भागलपुर भोलानाथ फ्लाईओवर: पुल निर्माण निगम और रेलवे इंजीनियर में कहासुनी, 4 माह से अटकी गर्डर लॉन्चिंग की फाइल

भागलपुर के भोलानाथ फ्लाईओवर में गर्डर लॉन्चिंग की फाइल चार महीने से रेलवे की मंजूरी में अटकी है। इंजीनियरों में कहासुनी के बाद भी समाधान नहीं हुआ।
भागलपुर भोलानाथ फ्लाईओवर: पुल निर्माण निगम और रेलवे इंजीनियर में कहासुनी, 4 माह से अटकी गर्डर लॉन्चिंग की फाइल
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भागलपुर के महत्वपूर्ण भोलानाथ रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के निर्माण में एक बार फिर अड़चन सामने आई है। फ्लाईओवर के गर्डर लॉन्चिंग से जुड़ी फाइल करीब चार महीने से रेलवे की मंजूरी के इंतजार में अटकी हुई है। इसी मुद्दे को लेकर पुल निर्माण निगम और रेलवे के इंजीनियरों के बीच बैठक के दौरान कहासुनी भी हो गई। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी का असर अब निर्माण की गति पर पड़ता दिखाई दे रहा है।

भोलानाथ पुल परियोजना भागलपुर के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रस्तावित आरओबी एसएम कॉलेज से मिरजानहाट की ओर जाने वाले मार्ग को रेलवे लाइन के ऊपर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण ढांचा है। जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी इसे एसएम कॉलेज-मिरजानहाट से संबंधित प्रस्तावित नए आरओबी के रूप में दर्ज किया गया है।

परियोजना के निर्माण में पहले तेजी आई थी। मार्च 2025 में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने भोलानाथ आरओबी पर गर्डर की ढलाई शुरू की थी। उस समय निर्माण कार्य को गति मिलने की बात कही गई थी।

अब स्थिति यह है कि गर्डर लॉन्चिंग के लिए रेलवे से जरूरी अनुमति नहीं मिलने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। रेलवे ट्रैक के ऊपर गर्डर लॉन्चिंग एक संवेदनशील तकनीकी प्रक्रिया होती है। इसके लिए ट्रेनों की आवाजाही, सुरक्षा व्यवस्था, ब्लॉक और लॉन्चिंग की तकनीकी योजना को लेकर रेलवे की मंजूरी जरूरी होती है।

इसी मंजूरी को लेकर पुल निर्माण निगम और रेलवे के अधिकारियों के बीच लंबे समय से पत्राचार चल रहा है। लेकिन करीब चार महीने गुजरने के बावजूद फाइल को अंतिम स्वीकृति नहीं मिल सकी है। इसके कारण निर्माण एजेंसी तैयारियों के बावजूद अगले महत्वपूर्ण चरण की ओर नहीं बढ़ पा रही है।

मामला तब और गरमा गया जब दोनों विभागों के इंजीनियर आमने-सामने हुए। बैठक के दौरान फाइल को लेकर सवाल-जवाब के बीच कहासुनी की स्थिति बन गई। हालांकि विवाद के बावजूद गर्डर लॉन्चिंग की अनुमति का रास्ता तत्काल साफ नहीं हो सका।

इस देरी का सीधा असर फ्लाईओवर की समयसीमा पर पड़ सकता है। परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण चरण रेलवे ट्रैक के ऊपर गर्डर स्थापित करना है। जब तक यह काम नहीं होता, फ्लाईओवर का मुख्य हिस्सा आगे नहीं बढ़ सकता।

भोलानाथ आरओबी का उद्देश्य शहर के महत्वपूर्ण हिस्सों के बीच यातायात को सुगम बनाना है। इस इलाके में रेलवे क्रॉसिंग और सड़क यातायात के कारण लोगों को लंबे समय से परेशानी होती रही है। फ्लाईओवर बनने के बाद इस मार्ग पर आवागमन आसान होने की उम्मीद है।

परियोजना की शुरुआती योजना में भोलानाथ के ऊपर करीब 1110 मीटर लंबा टू-लेन फ्लाईओवर बनाए जाने की बात सामने आई थी। इसकी चौड़ाई करीब 8.4 मीटर और ऊंचाई करीब साढ़े सात मीटर बताई गई थी।

निर्माण में देरी का एक कारण यह भी है कि रेलवे क्षेत्र में काम करने के लिए सामान्य सड़क निर्माण की तुलना में ज्यादा समन्वय की जरूरत होती है। गर्डर लॉन्चिंग के दौरान रेलवे ट्रैक की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहती है। इसलिए रेलवे की तकनीकी टीम समय, मशीनरी और सुरक्षा व्यवस्था की जांच के बाद ही अनुमति देती है।

हालांकि चार महीने से फाइल अटके रहने से निर्माण एजेंसी की चिंता बढ़ गई है। पुल निर्माण निगम चाहता है कि रेलवे जल्द से जल्द आवश्यक अनुमति दे, ताकि गर्डर लॉन्चिंग का कार्यक्रम तय किया जा सके और काम को आगे बढ़ाया जा सके।

दूसरी ओर रेलवे की ओर से सुरक्षा और तकनीकी मानकों को लेकर अपनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। ऐसे में दोनों विभागों के बीच बेहतर समन्वय से ही मामला आगे बढ़ सकता है।

स्थानीय लोगों के लिए यह देरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भोलानाथ फ्लाईओवर से शहर के व्यस्त मार्गों पर यातायात दबाव कम होने की उम्मीद है। परियोजना जितनी लंबी खिंचेगी, लोगों को मौजूदा यातायात व्यवस्था से उतनी ही देर तक गुजरना पड़ेगा।

अब अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गर्डर लॉन्चिंग की फाइल को जल्द निपटाना है। इसके लिए रेलवे और पुल निर्माण निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर समन्वय बढ़ाने की जरूरत है। फाइल को मंजूरी मिलने के बाद ही लॉन्चिंग की तारीख तय हो सकेगी।

फिलहाल भोलानाथ फ्लाईओवर का निर्माण पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन गर्डर लॉन्चिंग जैसे अहम चरण पर काम अटक गया है। चार महीने से मंजूरी का इंतजार और इंजीनियरों के बीच हुई कहासुनी ने परियोजना में विभागीय समन्वय की समस्या को उजागर किया है। अब देखना होगा कि रेलवे की मंजूरी कब मिलती है और गर्डर लॉन्चिंग का काम कब शुरू हो पाता है।

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