भारत-आर्मेनिया रक्षा साझेदारी में नई तेजी: पिनाका रॉकेट के बाद येरेवान पहुंचे CDS अनिल चौहान

पिनाका रॉकेट सौदे के बाद भारत-आर्मेनिया रक्षा साझेदारी में नई तेजी आई है। CDS अनिल चौहान रणनीतिक बैठकों के लिए येरेवान पहुंचे। आर्मेनिया का रणनीतिक महत्व क्यों?

भारत और आर्मेनिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के बीच चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रविवार को आर्मेनिया की राजधानी येरेवान पहुंचे। 

नई दिल्ली: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान रविवार को एक उच्च स्तरीय प्रतिमंडल के साथ आर्मेनिया पहुंचे हैं। उनकी चार दिवसीय यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करना है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब हाल ही में भारत ने आर्मेनिया को स्वदेशी गाइडेड पिनाका रॉकेट की पहली खेप भेजी है। 

भारत के सबसे बड़े सैन्य अधिकारी की यह यात्रा दोनों देशों के बढ़ते रक्षा संबंधों को दर्शाती है और क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उच्च-स्तरीय सैन्य प्रतिनिधिमंडल के साथ यात्रा

सीडीएस अनिल चौहान एक वरिष्ठ सैन्य प्रतिनिधिमंडल के साथ आर्मेनिया पहुंचे हैं। उनका उद्देश्य द्विपक्षीय रक्षा सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण, तकनीकी साझेदारी और आपसी सुरक्षा हितों को और मजबूत करना है। इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (IDS) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जारी बयान में कहा कि यह यात्रा “साझा रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने और दीर्घकालिक रक्षा एवं सुरक्षा साझेदारी को गहरा करने” की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

येरेवान एयरपोर्ट पर भारत की राजदूत निलाक्षी साहा सिन्हा और आर्मेनियाई सशस्त्र बलों के डिप्टी चीफ मेजर जनरल तैमूर शाहनजार्यन ने जनरल चौहान का स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य तालमेल का संकेत है।

पिनाका रॉकेट: भारत का बड़ा रक्षा निर्यात

सीडीएस की यात्रा से ठीक दो सप्ताह पहले भारत ने आर्मेनिया को गाइडेड पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम की पहली खेप भेजी थी। यह प्रणाली पुणे स्थित Solar Defence & Aerospace Ltd. द्वारा निर्मित है और भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की गई है। सितंबर 2022 में आर्मेनिया ने भारत से चार पिनाका रॉकेट सिस्टम खरीदने के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये का सौदा किया था। इसके साथ ही आर्मेनिया इस अत्याधुनिक रॉकेट प्रणाली का पहला अंतरराष्ट्रीय खरीदार बन गया।

भारत इससे पहले 2024 तक आर्मेनिया को अनगाइडेड पिनाका रॉकेट की आपूर्ति भी पूरी कर चुका है। यह सौदा भारत की बढ़ती रक्षा निर्यात क्षमता और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

आर्मेनिया का रणनीतिक महत्व क्यों?

आर्मेनिया भौगोलिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। यह रूस, तुर्की और ईरान की सीमाओं से सटा हुआ है और दक्षिण कॉकस क्षेत्र में शक्ति संतुलन का अहम हिस्सा है। भारत के लिए आर्मेनिया के साथ संबंध इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह क्षेत्र यूरोप और मध्य एशिया के बीच एक रणनीतिक सेतु है। नई दिल्ली यहां अपनी कूटनीतिक और सैन्य उपस्थिति मजबूत कर रही है, जो उसके व्यापक यूरेशियन दृष्टिकोण का हिस्सा है।

पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान और आर्मेनिया ने राजनयिक संबंध बहाल करने की दिशा में कदम बढ़ाए थे। इससे पहले पाकिस्तान ने आर्मेनिया से दूरी बनाए रखी थी, क्योंकि उसका करीबी सहयोगी अजरबैजान आर्मेनिया के साथ संघर्ष में रहा है। 

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