बीकानेर में खेजड़ी संरक्षण आंदोलन, स्कूल आधे दिन बंद और मुख्य बाजार दोपहर 2 बजे तक बंद

महापड़ाव में हरियाणा-पंजाब के पर्यावरण प्रेमी शामिल। प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुदृढ़ की। आंदोलन में विश्नोई समाज की बड़ी भागीदारी।
बीकानेर में खेजड़ी संरक्षण आंदोलन, स्कूल आधे दिन बंद और मुख्य बाजार दोपहर 2 बजे तक बंद
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बीकानेर में खेजड़ी पेड़ों की कटाई के खिलाफ महापड़ाव आयोजित किया गया। स्कूलों में आधे दिन की छुट्टी और बाजार दोपहर 2 बजे तक बंद रहेंगे। आंदोलन की मांग कठोर कानून बनाकर खेजड़ी की कटाई रोकने की है।

Rajasthan: बीकानेर के पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में आज खेजड़ी पेड़ों की कटाई के खिलाफ महापड़ाव आयोजित किया जा रहा है। इसमें केवल बीकानेर के नहीं, बल्कि हरियाणा और पंजाब सहित अन्य प्रदेशों से भी पर्यावरण प्रेमी शामिल होंगे। आंदोलन का उद्देश्य खेजड़ी की कटाई रोकने और इसके संरक्षण के लिए कठोर कानून बनाने की मांग करना है।

स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए मुख्य बाजार दोपहर 2 बजे तक बंद रखने का फैसला लिया है। इसके अलावा सरकारी और निजी स्कूलों में आधे दिन की छुट्टी भी घोषित की गई है, ताकि छात्र और शिक्षक महापड़ाव में शामिल हो सकें।

शहर में ट्रैफिक 

महापड़ाव में भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। यातायात पुलिस ने शहर में प्रवेश करने वाले कई मार्गों को डायवर्ट किया है। महापड़ाव स्थल पर अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है, ताकि आयोजनों में कोई अव्यवस्था न हो।

बाजार और सड़क पर पर्यावरण प्रेमियों की भीड़ बढ़ने की संभावना है। इस कारण शहरवासियों से अपील की गई है कि वे जरूरी काम होने पर ही बाजार और मुख्य मार्गों का उपयोग करें।

राजनीतिक और सामाजिक समर्थन

विधायक रविंद्र सिंह भाटी, बाड़मेर के शिव क्षेत्र से, ने इस आंदोलन के प्रति अपनी सहमति जताई है और महापड़ाव में शामिल होने का फैसला किया है। इसके अलावा कई सामाजिक और राजनीतिक संगठन भी इसे समर्थन दे रहे हैं।

इस आंदोलन में विश्नोई समाज की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, हालांकि हर जाति और वर्ग के लोग इस महापड़ाव में शामिल हैं।

कठोर कानून की मांग

महापड़ाव में खेजड़ी पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने और उनके संरक्षण के लिए कठोर कानून बनाने की मांग की जा रही है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि खेजड़ी सिर्फ पेड़ नहीं, बल्कि राजस्थान की पारंपरिक खेती और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है। 

उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाती, आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन में हर जाति और वर्ग के लोग शामिल हैं, लेकिन विश्नोई समाज की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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