बैसाखी पर पाकिस्तान पहुंचे हजारों सिख तीर्थयात्री, ननकाना साहिब में होगी विशेष यात्रा

बैसाखी 2026 पर 2,200 से अधिक सिख श्रद्धालु पाकिस्तान पहुंचे। ननकाना साहिब से करतारपुर साहिब तक 10 दिवसीय धार्मिक यात्रा जारी है।

बैसाखी पर्व के मौके पर हजारों सिख श्रद्धालु पाकिस्तान पहुंचे, जहां वे ननकाना साहिब से लेकर करतारपुर साहिब तक कई पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन करेंगे। यह 10 दिवसीय यात्रा धार्मिक आस्था और भारत-पाक सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक मानी जा रही है।

Sikh Pilgrimage Pakistan Vaisakhi 2026: बैसाखी 2026 के अवसर पर भारत से करीब 2,238 सिख श्रद्धालु पाकिस्तान पहुंचे, जो अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए प्रवेश कर विभिन्न पवित्र स्थलों की यात्रा पर हैं। यह यात्रा पाकिस्तान में 10 दिनों तक चलेगी, जिसमें श्रद्धालु ननकाना साहिब से लेकर करतारपुर साहिब और अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करेंगे। यह तीर्थयात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को भी दर्शाती है, जिसे सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित किया गया है।

ननकाना साहिब से करतारपुर तक श्रद्धा की यात्रा

इस धार्मिक यात्रा की शुरुआत Attari-Wagah Border के जरिए पाकिस्तान में प्रवेश के साथ हुई। यहां से श्रद्धालु सबसे पहले Nankana Sahib पहुंचे, जिसे गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान माना जाता है।

इसके बाद जत्था पाकिस्तान के अन्य पवित्र स्थलों की ओर रवाना होगा, जहां धार्मिक आयोजन और दर्शन किए जाएंगे। श्रद्धालु 10 दिनों के भीतर कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों की यात्रा करेंगे, जिससे सिख परंपरा और आस्था का गहरा जुड़ाव देखने को मिलेगा।

प्रमुख गुरुद्वारों में होगा दर्शन और आयोजन

इस यात्रा के दौरान श्रद्धालु Gurdwara Panja Sahib, Gurdwara Kartarpur Sahib और Gurdwara Dera Sahib Lahore सहित कई ऐतिहासिक स्थलों पर पहुंचेंगे।

इसके अलावा Gurdwara Sacha Sauda Farooqabad और Gurdwara Rori Sahib Eminabad में भी विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सबसे बड़ा आयोजन 14 अप्रैल को बैसाखी के दिन गुरुद्वारा पंजा साहिब में होगा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं के बीच बड़ी तीर्थयात्रा

इस बार पाकिस्तान ने भारतीय श्रद्धालुओं के लिए 2,800 से अधिक वीजा जारी किए थे, जिनमें से करीब 2,238 लोगों ने यात्रा की अनुमति हासिल की। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों के लिए लंगर, परिवहन और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली है।

हालांकि, कुछ यात्रियों को जरूरी अनुमति न मिलने के कारण सीमा पर रोक दिया गया, जिससे असंतोष की स्थिति भी बनी। इसके बावजूद अधिकांश श्रद्धालु धार्मिक भावना के साथ यात्रा पर आगे बढ़े, जिसे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक माना जा रहा है।

 ऐतिहासिक और कूटनीतिक महत्व

बैसाखी सिख धर्म में खालसा पंथ की स्थापना के रूप में मनाई जाती है, जिसकी शुरुआत 1699 में गुरु गोविंद सिंह ने की थी। यह पर्व सिख समुदाय के लिए धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।

1950 के नेहरू-लियाकत समझौते के तहत भारत से सिख तीर्थयात्रियों को हर साल पाकिस्तान के पवित्र स्थलों की यात्रा की अनुमति दी गई थी। हालांकि, हाल के वर्षों में सुरक्षा कारणों और राजनीतिक तनावों के चलते इन यात्राओं पर असर पड़ा है।

करतारपुर कॉरिडोर और सीमित यात्रा व्यवस्था

इस बीच सिख संगठनों ने Kartarpur Corridor को फिर से खोलने की मांग भी उठाई है, जो 2019 में गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर शुरू किया गया था। यह कॉरिडोर अब बंद है, जिससे श्रद्धालुओं को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद सीमा पार यात्रा पर कई प्रतिबंध लगाए गए थे, जिसके चलते तीर्थयात्राओं की संख्या और प्रक्रिया दोनों प्रभावित हुई हैं। इसके बावजूद इस साल का बड़ा जत्था दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को बनाए रखने का संकेत देता है।

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