत करेगी, ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देगी और क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
केंद्रीय मंत्री ने सोमवार और मंगलवार को आयोजित ‘सिंगरेनी भरोसा यात्रा’ के दौरान कंपनी के कर्मचारियों, अधिकारियों और हितधारकों को संबोधित करते हुए ताडिचर्ला-II कोयला खदान का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना सिंगरेनी के कर्मचारियों के लंबे समय से चले आ रहे सपने को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
दो दशक बाद मिली खदान आवंटन की मंजूरी
जी. किशन रेड्डी ने कहा कि ताडिचर्ला-II कोयला खदान का मामला पिछले करीब दो दशकों से लंबित था। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी देकर सिंगरेनी के विकास के लिए नया रास्ता खोला है। उन्होंने कहा कि इस खदान में उच्च गुणवत्ता वाले कोयले के विशाल भंडार मौजूद हैं, जिसके कारण इसे ‘बाहुबली’ नाम दिया गया है। केंद्र सरकार द्वारा इस खदान का आवंटन सिंगरेनी के उत्पादन विस्तार और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
किशन रेड्डी ने कहा कि सिंगरेनी के कर्मचारी देश की ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
सिंगरेनी पर वित्तीय दबाव का मुद्दा उठाया
केंद्रीय मंत्री ने तेलंगाना सरकार पर सिंगरेनी के बकाया भुगतान को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा बिजली बिलों का भुगतान नहीं किए जाने के कारण कंपनी पर लगभग 54 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि भारत के बिजली, सीमेंट और इस्पात उद्योगों का बड़ा हिस्सा कोयले पर निर्भर है और सिंगरेनी के हजारों कर्मचारी लगातार मेहनत कर देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। ऐसे में कंपनी पर बढ़ता आर्थिक दबाव उसके संचालन, कर्मचारियों के वेतन और आधुनिकीकरण योजनाओं को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि सिंगरेनी को नई मशीनरी, आधुनिक तकनीक और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत है।
ताडिचर्ला-II खदान से 40 साल तक कोयला आपूर्ति की उम्मीद
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, ताडिचर्ला-II कोयला खदान सिंगरेनी को लंबे समय तक स्थिर कोयला आपूर्ति उपलब्ध करा सकती है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से अगले करीब 40 वर्षों तक कंपनी को लाभ मिलने की संभावना है। उन्होंने दावा किया कि खदान से लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक मूल्य उत्पन्न हो सकता है। इसके अलावा इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और तेलंगाना सरकार को लगभग 30 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े पैमाने पर खनन परियोजनाएं केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि इनके माध्यम से स्थानीय परिवहन, सेवा क्षेत्र और छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिलता है।
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कोयला क्षेत्र वाले जिलों में हुई बैठकें
‘सिंगरेनी भरोसा यात्रा’ के दौरान केंद्रीय मंत्री ने तेलंगाना के कई प्रमुख कोयला क्षेत्रों का दौरा किया। इनमें कोठागुडेम, मनुगुरु, जयशंकर-भूपालपल्ली, ताडिचर्ला, मंचेरियल और रामागुंडम जैसे क्षेत्र शामिल रहे। इन बैठकों में उन्होंने सिंगरेनी के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों से बातचीत की तथा कंपनी के विकास, रोजगार और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।उन्होंने कहा कि सिंगरेनी केवल एक कोयला कंपनी नहीं है, बल्कि तेलंगाना और देश की ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसके कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना जरूरी है।
निजीकरण को लेकर जताई चिंता
किशन रेड्डी ने ताडिचर्ला-II खदान को निजी कंपनियों को सौंपे जाने की संभावनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सिंगरेनी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने ओडिशा के नाइनी कोल ब्लॉक का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाओं में स्थानीय कर्मचारियों और कंपनी के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भाजपा सिंगरेनी कर्मचारियों के अधिकारों और हितों के लिए लगातार आवाज उठाती रहेगी।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज
अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने तेलंगाना की पिछली और वर्तमान सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने भारत राष्ट्र समिति (BRS) और कांग्रेस सरकार पर सिंगरेनी की वित्तीय स्थिति को कमजोर करने का आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने कंपनी के बकाया भुगतान पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। साथ ही उन्होंने वर्तमान सरकार पर सिंगरेनी के धन के उपयोग को लेकर सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित राजनीतिक दलों की ओर से प्रतिक्रिया आना बाकी है। तेलंगाना की राजनीति में सिंगरेनी एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है क्योंकि कंपनी से बड़ी संख्या में कर्मचारी और उनके परिवार जुड़े हुए हैं।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम
भारत में बढ़ती ऊर्जा मांग के बीच कोयला उत्पादन बढ़ाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। ताडिचर्ला-II जैसी खदानें घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस परियोजना को समय पर विकसित किया जाता है तो यह न केवल सिंगरेनी बल्कि पूरे तेलंगाना के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।









