भागलपुर में ट्रकों से कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। आरोप है कि शहर और आसपास के इलाकों से गुजरने वाले करीब 200 ट्रकों से रोजाना पैसे की वसूली की जाती है। ट्रक चालकों के मुताबिक, यह रकम लगातार वसूली जा रही है और इससे हर महीने लाखों रुपए का कथित अवैध धंधा चल रहा है। एक ट्रक ड्राइवर ने आरोप लगाया कि पैसे देने से इनकार करने पर उसे थाने ले जाकर मारपीट की जाती है।
ट्रक चालकों का कहना है कि सड़क पर ट्रकों को रोककर उनसे अलग-अलग नाम पर रकम मांगी जाती है। रकम नहीं देने पर उन्हें परेशान करने और कार्रवाई का डर दिखाने का आरोप लगाया गया है। कुछ चालकों ने दावा किया कि कई जगहों पर तय रकम नहीं देने पर ट्रक को आगे बढ़ने में परेशानी होती है।
बताया जा रहा है कि रोजाना करीब 200 ट्रकों से वसूली की जाती है। अगर हर ट्रक से औसतन एक निश्चित रकम ली जाए तो महीने में लाखों रुपए की राशि जमा होने का अनुमान लगाया जा सकता है। इसी आधार पर आरोप लगाने वालों का दावा है कि करीब 12 लाख रुपए महीने का अवैध धंधा चल रहा है।
हालांकि यह राशि और वसूली की पूरी व्यवस्था अभी आरोपों के स्तर पर है। संबंधित अधिकारियों की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि किया जाना बाकी है। मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
एक ट्रक ड्राइवर ने अपना अनुभव बताते हुए आरोप लगाया कि जब उसने मांगी गई रकम देने से इनकार किया तो उसे थाने ले जाया गया। ड्राइवर का दावा है कि वहां उसके साथ मारपीट की गई। उसने आरोप लगाया कि ट्रक चालकों पर पैसे देने का दबाव बनाया जाता है और विरोध करने पर उन्हें डराया-धमकाया जाता है।
ट्रक चालकों के अनुसार, लंबी दूरी की यात्रा करने वाले ड्राइवर पहले से ही ईंधन, टोल, परमिट, मरम्मत और अन्य खर्चों से परेशान रहते हैं। ऐसे में सड़क पर अलग-अलग जगहों पर कथित वसूली से उनका आर्थिक बोझ और बढ़ जाता है।
ड्राइवरों का कहना है कि अगर कोई चालक वसूली का विरोध करता है तो उसे अलग-अलग तरीकों से परेशान किया जाता है। आरोप है कि कभी दस्तावेज जांच के नाम पर रोका जाता है तो कभी ट्रक को थाने ले जाने की बात कही जाती है। कुछ चालकों ने पुलिस कार्रवाई के डर से पैसे देने की बात कही।
मामले को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में ट्रकों से रोजाना वसूली की जा रही है तो इसकी निगरानी करने वाले अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। ट्रक चालकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
वसूली के आरोपों के बीच ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर सड़क पर ट्रकों को अवैध तरीके से रोककर पैसे लिए जाते हैं तो इसका असर सीधे माल ढुलाई की लागत पर पड़ता है। ट्रांसपोर्टर बाद में इन अतिरिक्त खर्चों को माल भाड़े में शामिल करते हैं, जिसका अप्रत्यक्ष असर आम लोगों तक पहुंच सकता है।
ट्रक ड्राइवरों के बीच भी इस मामले को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। उनका कहना है कि वे रोजी-रोटी के लिए लंबी दूरी तय करते हैं और रास्ते में किसी तरह की जबरन वसूली उनके लिए गंभीर समस्या है।
ड्राइवरों ने यह भी मांग की है कि प्रमुख मार्गों पर ट्रकों की जांच की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो। अगर किसी वाहन के दस्तावेज या सामान में कोई कमी है तो नियम के अनुसार कार्रवाई की जाए, लेकिन कथित तौर पर पैसे लेकर ट्रक छोड़ने या पैसे नहीं देने पर मारपीट करने की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए।
मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए 200 ट्रकों से रोज वसूली और 12 लाख रुपए महीने के आंकड़े को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। पुलिस या प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में कितने ट्रकों से कितनी राशि वसूली गई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
अगर ट्रक ड्राइवर द्वारा थाने में मारपीट के लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला और गंभीर हो सकता है। पुलिस हिरासत या थाने में किसी भी व्यक्ति के साथ मारपीट का आरोप सामने आने पर इसकी अलग से जांच की जरूरत होगी।
ट्रक चालकों का कहना है कि वे मामले को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक अपनी शिकायत पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर शिकायतों पर कार्रवाई होती है तो सड़क पर होने वाली कथित अवैध वसूली पर रोक लग सकती है।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भागलपुर में ट्रकों से वास्तव में संगठित तरीके से वसूली की जा रही है और अगर हां, तो इसके पीछे कौन लोग हैं। आरोपों की जांच और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया से ही तस्वीर साफ हो सकेगी।
ट्रक ड्राइवर के कथित बयान ने मामले को और गंभीर बना दिया है। उसने दावा किया है कि पैसे नहीं देने













