बांग्लादेश में भूस्खलन का कहर: रोहिंग्या शरणार्थी शिविर के गर्ल्स स्कूल पर मलबा गिरने से 8 की मौत, कई घायल

कॉक्स बाजार के रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में भूस्खलन से गर्ल्स स्कूल मलबे में दब गया। हादसे में 7 छात्राओं और 1 शिक्षक की मौत, कई घायल, राहत अभियान जारी।

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार स्थित रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में भूस्खलन से एक गर्ल्स इस्लामिक स्कूल मलबे में दब गया। हादसे में सात छात्राओं और एक शिक्षक की मौत हो गई, जबकि कई बच्चों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। लगातार बारिश से इलाके में खतरा बना हुआ है

ढाका: बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी तटीय क्षेत्र कॉक्स बाजार में लगातार हो रही भारी मानसूनी बारिश ने एक दर्दनाक हादसे को जन्म दिया। बुधवार दोपहर रोहिंग्या शरणार्थी शिविर के भीतर संचालित एक लड़कियों के इस्लामिक अध्ययन केंद्र (मदरसानुमा स्कूल) पर अचानक भूस्खलन हो गया। पहाड़ी से भारी मात्रा में मिट्टी और मलबा स्कूल की इमारत पर आ गिरा, जिससे वहां मौजूद छात्राएं और शिक्षक मलबे में दब गए।

इस हादसे में सात छात्राओं और एक शिक्षक की मौत हो गई, जबकि कई अन्य बच्चों को घायल अवस्था में बचाया गया। घटना के बाद पूरे शरणार्थी शिविर में शोक और अफरा-तफरी का माहौल है।

बचाव अभियान में निकाले गए 13 लोग

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन, राहत एजेंसियों और स्वयंसेवकों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू किया। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए घंटों तक राहत कार्य चलता रहा।

अधिकारियों के अनुसार, मलबे से कुल 13 लोगों को बाहर निकाला गया। इनमें से आठ लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि पांच बच्चों को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। राहतकर्मियों ने बताया कि स्कूल मिट्टी और बांस से बने अस्थायी ढांचे में संचालित हो रहा था, जो भारी बारिश के कारण कमजोर पड़ गया था।

मरने वालों में छोटे बच्चे भी शामिल

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, मृतकों में सात, आठ, 11 और 12 वर्ष तक की उम्र की छात्राएं शामिल हैं। हादसे ने पूरे रोहिंग्या समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटना इतनी अचानक हुई कि बच्चों और शिक्षकों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय लोग अपने हाथों से मिट्टी हटाकर बच्चों को निकालने की कोशिश करते रहे, जिसके बाद राहत दल मौके पर पहुंचे।

रविवार से जारी है भारी बारिश

कॉक्स बाजार क्षेत्र में रविवार से लगातार तेज बारिश हो रही है। लगातार हो रही वर्षा के कारण पहाड़ी इलाकों की मिट्टी कमजोर हो गई है, जिससे भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ गया है। इस हादसे से पहले भी क्षेत्र में कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें कई रोहिंग्या शरणार्थियों की जान जा चुकी है। प्रशासन लगातार संवेदनशील इलाकों की निगरानी कर रहा है।

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दुनिया का सबसे बड़ा रोहिंग्या शरणार्थी शिविर

कॉक्स बाजार दुनिया का सबसे बड़ा रोहिंग्या शरणार्थी शिविर माना जाता है। यहां दस लाख से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी रहते हैं, जिन्होंने 2017 में म्यांमार में सैन्य कार्रवाई और हिंसा के बाद बांग्लादेश में शरण ली थी। अधिकांश परिवार अस्थायी तिरपाल और बांस से बने घरों में रहते हैं। ये मकान पहाड़ियों की ढलानों पर बने होने के कारण हर मानसून में भूस्खलन का गंभीर खतरा बना रहता है।

रहने की कठिन परिस्थितियां बढ़ा रहीं जोखिम

मानवीय संगठनों का कहना है कि शिविरों में रहने वाले अधिकांश परिवार सीमित संसाधनों के बीच जीवन बिता रहे हैं। अस्थायी घर, संकरी गलियां और कमजोर जल निकासी व्यवस्था बारिश के दौरान स्थिति को और गंभीर बना देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में बसे इन शिविरों में भूस्खलन का खतरा हर साल बना रहता है, जिससे जान-माल का नुकसान होने की आशंका रहती है।

अधिकारियों ने जारी की चेतावनी

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने पहाड़ी ढलानों और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। जोखिम वाले इलाकों से लोगों को निकालने का अभियान भी चलाया जा रहा है ताकि आगे किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

राहत एजेंसियां लगातार कर रही हैं मदद

बचाव अभियान में सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठन और स्थानीय स्वयंसेवक भी शामिल हैं। घायल बच्चों के इलाज की व्यवस्था की गई है और प्रभावित परिवारों को आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम सामान्य होने तक निगरानी और राहत कार्य जारी रहेगा।

मानवीय संकट के बीच नई चुनौती

रोहिंग्या शरणार्थी पहले से ही विस्थापन और सीमित संसाधनों जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन की घटनाएं उनके लिए एक नई मानवीय चुनौती बनकर सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सुरक्षित आवास, बेहतर जल निकासी व्यवस्था और संवेदनशील क्षेत्रों में मजबूत संरचनाओं का निर्माण आवश्यक होगा।

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