भागलपुर के नवगछिया में गंगा की तेज धार के बीच बुधवार दोपहर हुए नाव हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया। राघोपुर इलाके में तटबंध मरम्मत और कटाव रोकने के काम में जुटे 21 मजदूरों को लेकर जा रही जल संसाधन विभाग की नाव अचानक नदी की तेज धारा और भंवर की चपेट में आकर पलट गई। नाव के पलटते ही मजदूर गंगा में गिर गए। कुछ सेकेंड तक किसी को समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ, फिर हर तरफ चीख-पुकार मच गई। किसी ने नाव पकड़ने की कोशिश की तो कोई सीधे तेज बहाव में तैरने लगा। इस हादसे में 19 मजदूर किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकल आए, लेकिन दो मजदूर बादल मंडल और सिकंदर मंडल अभी भी लापता हैं। उनकी तलाश में SDRF की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है।
हादसा करीब दोपहर 2:30 बजे का बताया जा रहा है। गंगा के किनारे काजीकोरैया-राघोपुर तटबंध में कटाव और टूटने की स्थिति के बाद वहां राहत और बाढ़ नियंत्रण का काम चल रहा था। इसी काम के लिए मजदूर नाव से नदी के उस हिस्से की ओर जा रहे थे, जहां तटबंध को मजबूत करने के लिए जियोबैग और दूसरी सामग्री पहुंचाई जा रही थी। अचानक नदी में भंवर बना और नाव का संतुलन बिगड़ गया। देखते ही देखते नाव पलट गई और उस पर सवार सभी मजदूर पानी में जा गिरे।
नाव पलटने के बाद जो मजदूर तैरना जानते थे, उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा दी। तेज बहाव में तैरना आसान नहीं था। पानी उन्हें लगातार अपनी दिशा में खींच रहा था, लेकिन जिंदगी बचाने की कोशिश में मजदूर हाथ-पैर चलाते रहे। कुछ मजदूरों ने करीब 20 मिनट तक गंगा की लहरों से संघर्ष किया और आखिरकार किसी तरह किनारे तक पहुंचने में कामयाब हुए। उनके लिए वह समय जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष जैसा था।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक नाव डूबने के बाद कुछ मजदूर एक-दूसरे को बचाने की कोशिश भी कर रहे थे। लेकिन गंगा का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही पलों में लोग एक-दूसरे से अलग हो गए। जो लोग मजबूत तैराक थे, उन्होंने पहले खुद को सुरक्षित करने की कोशिश की और फिर दूसरे साथियों को बचाने की कोशिश की। इस दौरान कई मजदूर बहते हुए काफी दूर निकल गए।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने भी बचाव कार्य शुरू कर दिया। कुछ लोग नदी किनारे पहुंचे और पानी में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने में मदद की। इसी बीच प्रशासन और पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही SDRF की टीम मोटरबोट और बचाव उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची और नदी में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों ने भी बचाव दल का सहयोग किया।
शुरुआत में 12 मजदूर खुद तैरकर सुरक्षित घाट तक पहुंचने में कामयाब हुए। इसके बाद SDRF की टीम ने अभियान चलाकर सात अन्य मजदूरों को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस तरह कुल 19 लोगों को बचा लिया गया। हादसे में बचे मजदूरों के चेहरे पर डर साफ नजर आ रहा था। कई लोग काफी देर तक सदमे में रहे। उनके लिए यह विश्वास करना मुश्किल था कि वे इतनी तेज धारा से जिंदा बाहर निकल आए हैं।
लेकिन बचाव अभियान के दौरान दो मजदूरों का कोई पता नहीं चल सका। प्रशासन के मुताबिक लापता लोगों की पहचान बादल मंडल और सिकंदर मंडल के रूप में हुई है। बादल मंडल की उम्र करीब 32 साल बताई गई है और वह लोदीपुर के रहने वाले हैं, जबकि सिकंदर मंडल करीब 55 वर्ष के हैं और सिमरिया गांव के निवासी बताए गए हैं। दोनों के परिवारों को हादसे की जानकारी दी गई है।
लापता मजदूरों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजन गंगा किनारे पहुंचकर बचाव दल की गतिविधियों को देखते रहे। हर गुजरते मिनट के साथ उनकी बेचैनी बढ़ती गई। उन्हें उम्मीद है कि दोनों मजदूर कहीं सुरक्षित होंगे और रेस्क्यू टीम उन्हें ढूंढ निकालेगी। तेज बहाव और नदी में बने भंवरों के कारण SDRF को तलाशी अभियान में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
हादसे के बाद नाव के नीचे मजदूरों के दबे होने की आशंका भी जताई गई। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। SDRF की टीम नदी में अलग-अलग स्थानों पर तलाश कर रही है। मोटरबोट के जरिए नदी के बहाव वाले हिस्सों को खंगाला जा रहा है और गोताखोर भी तलाश अभियान में लगाए गए हैं।
इस हादसे ने बाढ़ नियंत्रण और तटबंध मरम्मत के दौरान मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जिला प्रशासन के अनुसार पहले ही निर्देश दिए गए थे कि नाव पर काम करने वाले मजदूरों को लाइफ जैकेट उपलब्ध कराई जाए और उन्हें पहनकर ही काम कराया जाए। प्रशासन ने सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन को गंभीरता से लिया है और संबंधित ठेकेदार या वेंडर के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडे ने हादसे के बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया और बचाव तथा बाढ़ नियंत्रण कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने फिलहाल बाढ़ नियंत्रण के काम में सामान लाने-ले जाने के लिए नावों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही है। इसके स्थान पर ट्रैक्टर से सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।
प्रशासन के मुताबिक नाव में कुल 21 लोग सवार थे और उनमें से 19 को बचाया जा चुका है। हादसे के बाद दो लोगों की तलाश लगातार जारी है। घटना की वजह नदी में अचानक बने भंवर को बताया गया है, हालांकि सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही की आशंका को भी प्रशासन जांच के दायरे में रख रहा है। संबंधित ठेकेदार और वेंडर के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
गंगा इस समय उफान पर है और नदी के तेज बहाव के कारण राघोपुर क्षेत्र में तटबंध और कटाव से निपटने का काम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। मजदूर इसी चुनौती के बीच जियोबैग और दूसरी सामग्री के जरिए तटबंध को मजबूत करने में लगे थे। लेकिन जिस नाव से वे काम की जगह तक पहुंच रहे थे, वही नाव हादसे का कारण बन गई।
हादसे में बचकर लौटे मजदूरों के लिए भी यह अनुभव शायद जिंदगी भर नहीं भुलाया जा सकेगा। कुछ मिनट पहले तक वे अपने साथियों के साथ नाव पर बैठे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि अचानक नाव पलट जाएगी और उन्हें गंगा की तेज धार में अपनी जान बचाने के लिए तैरना पड़ेगा। नाव के पलटते ही हर मजदूर के सामने केवल एक ही लक्ष्य था—किसी तरह किनारे तक पहुंचना।
गंगा की तेज लहरों में तैरना अपने आप में बेहद मुश्किल था। पानी का बहाव मजदूरों को लगातार खींच रहा था। कई मजदूरों को यह भी उम्मीद नहीं थी कि वे जिंदा बाहर निकल पाएंगे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। एक-दूसरे से अलग होने के बावजूद मजदूर लगातार तैरते रहे। करीब 20 मिनट तक पानी में संघर्ष करने के बाद कुछ लोग सुरक्षित किनारे तक पहुंचे।
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उधर, हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन को प्राथमिकता दी। SDRF की टीम ने मौके पर पहुंचकर नदी में खोज शुरू की। अधिकारियों ने आसपास के इलाकों में भी नजर रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि तेज बहाव में अगर कोई व्यक्ति दूर तक बह गया हो तो उसे किसी दूसरे स्थान पर खोजा जा सके।
लापता दोनों मजदूरों की तलाश के लिए नदी के संभावित बहाव क्षेत्र को भी खंगाला जा रहा है। बचाव दल यह मानकर चल रहा है कि तेज बहाव के कारण मजदूर घटनास्थल से काफी दूर जा सकते हैं। इसलिए तलाशी का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
इस हादसे ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि बाढ़ नियंत्रण जैसे जोखिम वाले काम में लगे मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी। प्रशासन ने लाइफ जैकेट पहनने के निर्देश पहले से दिए होने की बात कही है। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि हादसे के समय मजदूरों के पास पर्याप्त सुरक्षा उपकरण थे या नहीं और नाव में सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं।
जल संसाधन विभाग की ओर से तकनीकी पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। जिलाधिकारी ने विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ से तकनीकी जानकारी और राय लेने की बात कही है। इसके बाद आगे के बाढ़ नियंत्रण कार्यों को लेकर फैसला किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन ने इंजीनियरों को राहत और बाढ़ नियंत्रण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
घटना के बाद राघोपुर और आसपास के गांवों में भी तनाव और चिंता का माहौल है। गंगा किनारे रहने वाले लोग पहले से ही नदी के बढ़े जलस्तर और कटाव को लेकर परेशान हैं। ऐसे में मजदूरों की नाव पलटने की घटना ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी का बहाव इस समय काफी खतरनाक है और काम करने वालों को अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत है।
नाव हादसे में बचे 19 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना राहत की बड़ी बात है, लेकिन दो लोगों के लापता होने से चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। परिवार और प्रशासन दोनों की नजर SDRF के सर्च ऑपरेशन पर टिकी है। बचाव दल नदी की गहराई और तेज धारा के बीच लगातार तलाश कर रहा है।
फिलहाल इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर यही है कि 21 मजदूरों में से 19 अपने घर लौट पाए, जबकि दो परिवार अभी भी अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। गंगा की तेज लहरों में करीब 20 मिनट तक जिंदगी के लिए संघर्ष करने वाले मजदूरों की कहानी बताती है कि उस वक्त हालात कितने भयावह रहे होंगे। प्रशासन ने सुरक्षा नियमों के पालन में कथित लापरवाही को लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और आगे बाढ़ नियंत्रण के काम में नाव के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।
रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है और बादल मंडल व सिकंदर मंडल की तलाश की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि बचाव दल पूरी कोशिश कर रहा है कि दोनों लापता मजदूरों का पता लगाया जा सके। इस बीच हादसे में सुरक्षित बचे मजदूरों को उनके परिवारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है। भागलपुर के नवगछिया में गंगा का यह हादसा बाढ़ नियंत्रण कार्यों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सबक छोड़ गया है।












