वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में मंगलवार शाम करीब 10 मिनट तक दर्शन बाधित रहे। मंदिर प्रबंधन और सेवायत के बीच दान संग्रह व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया है। दोनों पक्षों ने घटना को लेकर अलग-अलग दावे किए हैं।
वृंदावन: विश्व प्रसिद्ध बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। मंगलवार शाम आरती और दर्शन के दौरान गर्भगृह का पर्दा कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया, जिससे श्रद्धालुओं को इंतजार करना पड़ा। घटना के बाद मंदिर प्रबंधन और सेवायत पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
दर्शन के दौरान अचानक बंद हुआ गर्भगृह का पर्दा
वृंदावन स्थित ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में मंगलवार शाम उस समय स्थिति असामान्य हो गई जब दर्शन के दौरान गर्भगृह का पर्दा बंद कर दिया गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु भगवान बांकेबिहारी के दर्शन कर रहे थे, तभी अचानक पर्दा डाल दिए जाने से दर्शन व्यवस्था प्रभावित हो गई।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करीब दस मिनट तक श्रद्धालुओं को इंतजार करना पड़ा। बाद में पर्दा हटने के बाद दर्शन व्यवस्था सामान्य हो सकी। इस घटना ने मंदिर प्रशासन और सेवायतों के बीच चल रहे विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है।
दान संग्रह व्यवस्था को लेकर आमने-सामने आए पक्ष
मंदिर की उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति का आरोप है कि कुछ भंडारी और सेवायतों के सहयोगी मंदिर परिसर में रखी दान पेटियों के ऊपर अपनी डलिया और अन्य सामग्री रख देते हैं। इससे श्रद्धालु सीधे गोलक में दान नहीं डाल पाते और नकद दान अलग से लिया जाता है।
प्रबंधन का दावा है कि मंगलवार को ऐसे कुछ लोगों को मंदिर परिसर से हटाया गया था। इसके बाद विरोध स्वरूप गर्भगृह का पर्दा बंद कर दिया गया। समिति का मानना है कि मंदिर में दान व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया गया था।
सेवायत ने दी अलग सफाई
दूसरी ओर सेवाधिकारी प्रभु गोस्वामी ने प्रबंधन के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि पर्दा दान विवाद के कारण नहीं बल्कि नियमित शृंगार व्यवस्था के तहत कुछ समय के लिए बंद किया गया था।
सेवायत पक्ष का कहना है कि मंदिर की पारंपरिक पूजा और शृंगार प्रक्रिया के दौरान समय-समय पर पर्दा बंद किया जाता है। इसलिए इस घटना को विवाद से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भंडारियों को हटाने और पर्दा बंद करने के बीच कोई संबंध नहीं है।
प्रबंधन ने दी कार्रवाई की चेतावनी
मंदिर की उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि दर्शन के समय लंबे समय तक पर्दा बंद रखना मंदिर की स्थापित परंपराओं और सेवा व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि इस प्रकार की घटना दोबारा होती है तो संबंधित सेवायतों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। समिति का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुचारु दर्शन व्यवस्था उनकी प्राथमिकता है।
श्रद्धालुओं को करना पड़ा इंतजार
घटना के दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं को कुछ समय तक दर्शन के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ी। हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई, लेकिन इस घटनाक्रम ने मंदिर प्रशासन और सेवायतों के बीच चल रहे मतभेदों को फिर सामने ला दिया है।
बांकेबिहारी मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में दर्शन व्यवस्था से जुड़ा कोई भी विवाद सीधे श्रद्धालुओं के अनुभव को प्रभावित करता है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।









