सोलन। हिमाचल प्रदेश और हरियाणा की सीमा के पास बाल्द नदी में लगातार बढ़ रहा कटाव अब एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। नदी का बहाव और कटाव बढ़ने के कारण निजी गाइड कान्वेंट स्कूल के भवन पर खतरा मंडराने लगा है। स्कूल के आसपास नदी का कटाव इतना बढ़ गया है कि विद्यालय भवन के साथ-साथ यहां पढ़ने वाले करीब 400 विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। स्कूल प्रबंधन और स्थानीय किसानों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर नदी के कटाव को रोकने के लिए सुरक्षा एवं निर्माण कार्य शुरू करवाने की मांग की है।
मामला हिमाचल प्रदेश के बीबीएन क्षेत्र में हिमाचल-हरियाणा सीमा के पास का है। गाइड कान्वेंट स्कूल हिमाचल की हरिपुर संडोली पंचायत के शीतलपुर गांव और हरियाणा के खेड़ा पंचायत क्षेत्र के समीप स्थित है। बाल्द नदी के लगातार हो रहे कटाव के कारण नदी का बहाव स्कूल भवन के बेहद नजदीक पहुंच गया है। ऐसे में बारिश या नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने पर स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि समस्या केवल भवन तक सीमित नहीं है। नदी के कटाव की वजह से आसपास की जमीन भी प्रभावित हो रही है और किसानों की भूमि इसकी चपेट में आ रही है। लगातार मिट्टी और जमीन के कटने से नदी का क्षेत्र धीरे-धीरे स्कूल की ओर बढ़ रहा है। यदि समय रहते कटाव रोकने के उपाय नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में विद्यालय परिसर के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
विद्यालय में नर्सरी से लेकर दसवीं कक्षा तक करीब 400 बच्चे पढ़ाई करते हैं। रोजाना बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्कूल पहुंचते हैं। ऐसे में नदी के नजदीक लगातार बढ़ता कटाव अभिभावकों के लिए भी चिंता का कारण बन सकता है। स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हिमाचल प्रदेश और हरियाणा दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भेजकर मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय किसानों और स्कूल प्रबंधन के मुताबिक बाल्द नदी के कटाव का असर केवल स्कूल भवन पर नहीं पड़ा है, बल्कि आसपास की कृषि भूमि भी प्रभावित हुई है। नदी का बहाव जिस दिशा में बढ़ रहा है, उससे खेतों की जमीन के कटने का खतरा बना हुआ है। लंबे समय से नदी के आसपास रहने वाले किसानों के लिए यह स्थिति आर्थिक नुकसान का कारण भी बन सकती है, क्योंकि खेती योग्य जमीन का लगातार क्षरण होने से उनकी जमीन का क्षेत्र कम हो सकता है।
कटाव के कारण स्कूल तक पहुंचने वाले कुछ संपर्क मार्ग भी प्रभावित हुए हैं। इससे विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल आने-जाने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित रास्ता होना बेहद जरूरी है, लेकिन नदी के कटाव से संपर्क मार्गों पर भी असर पड़ने की बात सामने आई है। ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि नदी के किनारे सुरक्षा उपाय करने के साथ-साथ प्रभावित रास्तों को भी सुरक्षित किया जाए।
स्कूल प्रबंधक सुमन गुप्ता और स्थानीय किसानों राजेंद्र, सुरेंद्र, अमरजीत तथा गुरजीत ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है। उनका कहना है कि समस्या को केवल सामान्य नदी कटाव मानकर टालना उचित नहीं होगा, क्योंकि नदी अब विद्यालय भवन के काफी करीब पहुंच चुकी है। यदि समय रहते कटावरोधी काम शुरू नहीं किया गया तो भविष्य में नुकसान की आशंका बढ़ सकती है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन की टीम मौके का निरीक्षण करे और नदी के बहाव की वर्तमान स्थिति का आकलन करे। इसके बाद जरूरत के अनुसार बाढ़ सुरक्षा और नदी कटावरोधी कार्य करवाए जाएं। उनका कहना है कि सुरक्षा कार्य केवल स्कूल को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि आसपास की कृषि भूमि और संपर्क मार्गों को भी ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।
बाल्द नदी के किनारे बढ़ता कटाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां स्कूल के अलावा स्थानीय आबादी और किसानों की जमीन भी मौजूद है। नदी का रुख लगातार बदलने या कटाव बढ़ने की स्थिति में एक बड़े क्षेत्र पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। स्कूल प्रबंधन की ओर से समय रहते प्रशासन को जानकारी दिए जाने का उद्देश्य भी यही है कि संभावित खतरे को किसी हादसे में बदलने से पहले रोकथाम की कार्रवाई की जा सके।
करीब 400 विद्यार्थियों वाले विद्यालय में प्रतिदिन बच्चों की आवाजाही होती है। ऐसे में स्कूल भवन और संपर्क मार्ग के आसपास किसी भी तरह का भूस्खलन, जमीन धंसने या नदी के बहाव में अचानक बदलाव विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। हालांकि अभी किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं है, लेकिन स्कूल प्रबंधन और स्थानीय किसानों ने भविष्य में किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए तत्काल सुरक्षा कार्य की मांग की है।
बारिश के मौसम में नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने के साथ कटाव की समस्या और गंभीर हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश होने पर नदी का बहाव तेज होता है और किनारों की मिट्टी तेजी से कट सकती है। बाल्द नदी के मामले में भी स्थानीय लोगों की चिंता इसी संभावित स्थिति को लेकर है। उनका कहना है कि अगर नदी पहले ही स्कूल भवन के करीब पहुंच चुकी है तो तेज बहाव की स्थिति में खतरा और बढ़ सकता है।
स्कूल प्रबंधन द्वारा दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भेजना इस मामले की अंतरराज्यीय प्रकृति को भी दर्शाता है। विद्यालय हिमाचल क्षेत्र में स्थित है, जबकि यह इलाका हरियाणा सीमा से सटा हुआ है। ऐसे में नदी से जुड़ी सुरक्षा और संपर्क मार्गों की समस्या का समाधान दोनों राज्यों के संबंधित विभागों के समन्वय से किया जाना उपयोगी हो सकता है। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को जल्द आगे बढ़ाया जाए और मौके की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया जाए।
लोगों का कहना है कि नदी के कटाव से प्रभावित किसानों की समस्याओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है। यदि कृषि भूमि लगातार कटती रही तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए सुरक्षा कार्यों में स्कूल की सुरक्षा के साथ आसपास के खेतों और आबादी को भी शामिल किया जाना चाहिए। नदी के किनारे मजबूत सुरक्षा व्यवस्था होने से भविष्य में कटाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल स्कूल प्रबंधन और स्थानीय किसानों की सबसे बड़ी मांग यही है कि प्रशासन मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले और बिना देरी किए आवश्यक बाढ़ एवं नदी कटावरोधी कार्य शुरू करवाए। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल परिसर और उसके आसपास के क्षेत्र को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित करने की मांग की जा रही है।
बाल्द नदी का बढ़ता कटाव अब स्थानीय स्तर की समस्या से आगे बढ़कर विद्यार्थियों, स्कूल भवन, किसानों की जमीन और संपर्क मार्गों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन गया है। करीब 400 विद्यार्थियों वाले विद्यालय के कारण मामले की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है और नदी के कटाव को रोकने के लिए किस तरह के सुरक्षा उपाय किए जाते हैं। स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि संभावित खतरे को देखते हुए किसी हादसे का इंतजार किए बिना समय रहते स्थायी समाधान की दिशा में काम किया जाएगा।










